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बुंदेलखंड की पुरातत्व खोजों को पहचान दिलाने का प्रयास
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बुंदेलखंड की पुरातत्व खोजों को पहचान दिलाने का प्रयास
झांसी। बुंदेलखंड में पुरातत्व स्मारकों की खोज पुरातत्व विभाग ने की है। इसे देश-विदेश के सैलानियों व शोधकर्ताओं तक पहुंचाने के लिए विभाग
देश के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों और पर्यटन विभाग को महत्वपूर्ण खोजों के बारे में जानकारी देगा। प्रयास किया जा रहा है कि इन खोजों को देश विदेश के सैलानी, शोधकर्ता अपनी वेबसाइट और फोल्डरों में व्यापक जगह दें। इस संबंध में पुरातत्व विभाग सभी विश्वविद्यालय व पर्यटन विभाग को पत्र लिख रहा है।
बुंदेलखंड में हजारों वर्षों से मानव सभ्यताएं विकसित रही हैं। वैदिक ग्रंथों में भी बुंदेलखंड के क ई इलाकों का वर्णन है। इसके अलावा मौर्य, शुंग, नाग, मुगल सहित कई राज वंशों द्वारा विभिन्न निर्माण कराए गए हैं। इन तक आम जनता, सैलानी और शोधकर्ता सीधे पहुंचे। इसके लिए पिछले कई समय से पुरातत्व विभाग द्वारा प्रयास चल रहे हैं। इसी क्रम में एक बार फिर पुरातत्व सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों और पर्यटन विभाग को पत्र लिखेगा। इसमें वह अपनी महत्वपूर्ण खोजों के बारे में बताएगा, ताकि विश्वविद्यालयों व पर्यटन विभाग की संगोष्ठियों में उनकी चर्चा हो सके और जिज्ञासु पर्यटक सीधे इनसे जुड़ सके। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे के अनुसार इससे प्राचीन भारत के इतिहास संबंधी पुस्तकों में बुंदेलखंड को विशेष जगह मिलेगी। उनके अनुसार झांसी के आसपास का इलाका कभी देश का प्रमुख कॉरिडोर था, जो उत्तर से दक्षिण जाने का प्रमुख रास्ता था। घाट कोटरा में कभी एक विकसित बाजार था, जो बुद्ध काल में था।
बुंदेलखंड के झांसी में हुई प्रमुख पुरातत्व खोज
अड़जार बांध पर औरंगजेब द्वारा जारी शाही फरमान, जो मकराना के संगमरमर की पट्टी पर फारसी लिपि में है ।
एतिहासिक दुर्ग में चंदेल कालीन मंदिर का प्राप्त हुआ शिलालेख।
स्यावरी गांव में बंजारों का मंदिर।
बामौर के भरसूड़ा से दो हजार वर्ष पुरानी बौद्ध देवी हारीति की प्राप्त प्रतिमा।
ग्राम अटा में प्राप्त सौर परिवार की प्रतिमाएं।
ढिकोली में बेतवा नदी के किनारे प्राप्त सती पट्ट।
रमपुरा गांव में राम जानकी मंदिर, यहां बने चित्र विशेष हैं।
स्यावरी में ईसापूर्व द्वितीय सदी का प्राप्त शिलालेख।
सुखनई, लखेरी व बेतवा नदी से लगे गांवों कोटरा, नौपुल, कुकरगांव में लोहा प्राप्त करने की उद्योगशालाएं।
ग्राम डुमरई स्थित लखेरी नदी क ी तलहटी में चट्टान पर बने शिवलिंग।
बड़ागांव में 10 वीं सदी का ईंटों से निर्मित मंदिर के प्राप्त अवशेष।
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झांसी। बुंदेलखंड में पुरातत्व स्मारकों की खोज पुरातत्व विभाग ने की है। इसे देश-विदेश के सैलानियों व शोधकर्ताओं तक पहुंचाने के लिए विभाग
देश के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों और पर्यटन विभाग को महत्वपूर्ण खोजों के बारे में जानकारी देगा। प्रयास किया जा रहा है कि इन खोजों को देश विदेश के सैलानी, शोधकर्ता अपनी वेबसाइट और फोल्डरों में व्यापक जगह दें। इस संबंध में पुरातत्व विभाग सभी विश्वविद्यालय व पर्यटन विभाग को पत्र लिख रहा है।
बुंदेलखंड में हजारों वर्षों से मानव सभ्यताएं विकसित रही हैं। वैदिक ग्रंथों में भी बुंदेलखंड के क ई इलाकों का वर्णन है। इसके अलावा मौर्य, शुंग, नाग, मुगल सहित कई राज वंशों द्वारा विभिन्न निर्माण कराए गए हैं। इन तक आम जनता, सैलानी और शोधकर्ता सीधे पहुंचे। इसके लिए पिछले कई समय से पुरातत्व विभाग द्वारा प्रयास चल रहे हैं। इसी क्रम में एक बार फिर पुरातत्व सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों और पर्यटन विभाग को पत्र लिखेगा। इसमें वह अपनी महत्वपूर्ण खोजों के बारे में बताएगा, ताकि विश्वविद्यालयों व पर्यटन विभाग की संगोष्ठियों में उनकी चर्चा हो सके और जिज्ञासु पर्यटक सीधे इनसे जुड़ सके। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे के अनुसार इससे प्राचीन भारत के इतिहास संबंधी पुस्तकों में बुंदेलखंड को विशेष जगह मिलेगी। उनके अनुसार झांसी के आसपास का इलाका कभी देश का प्रमुख कॉरिडोर था, जो उत्तर से दक्षिण जाने का प्रमुख रास्ता था। घाट कोटरा में कभी एक विकसित बाजार था, जो बुद्ध काल में था।
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बुंदेलखंड के झांसी में हुई प्रमुख पुरातत्व खोज
अड़जार बांध पर औरंगजेब द्वारा जारी शाही फरमान, जो मकराना के संगमरमर की पट्टी पर फारसी लिपि में है ।
एतिहासिक दुर्ग में चंदेल कालीन मंदिर का प्राप्त हुआ शिलालेख।
स्यावरी गांव में बंजारों का मंदिर।
बामौर के भरसूड़ा से दो हजार वर्ष पुरानी बौद्ध देवी हारीति की प्राप्त प्रतिमा।
ग्राम अटा में प्राप्त सौर परिवार की प्रतिमाएं।
ढिकोली में बेतवा नदी के किनारे प्राप्त सती पट्ट।
रमपुरा गांव में राम जानकी मंदिर, यहां बने चित्र विशेष हैं।
स्यावरी में ईसापूर्व द्वितीय सदी का प्राप्त शिलालेख।
सुखनई, लखेरी व बेतवा नदी से लगे गांवों कोटरा, नौपुल, कुकरगांव में लोहा प्राप्त करने की उद्योगशालाएं।
ग्राम डुमरई स्थित लखेरी नदी क ी तलहटी में चट्टान पर बने शिवलिंग।
बड़ागांव में 10 वीं सदी का ईंटों से निर्मित मंदिर के प्राप्त अवशेष।