फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   80 thousand patients of asthma in Jhansi and Lalitpur, disease spreading rapidly

झांसी और ललितपुर में अस्थमा के 80 हजार मरीज, तेजी से फैल रही बीमारी

Thu, 30 Sep 2021 12:39 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Sep 2021 12:39 AM IST
विज्ञापन
80 thousand patients of asthma in Jhansi and Lalitpur, disease spreading rapidly
झांसी। झांसी और ललितपुर जनपद में अस्थमा के 80 हजार मरीज हैं। वातावरण में लगातार बढ़ता प्रदूषण सांस के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ा रहा है। इसके अलावा अनुवांशिक मरीजों की संख्या भी खासी है। इस बीमारी को शुरुआत में नजरअंदाज करना लोगों को भारी पड़ रहा है।
विज्ञापन

वातावरण में लगातार बढ़ते प्रदूषण की वजह से अस्थमा के रोगियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इस बीमारी को दमा भी कहते हैं। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सांस की नली में सूजन आ जाती है और इसी के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। सर्दियों में इस बीमारी से पीड़ितों की संख्या खासी बढ़ जाती है। झांसी और ललितपुर में अस्थमा के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार क्रशरों से निकलने वाली धूल, थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाले राख के महीन कणों को माना जाता है। इसके अलावा गाड़ियों से निकलने वाला धुआं व खुले में हो रहे भवन निर्माण के कार्य भी अस्थमा के लिए मुफीद माहौल पैदा करते हैं। वहीं, ये बीमारी लोगों को अनुवांशिक भी मिलती है। ऐसी मरीजों की भी यहां खासी तादाद है।
विज्ञापन

पहचानें इन लक्षणों को
- बार-बार खांसी आना
- सांस लेते समय सीटी की आवाज आना
- बगैर थके हुए या थोड़ा सभी चलने पर सांस फूलना
- सीने में जकड़न और भारीपन
- सुबह और शाम के समय ज्यादा बढ़ जाती है परेशानी
ऐसे कर सकते हैं बचाव
- जंक फूड से दूरी बनाए रहें
- ठंडा पानी व ठंडी चीजों से भी करें परहेज
- सर्दियों में बेहतर हो कि गुनगुने पानी का करें प्रयोग
- धूल, धुएं और प्रदूषण से दूरी बनाए रखें
- लक्षण सामने आने पर शुरूआत में ही चिकित्सक से करें संपर्क
अस्थमा के पचास प्रतिशत मरीज अनुवांशिक होते हैं, जबकि बाकी में ये बीमारी वातावरण के दुष्प्रभाव से हो जाती है। शुरूआत में ही इलाज शुरू कर इस बीमारी पर आसानी से अंकुश पाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- डा. जकी सिद्दीकी, असिस्टेंट प्रोफेसर - महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज
क्षेत्र में सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनसरी डिजीज) के मरीज बहुतायत पाए जाते हैं। ये भी अस्थमा की एक शाखा है। शुरूआत में इसे नजरअंदाज करना रोग को गंभीर बना सकता है।
- डा. राजीव जैन, फिजिशियन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed