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सफाई कर्मियों व हवलदारों को हटाने की शिकायतें बढ़ीं
Jhansi
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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झांसी। शहर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतर गई है। बार - बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का हल नहीं होने से परेशान लोगों ने अब सफाई कर्मियों और हवलदारों को हटाने की मांग तेज कर दी है। पार्षदों की ओर से भी कर्मचारियों के तबादले करने के लिए अफसरों पर दबाव डाला जा रहा है, जबकि अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने से हालातों में सुधार के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
उन्नाव गेट निवासी एक व्यक्ति गत दिवस नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में पहुंचा और अफसरों से मुहल्ले की नालियां एक महीने से साफ नहीं होने की शिकायत की। एक जिम्मेदार अधिकारी ने एक - दो दिन में सफाई कराने का आश्वासन दिया। शिकायतकर्ता से रहा नहीं गया और अपने मन की भड़ास निकालते हुए कहा कि ऐसा आश्वासन तो एक महीने से मिल रहा है, लेकिन काम आज तक नहीं हुआ। अफसर ने टोकना चाहा, लेकिन उसने अपनी बात जारी रखी और बोला कि साहब, समस्या तभी हल होगी जब वहां के सफाई कर्मी को बदला जाएगा। अभी वह अपनी बात कह ही रहा था कि ओरछा गेट क्षेत्र से जुड़े एक पार्षद भी वहां पहुंच गए। वह क्षेत्र के सफाई हवलदार से परेशान होकर अफसरों के चक्कर लगा रहे थे। अधिकारी ने उन्हें भी आश्वासन दिया। यह सिर्फ आश्वासन ही था, क्योंकि पिछले काफी समय से अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह स्थिति एक दिन की नहीं है, बल्कि नगर निगम में इन दिनों सफाई कर्मियों और हवलदारों के तबादले करने की शिकायतें प्रतिदिन आ रही हैं। पिछले दिनों हुई सदन की बैठक में भी यह मुद्दा जोर शोर से उठा था। तब भी अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। स्वयं नगर आयुक्त रमाशंकर ने जगह- जगह गंदगी के ढेर लगे देखकर अफसरों को सफाई कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ।
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कागजों में शुरू हो गए सौ कर्मचारी
झांसी। दीपावली पर सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए एक माह के लिए आउट सोर्सिंग पर सौ सफाई कर्मी लगाए गए थे। यह कर्मचारी किसके वार्ड में तैनात किए गए, पार्षदों को भी जानकारी नहीं है। वार्ड नंबर 28 के पार्षद समेत आधा दर्जन पार्षदों ने गत दिवस महापौर से जानना चाहा कि आखिर इन सफाई कर्मियों से क्या काम लिया जा रहा है। अगर वास्तव में कर्मचारी फील्ड में काम करते तो सफाई व्यवस्था सुधर जाती। पार्षदों का आरोप था कि अधिकांश सफाई कर्मचारी कागजों पर ही तैनात कर दिए गए हैं। दूसरी ओर, अधिकारियों ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है, इसलिए आउट सोर्सिंग कर्मियों की तैनाती पर सवाल उठने लगे हैं।
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