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Jhansi News: झांसी मेडिकल कॉलेज में पहली बार होगा दवाओं का क्लीनिकल ट्रायल
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नीरज वर्मा
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पहली बार दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल की सुविधा विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए कॉलेज में क्लीनिकल ट्रायल यूनिट (सीटीयू) स्थापित करने की मंजूरी मिल गई है। यूनिट के लिए 54.44 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। बुधवार को पहली किस्त के रूप में 27.22 लाख रुपये हर यूनिट को जारी किए गए हैं।
यूनिट के निर्माण और उपकरणों की स्थापना के लिए एक साल का समय निर्धारित किया गया है। इससे मेडिकल कॉलेज में दवाओं के परीक्षण और चिकित्सा अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश के सात जिलों के 13 मेडिकल संस्थानों में क्लीनिकल ट्रायल यूनिट स्थापित की जाएंगी। उप्र. प्रमोट फार्मा काउंसिल (यूपीपीपीसी) की सीईओ कृतिका शर्मा ने इन इकाइयों की स्थापना के लिए मंजूरी प्रदान करते हुए पहली किस्त जारी की। मेडिकल संस्थानों में ऐसी समर्पित इकाइयां नहीं होने से क्लीनिकल ट्रायल के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव रहता है। नई इकाइयों के माध्यम से दवाओं के क्लीनिकल परीक्षण और चिकित्सा अनुसंधान के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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तीन चरणों में मिलेगा अनुदान
प्रत्येक क्लीनिकल ट्रायल यूनिट के लिए 54.44 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। यह राशि तीन चरणों में जारी होगी। पहली किस्त में 50 प्रतिशत यानी 27. 22 लाख दिए गए हैं। दूसरी किस्त में 45 प्रतिशत और तीसरी किस्त में शेष पांच प्रतिशत राशि जारी की जाएगी। अगली किस्त जारी करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पिछली राशि का इस्तेमाल स्वीकृत मदों में हुआ है। इसके लिए खर्च का विवरण भी देना होगा।
सीईओ ने निर्देश दिए हैं कि अनुदान से खरीदे जाने वाले उपकरण संबंधित संस्थान की संपत्ति होंगे। इन्हें स्टॉक रजिस्टर में दर्ज करना होगा। क्लीनिकल ट्रायल यूनिट का उपयोग अन्य संगठन या संस्थान भी निर्धारित शुल्क देकर कर सकेंगे। इन इकाइयों में परीक्षण और अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियां ही संचालित की जाएंगी।
मेडिकल रिसर्च सेंटर में बनेगी यूनिट
झांसी मेडिकल कॉलेज की वर्तमान इमरजेंसी बिल्डिंग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से दो करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल रिसर्च सेंटर बनवाया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन ने इसी भवन में क्लीनिकल ट्रायल यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया है। प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि सीटीयू की पहली किस्त मिल गई है। इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है।
इन संस्थानों में भी स्थापित होंगी यूनिट
प्रदेश में एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ, जेके कैंसर इंस्टीट्यूट कानपुर, एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड कार्डिक सर्जरी कानपुर, गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज कानपुर, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ नोएडा, गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ग्रेटर नोएडा, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी, एएसएमसी बुलंदशहर, एएसएमसी अयोध्या, डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लखनऊ, एसजीपीजीआई लखनऊ, कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट् लखनऊ और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में क्लीनिकल ट्रायल यूनिट स्थापित करने की योजना है।
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पहली बार दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल की सुविधा विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए कॉलेज में क्लीनिकल ट्रायल यूनिट (सीटीयू) स्थापित करने की मंजूरी मिल गई है। यूनिट के लिए 54.44 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। बुधवार को पहली किस्त के रूप में 27.22 लाख रुपये हर यूनिट को जारी किए गए हैं।
यूनिट के निर्माण और उपकरणों की स्थापना के लिए एक साल का समय निर्धारित किया गया है। इससे मेडिकल कॉलेज में दवाओं के परीक्षण और चिकित्सा अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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प्रदेश के सात जिलों के 13 मेडिकल संस्थानों में क्लीनिकल ट्रायल यूनिट स्थापित की जाएंगी। उप्र. प्रमोट फार्मा काउंसिल (यूपीपीपीसी) की सीईओ कृतिका शर्मा ने इन इकाइयों की स्थापना के लिए मंजूरी प्रदान करते हुए पहली किस्त जारी की। मेडिकल संस्थानों में ऐसी समर्पित इकाइयां नहीं होने से क्लीनिकल ट्रायल के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव रहता है। नई इकाइयों के माध्यम से दवाओं के क्लीनिकल परीक्षण और चिकित्सा अनुसंधान के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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तीन चरणों में मिलेगा अनुदान
प्रत्येक क्लीनिकल ट्रायल यूनिट के लिए 54.44 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। यह राशि तीन चरणों में जारी होगी। पहली किस्त में 50 प्रतिशत यानी 27. 22 लाख दिए गए हैं। दूसरी किस्त में 45 प्रतिशत और तीसरी किस्त में शेष पांच प्रतिशत राशि जारी की जाएगी। अगली किस्त जारी करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पिछली राशि का इस्तेमाल स्वीकृत मदों में हुआ है। इसके लिए खर्च का विवरण भी देना होगा।
सीईओ ने निर्देश दिए हैं कि अनुदान से खरीदे जाने वाले उपकरण संबंधित संस्थान की संपत्ति होंगे। इन्हें स्टॉक रजिस्टर में दर्ज करना होगा। क्लीनिकल ट्रायल यूनिट का उपयोग अन्य संगठन या संस्थान भी निर्धारित शुल्क देकर कर सकेंगे। इन इकाइयों में परीक्षण और अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियां ही संचालित की जाएंगी।
मेडिकल रिसर्च सेंटर में बनेगी यूनिट
झांसी मेडिकल कॉलेज की वर्तमान इमरजेंसी बिल्डिंग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से दो करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल रिसर्च सेंटर बनवाया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन ने इसी भवन में क्लीनिकल ट्रायल यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया है। प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि सीटीयू की पहली किस्त मिल गई है। इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है।
इन संस्थानों में भी स्थापित होंगी यूनिट
प्रदेश में एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ, जेके कैंसर इंस्टीट्यूट कानपुर, एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड कार्डिक सर्जरी कानपुर, गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज कानपुर, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ नोएडा, गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ग्रेटर नोएडा, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी, एएसएमसी बुलंदशहर, एएसएमसी अयोध्या, डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लखनऊ, एसजीपीजीआई लखनऊ, कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट् लखनऊ और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में क्लीनिकल ट्रायल यूनिट स्थापित करने की योजना है।