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Jhansi News: करोड़ों का टैक्स 50 लाख तक दर्शाने के लिए मांगी थी डेढ़ करोड़ की रिश्वत

Fri, 02 Jan 2026 02:10 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jan 2026 02:10 AM IST
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A bribe of Rs 1.5 crore was demanded to show taxes worth crores as only Rs 50 lakh.
संवाद न्यूज एजेंसी
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झांसी। सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्नर समेत पांच को 70 लाख रुपये घूस लेते सीबीआई द्वारा पकड़े जाने के प्रकरण में कई नए तथ्य सामने आए हैं। जीएसटी के अधिकारियों ने मामला निपटाने के एवज में कारोबारियों से करोड़ों के टैक्स की रकम महज 50 लाख रुपये तक दर्शाने के लिए 1.50 करोड़ रुपये घूस मांगी थी। वहीं, जब्त मोबाइल फोन से मिली अहम जानकारियों के बाद सीबीआई को इन अधिकारियों की बेनामी संपत्ति होने का भी शक है। इसकी भी जांच शुरू कर दी गई है। पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई इंस्पेक्टर आशीष कुमार सिंह कर रहे हैं।

सेंट्रल जीएसटी की टीम ने बीते 18 दिसंबर को झोकनबाग स्थित मेसर्स जय अम्बे प्लाईवुड और मेसर्स जय दुर्गा हार्डवेयर के कार्यालय, परिसरों और गोदामों में छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में अघोषित स्टॉक और टैक्स चोरी का मामला सामने आने के बाद दस्तावेज जब्त कर लिए थे। जय अम्बे प्लाईवुड के मालिक लोकेश तोलानी व जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगतानी और मधुर विहार कॉलोनी के तेजपाल मंगतानी ने मामला निपटाने के लिए बसंत विहार सिविल लाइन में रहने वाले अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता से बात की। बिचौलिया नरेश गुप्ता ने सीजीएसटी टीम की कार्रवाई के दौरान ही अधीक्षक अनिल तिवारी को फोन लगा दिया और रिश्वत लेकर मामला निपटाने की बात कही। अनिल ने नरेश को बताया था कि बड़ी संख्या में अघोषित स्टॉक और फर्म मालिकों के खिलाफ सबूत मिले हैं। साथ ही मामला निपटाने में सहयोग करने की बात कही। कार्रवाई के अगले ही दिन 19 दिसंबर को लोकेश और राजू मंगतानी अधीक्षक अनिल तिवारी के घर पहुंचे। अधीक्षक ने उन्हें कार्यालय व गोदाम की चाबियां वापस दिलवाईं। फिर रिश्वत की रकम अलग-अलग जगहों पर दो बार में दी गई।
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सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने दस दिन पहले से ही सीजीएसटी में चल रही घूसखोरी को लेकर मिले इनपुट के आधार पर रेकी शुरू कर दी थी। सीबीआई को आरोपियों के जब्त मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इसके बाद अफसरों, उनके नजदीकी और रिश्तेदारों की बेनामी संपत्ति होने के शक में जांच शुरू कर दी गई है। दूसरी तरफ, सीबीआई की कार्रवाई से सीजीएसटी में हड़कंप मचा है। पूरे प्रकरण में कई अफसर और व्यापारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
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घूस की रकम कम करने को तैयार नहीं थी डिप्टी कमिश्नर

जांच में पता चला है कि सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी घूस की रकम कम करने को तैयार नहीं थी। अधीक्षक अजय शर्मा ने वकील से कहा कि वह राजू मंगतानी से 29 दिसंबर को पैसा लेकर ''''''''साहब'''''''' को भेज दें। हालांकि इन सभी की गतिविधियों की भनक सीबीआई को लग चुकी थी, जिसके बाद लखनऊ से भेजी गई टीम ने डिप्टी कमिश्नर, दोनों अधीक्षक, वकील और कारोबारी राजू मंगतानी को घूस की रकम का लेनदेन करते हुए दबोच लिया। इसके बाद उनके ठिकानों पर मारे गए छापों में 70 लाख रुपये की नकदी, सोने के जेवरात, चांदी के बार और तमाम संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए।

सीजीएसटी कार्यालय का जड़ा ताला, अंदर करते रहे काम

भ्रष्टाचार के मामले में डिप्टी कमिश्नर सहित दो अधीक्षक की गिरफ्तारी के बाद से सीजीएसटी कार्यालय में बुधवार को सन्नाटा पसरा रहा। वहीं बृहस्पतिवार की सुबह कार्यालय का मुख्य द्वार जरूर खुला रहा लेकिन कर्मचारियों ने अंदर से चैनल बंद कर लिया। किसी को अंदर नहीं दिया।


जमीनों और व्यापार में लगा रहे थे घूस की रकम

सीजीएसटी अफसरों पर कार्रवाई के बाद दबी जुबान में व्यापारी इनकी करतूतों की चर्चा करने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक व्यापारियों का कहना है कि सीजीएसटी में तैनात अफसर कार्रवाई का भय दिखाकर रुपये वसूल रहे थे। अफसरों ने घूस की रकम जमीनों और व्यापार में भी लगाई है। वहीं घूस के पैसे से बड़ी मात्रा में सोना और चांदी भी खरीदा है।




सफेदपोश से लेकर व्यापारियों में भी थी हनक
सीजीएसटी के अधीक्षक की सफेदपोश से लेकर बड़े कारोबारियों में अच्छी हनक थी। यही कारण है कि वह कई धंधों में शामिल होने के बाद उन्हें सीजीएसटी की कार्रवाई से बचाता रहा। अब कार्रवाई के बाद ऐसे कारोबारियों के चेहरे पर सिकन दिखने लगी है।




अधिवक्ता समेत तीन-तीन व्यापारी, अफसर नामजद
सीबीआई ने टैक्स कम करने के एवज में डेढ़ करोड़ की घूस प्रकरण में सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी निवासी नमो होम्स ग्वालियर-शिवपुरी बाईपास, अधीक्षक अनिल कुमार तिवारी निवासी सेवाराम ऑयल मील सिविल लाइन, अधीक्षक अजय शर्मा निवासी शिवाजी नगर, अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता निवासी बसंत विहार कालोनी सिविल लाइन, जय अम्बे प्लाईवुड के मालिक लोकेश तोलानी निवासी आवास विकास कालोनी सीपरी बाजार, जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगतानी व तेजपाल मंगतानी निवासी मधुर विहार कालोनी सिविल लाइन के अलावा अन्य अज्ञात के विरुद्ध भ्रष्ट और अवैध गतिविधियों में लिप्त होने, कर उल्लंघन के मामले में कार्रवाई के बदले रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया है।


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