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सिविक एमेनिटीज: पानी की सफाई में भी खेल,,,-City

Mon, 09 Jul 2018 08:48 PM IST
Updated Mon, 09 Jul 2018 08:48 PM IST
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सिविक एमेनिटीज: पानी की सफाई में भी खेल,,,-City
पानी की सफाई में भी खेल
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- विजिलेंस की जांच में एक के बाद एक अनियमितताएं आती जा रही सामने
- जलसंस्थान में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। विजिलेंस द्वारा की जा रही जल संस्थान में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच में एक के बाद एक नए खेल सामने आते जा रहे हैं। पता लगा है कि पहूज से आने वाले कच्चे पानी की सफाई में जिसकी जगह कागजों में 700 से 900 मीट्रिक टन दिखाकर वित्तीय नुकसान पहुंचाया जा रहा था। इससे संबंधित अफसरों और ठेकेदारों पर विजिलेंस का शिकंजा कसता जा रहा है।
जलसंस्थान में एक अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2017 तक के भुगतानों में हुए वित्तीय अनियमितताओं की जांच सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) कर रहा है। जांच में पहूज बांध से दतिया गेट फिल्टर आने वाले पानी की सफाई भी वित्तीय अनियमितता का पता लगा है। पहूज बांध से दतिया गेट फिल्टर पर छह एमएलडी पानी आता है। दतिया गेट फिल्टर पर एलम और ब्लीचिंग से सफाई होने के बाद पानी की आपूर्ति संबंधित क्षेत्रों में की जाती हैं। छह एमएलडी पानी कितना ही गंदा हो? उसकी सफाई में सालाना 300 से 350 मीट्रिक टन के ब्लीचिंग और एलम की ही जरूरत पड़ेगी। मगर, दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि सालाना 700 से 900 मीट्रिक टन का एलम और ब्लीचिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। विजिलेंस ने इस मामले में भी जलसंस्थान से सवाल-जवाब शुरू कर दिए हैं।
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मालूम हो कि, विजिलेंस की इस जांच में तत्कालीन छह महाप्रबंधक, 12 अधिशासी अभियंता, दो वित्त प्रबंधक और ठेकेदारों का फंसना तय है। क्योंकि, जांच में उक्त सभी सहयोग नहीं कर रहे हैं।
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अभी तक इन तथ्यों का लग चुका पता
जलसंस्थान महाप्रबंधक ने विजिलेंस को आठ हजार पन्नों का जो रिकार्ड उपलब्ध कराया है, उस हिसाब से शासन ने उक्त अवधि में 508 करोड़ रुपये का बजट दिया। इसमें 126 करोड़ रुपये सामग्री आपूर्ति और 292 रुपये का मरम्मत काम किया गया। बाकी बजट वेतन, पेंशन और अन्य भुगतानों पर खर्च किया गया। विजिलेंस ने महाप्रबंधक के अधिकार क्षेत्र में आने वाले झांसी, ललितपुर और उरई कार्यालय से भी भुगतानों के दस्तावेज एकत्र किए, जिनके आधार पर छह सौ करोड़ रुपये के खर्चों का पता पहले ही लग चुका है। वहीं, 126 करोड़ रुपये की सामग्री 23 फर्मों द्वारा दी गई थी। इसमें अकेले पांच फर्मों से दो से तीन गुने दामों में सामग्री की सप्लाई ली गई।
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