{"_id":"24-26828","slug":"Jhansi-26828-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"युवाओं की आंखों में थी सुनहरे भविष्य की चमक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
युवाओं की आंखों में थी सुनहरे भविष्य की चमक
Jhansi
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
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झांसी। जहां गरीबी की अंधियारी रात कभी खत्म नहीं होती थी, अब वहां सुनहरी उम्मीदों का उजाला है। यह सब संभव हो सका है भारत सरकार की विशेष परियोजना ‘आजीविका’ से। बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, टीकमगढ़, सागर, छतरपुर आदि जिलों से प्रमाण पत्र लेने आए युवक और युवतियों की आंखों में सुनहरे भविष्य की चमक दिखाई दी। कोई अच्छा जॉब पाकर परिवार का सहारा बनकर खुश था तो कोई जल्द से जल्द ट्रेनिंग पूरी करके अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता था, ताकि गरीबी से जूझ रहे अपने परिवार के लिए कुछ कर सके। कार्यक्रम में आए कुछ युवाओं ने अनुभव साझा किए तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े।
चिरगांव के ग्राम करगुवां निवासी शिवजी राजपूत ने आरोह फाउंडेशन के पारीछा सेंटर में कंप्यूटर की ट्रेनिंग ली थी। अब वह चिरगांव ब्लाक में जनगणना कार्य में जॉब कर रहा है। इसी गांव के विक्र्रम सिंह ने बताया कि इंटर पास करने के बाद उसने मल्टी स्किल ट्रेनिंग ली। उसके बैच के कुछ साथियों को नोएडा में जॉब मिल गया, लेकिन वह घर छोड़ने की स्थिति में नहीं था। इसलिए क्षेत्र में ही जॉब कर रहा है। उसने कहा कि भारत सरकार की यह योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान है।
टीकमगढ़ के हनुमान सागर में सीतापुर शिक्षा संस्थान में राजमिस्त्री का काम सीख चुका प्रदीप अहिरवार अब अपने राजमिस्त्री पिता का हाथ बंटाता है। बंगरा ब्लाक के ग्राम जावन निवासी कल्पना अहिरवार जीआईडीएफ कंप्यूटर में दो माह की ट्रेनिंग पूरी कर चुकी है। वह चाहती है कि जल्द से जल्द एक माह और पूरा हो जाए, ताकि जॉब कर सके। ललितपुर के तालबेहट के ग्राम गुलेंदा निवासी कमल सिंह चकरपुर में ईगल सिक्योरिटी सर्विस में ट्रेनिंग ले रहा है। उसका कहना था कि वह जल्द से जल्द अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है, ताकि आठ सदस्यों वाले परिवार के खर्च में पिता का हाथ बंटा सके। ललितपुर की नदीपुरा निवासी मनीषा झा के पिता व भाई नहीं हैं। दो बहनों में वह बड़ी है। वह पीसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सीख रही है। अभी चाचा की दुकान से परिवार का खर्च चलता है। वह परिवार का सहारा बनना चाहती है।
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इसके अलावा सीतापुर शिक्षा संस्थान के राकेश अहिरवार, आरोह की ओमश्री, श्रृंखला शर्मा लखावती, सुरेंद्र सिंह, छोटेलाल पड़रिया छतरपुर, सईदा बानो ललितपुर आदि ने भी स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना के तहत ट्रेनिंग और रोजगार पाने के अनुभव सुनाए।
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चिरगांव के ग्राम करगुवां निवासी शिवजी राजपूत ने आरोह फाउंडेशन के पारीछा सेंटर में कंप्यूटर की ट्रेनिंग ली थी। अब वह चिरगांव ब्लाक में जनगणना कार्य में जॉब कर रहा है। इसी गांव के विक्र्रम सिंह ने बताया कि इंटर पास करने के बाद उसने मल्टी स्किल ट्रेनिंग ली। उसके बैच के कुछ साथियों को नोएडा में जॉब मिल गया, लेकिन वह घर छोड़ने की स्थिति में नहीं था। इसलिए क्षेत्र में ही जॉब कर रहा है। उसने कहा कि भारत सरकार की यह योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान है।
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टीकमगढ़ के हनुमान सागर में सीतापुर शिक्षा संस्थान में राजमिस्त्री का काम सीख चुका प्रदीप अहिरवार अब अपने राजमिस्त्री पिता का हाथ बंटाता है। बंगरा ब्लाक के ग्राम जावन निवासी कल्पना अहिरवार जीआईडीएफ कंप्यूटर में दो माह की ट्रेनिंग पूरी कर चुकी है। वह चाहती है कि जल्द से जल्द एक माह और पूरा हो जाए, ताकि जॉब कर सके। ललितपुर के तालबेहट के ग्राम गुलेंदा निवासी कमल सिंह चकरपुर में ईगल सिक्योरिटी सर्विस में ट्रेनिंग ले रहा है। उसका कहना था कि वह जल्द से जल्द अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है, ताकि आठ सदस्यों वाले परिवार के खर्च में पिता का हाथ बंटा सके। ललितपुर की नदीपुरा निवासी मनीषा झा के पिता व भाई नहीं हैं। दो बहनों में वह बड़ी है। वह पीसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सीख रही है। अभी चाचा की दुकान से परिवार का खर्च चलता है। वह परिवार का सहारा बनना चाहती है।
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इसके अलावा सीतापुर शिक्षा संस्थान के राकेश अहिरवार, आरोह की ओमश्री, श्रृंखला शर्मा लखावती, सुरेंद्र सिंह, छोटेलाल पड़रिया छतरपुर, सईदा बानो ललितपुर आदि ने भी स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना के तहत ट्रेनिंग और रोजगार पाने के अनुभव सुनाए।