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गोपा अष्टमी 10 को, होगा गायों का पूजन
Jhansi
Updated Thu, 07 Nov 2013 05:43 AM IST
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झांसी। दस नवंबर को गोपा अष्टमी पर गायों का पूजन किया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए भक्तजन गायों की सेवा करेंगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने लोगों से गोवर्धन पर्वत का पूजन कराया था। इससे देवताओं के राजा इंद्र कुपित हो गए। इंद्र ने भयंकर तूफान व बरसात कर दी। इंद्र के अभिमान को तोड़ने और ग्वालों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ उंगली से गोवर्धन पर्वत उठा लिया। लगातार सात दिनों तक भगवान पर्वत को उठाए रहे और इंद्र को अपने विष्णु रूप के दर्शन कराए। इससे इंद्र का घमंड नष्ट हो गया। श्रीकृष्ण की शरण में जाकर इंद्र ने कामधेनु गाय के दूध से भगवान का अभिषेक किया और क्षमा मांगी। तभी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। जिला धर्माचार्य महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार गोपा अष्टमी पर गायों का पूजन करने से भक्त को पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की कृपा भी बनी रहती है। इस दिन ग्वालों का पूजन करने की भी परंपरा है।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने लोगों से गोवर्धन पर्वत का पूजन कराया था। इससे देवताओं के राजा इंद्र कुपित हो गए। इंद्र ने भयंकर तूफान व बरसात कर दी। इंद्र के अभिमान को तोड़ने और ग्वालों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ उंगली से गोवर्धन पर्वत उठा लिया। लगातार सात दिनों तक भगवान पर्वत को उठाए रहे और इंद्र को अपने विष्णु रूप के दर्शन कराए। इससे इंद्र का घमंड नष्ट हो गया। श्रीकृष्ण की शरण में जाकर इंद्र ने कामधेनु गाय के दूध से भगवान का अभिषेक किया और क्षमा मांगी। तभी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। जिला धर्माचार्य महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार गोपा अष्टमी पर गायों का पूजन करने से भक्त को पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की कृपा भी बनी रहती है। इस दिन ग्वालों का पूजन करने की भी परंपरा है।