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रंगारंग कार्यक्रमों के बीच कलरव शुरू
Jhansi
Updated Fri, 08 Mar 2013 05:31 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय इंटर फैकल्टी युवा महोत्सव 2013 कलरव शुरू हो गया। पहले दिन रंगारंग कार्यक्रम के साथ क्विज व अन्य प्रतियोगिताएं हुईं। इस मौके पर कुलपति प्रोफेसर अविनाश चंद्र पांडेय ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों का बहुमुखी विकास होता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से देश में एकरूपता आती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सभ्यताओं का उद्गम स्थल है। यहां अनेक बोलियों और संस्कृतियों का जन्म व विकास हुआ है। आडीटोरियम में आयोजित समारोह की मुख्य अतिथि अपर आयुक्त पिंकी जोवल ने कहा कि विद्यार्थी अगर महोत्सव की उत्सव प्रियता का आनंद उठाना चाहते हैं तो बहुत अनुशासित होकर महोत्सव में शामिल हों। क्योंकि वही भविष्य के नीति नियामक, अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षक व जिम्मेदार नागरिक हैं। पूर्व कुलपति प्रोफेसर ओ पी कंडारी ने विश्वविद्यालय के खेलकूद व साहित्यिक गतिविधियों के बारे में बताया। प्रति कुलपति प्रोफेसर अत्रि ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होता है। प्रोफेसर काबिया ने तीन दिवसीय महोत्सव की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
इससे पहले छात्राओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत व कुल गीत प्रस्तुत किया। वहीं, रंग बिरंगे परिधानों से सुसज्जित प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय के झंडों को लेकर ढोल नगाड़ों की थाप पर कैंपस में भ्रमण किया। इस मौके पर डा. वीणा श्रीवास्तव ने भजन, फाल्गुन व सूफी गीत सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। मंचस्थ अतिथियों का डा. इकबाल खान, डा. सौरभ श्रीवास्तव, डा. ममता सिंह, डा. प्रतीक अग्रवाल, डा. नूपुर गौतम व डा. किरण शर्मा ने गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया। इस दौरान क्विज , वाद विवाद और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं हुईं। संचालन डा. कमलेश शर्मा व डा. रेखा लगरखा ने किया। आभार डा. पुनीत गौतम ने जताया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सभ्यताओं का उद्गम स्थल है। यहां अनेक बोलियों और संस्कृतियों का जन्म व विकास हुआ है। आडीटोरियम में आयोजित समारोह की मुख्य अतिथि अपर आयुक्त पिंकी जोवल ने कहा कि विद्यार्थी अगर महोत्सव की उत्सव प्रियता का आनंद उठाना चाहते हैं तो बहुत अनुशासित होकर महोत्सव में शामिल हों। क्योंकि वही भविष्य के नीति नियामक, अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षक व जिम्मेदार नागरिक हैं। पूर्व कुलपति प्रोफेसर ओ पी कंडारी ने विश्वविद्यालय के खेलकूद व साहित्यिक गतिविधियों के बारे में बताया। प्रति कुलपति प्रोफेसर अत्रि ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होता है। प्रोफेसर काबिया ने तीन दिवसीय महोत्सव की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
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इससे पहले छात्राओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत व कुल गीत प्रस्तुत किया। वहीं, रंग बिरंगे परिधानों से सुसज्जित प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय के झंडों को लेकर ढोल नगाड़ों की थाप पर कैंपस में भ्रमण किया। इस मौके पर डा. वीणा श्रीवास्तव ने भजन, फाल्गुन व सूफी गीत सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। मंचस्थ अतिथियों का डा. इकबाल खान, डा. सौरभ श्रीवास्तव, डा. ममता सिंह, डा. प्रतीक अग्रवाल, डा. नूपुर गौतम व डा. किरण शर्मा ने गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया। इस दौरान क्विज , वाद विवाद और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं हुईं। संचालन डा. कमलेश शर्मा व डा. रेखा लगरखा ने किया। आभार डा. पुनीत गौतम ने जताया।
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