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फिल्म स्टार अमिताभ के खिलाफ दायर रिवीजन खारिज
Jhansi
Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
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झांसी। फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन के खिलाफ दायर रिवीजन को जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्ष कुमार की अदालत ने शुक्रवार को खारिज कर दिया।
सोनी टीवी पर 28 सितंबर 2011 को रात्रि 8.30 से 10 बजे तक प्रसारित किए गए कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम के होस्ट अमिताभ बच्चन द्वारा कुरान को रचा हुआ बताए जाने पर झांसी के छनियापुरा निवासी मुदस्सर उल्ला खां ने पहले सीजेएम की अदालत में वाद दायर किया था। अदालत ने यह वाद 21 मई 2012 को खारिज कर दिया था। इसके बाद वादी ने जिला अदालत में रिवीजन फाइल किया था, जिसमें रिवीजनकर्ता का कहना था कि कुरान की रचना किसी लेखक या व्यक्ति द्वारा नहीं की गई है। स्वयं कुरान में यह अंकित है कि यह आसमान से उतारी गई है व स्वयं खुदा ने कुरान को अता किया है। अमिताभ ने इसे रचा हुआ बताकर मुस्लिमों की भावना को ठेस पहुंचाई है। बृहस्पतिवार को इस मामले में बहस हुई थी। शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए उक्त वाद को खारिज कर दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता शिवकेश दुबे ने न्यायालय में बहस के दौरान तर्क रखते हुए कहा कि उक्त कार्यक्रम में अमिताभ का उद्देश्य किसी की भावनाओं को आघात पहुंचाना नहीं था। अगर ऐसा होता तो मुस्लिम समुदाय के किसी इंस्टीट्यूशन द्वारा अमिताभ के खिलाफ फतवा जारी किया जाता, परंतु ऐसा भी नहीं हुआ। निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए जिला अदालत ने रिवीजन खारिज कर दिया।
सोनी टीवी पर 28 सितंबर 2011 को रात्रि 8.30 से 10 बजे तक प्रसारित किए गए कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम के होस्ट अमिताभ बच्चन द्वारा कुरान को रचा हुआ बताए जाने पर झांसी के छनियापुरा निवासी मुदस्सर उल्ला खां ने पहले सीजेएम की अदालत में वाद दायर किया था। अदालत ने यह वाद 21 मई 2012 को खारिज कर दिया था। इसके बाद वादी ने जिला अदालत में रिवीजन फाइल किया था, जिसमें रिवीजनकर्ता का कहना था कि कुरान की रचना किसी लेखक या व्यक्ति द्वारा नहीं की गई है। स्वयं कुरान में यह अंकित है कि यह आसमान से उतारी गई है व स्वयं खुदा ने कुरान को अता किया है। अमिताभ ने इसे रचा हुआ बताकर मुस्लिमों की भावना को ठेस पहुंचाई है। बृहस्पतिवार को इस मामले में बहस हुई थी। शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए उक्त वाद को खारिज कर दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता शिवकेश दुबे ने न्यायालय में बहस के दौरान तर्क रखते हुए कहा कि उक्त कार्यक्रम में अमिताभ का उद्देश्य किसी की भावनाओं को आघात पहुंचाना नहीं था। अगर ऐसा होता तो मुस्लिम समुदाय के किसी इंस्टीट्यूशन द्वारा अमिताभ के खिलाफ फतवा जारी किया जाता, परंतु ऐसा भी नहीं हुआ। निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए जिला अदालत ने रिवीजन खारिज कर दिया।
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