फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   गिर रही है गाज

गिर रही है गाज

Mon, 28 Jul 2014 05:31 AM IST
Jhansi
Jhansi Updated Mon, 28 Jul 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
झांसी। इस बार गाज गिरने के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ही गाज गिरने से जनपद में आधा दर्जन लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
विज्ञापन

‘काले मेघा - काले मेघा पानी तो बरसाओ, बिजली की तलवार नहीं बूंदों के बाण चलाओ’ लगान फिल्म का यह गीत झांसी में अपने को चरितार्थ करता नजर आ रहा है। शुरू में यहां मानसून की बेरुखी रही। जून माह सूखा बीता और जुलाई में भी औसत से कम बारिश हुई। यानी बूंदों (बारिश) के बाण कम चल रहे हैं, परंतु बिजली (गाज) की तलवार खूब चल रही है। वित्तीय वर्ष 2014 - 15 के अप्रैल से लेकर जुलाई माह तक आधा दर्जन लोगों की गाज की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। जबकि, पिछले पूरे साल (2013 - 14) में गाज से सात जानें गईं थीं।
विज्ञापन


48 घंटे में मिलता है मुआवजा
झांसी। गाज गिरने से जनहानि की स्थिति में शासन द्वारा संबंधित मृतक के परिवार / आश्रित को डेढ़ लाख रुपये का मुआवजा उपलब्ध कराया जाता है। यह मुआवजा 48 घंटे के भीतर पीड़ित परिवार को प्रदान कर दिया जाता है। इसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गाज से मौत की पुष्टि होना जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बारिश से बचे, पर गाज से नहीं
झांसी। गाज से मौत के ज्यादातर मामलों में एक समानता है। वह यह कि इन सभी लोगों ने बारिश से बचने के लिए पेड़ की छाया का सहारा लिया था। वह बारिश से तो बच गए, परंतु गाज पेड़ पर गिरी, जिससे उसके नीचे खड़े लोग मारे गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed