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हाउस टैक्स छुड़ा रहा पसीना
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हाउस टैक्स छुड़ा रहा पसीना
झांसी। नगर निगम ने 16 साल बाद हाउस टैक्स संशोधित किया है। पिछले साल तक जो मकान मालिक ढाई सौ रुपये टैक्स देते थे उनका एक हजार रुपये कर दिया गया है। घर-घर पहुंच रहे बिल लोगों के पसीने छुड़ा रहे हैं। लोग बिल संशोधन कराने के लिए अब भी नगर निगम पहुंच रहे हैं पर उनकी एक नहीं सुनी जा रही है।
वर्ष 2015-16 में नगर निगम ने हाउस टैक्स के लिए सर्वे कराया। नगर निगम का दावा है कि घर-घर जाकर सर्वे किया गया। इसके बाद आपत्तियां मांगी गईं। इसके बाद ही बिल जारी किए गए। इस बार क्षेत्रफल को आधार बनाकर टैक्स का निर्धारण किया गया। आरोप है कि इसमें मनमानी हुई। लोगों का कहना है कि आफिस में बैठकर टैक्स निर्धारित कर दिया गया।
सीपरी बाजार निवासी सुरेश ने बताया कि इस बार उन्हें जो रसीद प्राप्त हुई हैं वह पूर्व के बिल से चार से पांच गुना ज्यादा हैं। नगर निगम के कर्मी से हाउस टैक्स में हुए संशोधन के बारे में पूछा तो वह बिना कुछ कहे बिल देकर चले गए।
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अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बताया कि नगर निगम अधिनियम के तहत पूरे प्रदेश में हर पांच वर्ष में सर्वे होता है। नगर निगम झांसी में 2002 के बाद से कोई सर्वे नहीं हुआ था और न ही कोई हाउस टैक्स संशोधित हुआ था। 2015-16 में सोलह टीमों ने सर्वे किया। इसके बाद 2017-18 में हाउस टैक्स जारी किया गया। टैक्स को ऑनलाइन करने के पूर्व आपत्ति मांगी गई थीं और सबका निस्तारण करा दिया गया। उसके बाद ही फाइनल सूची जारी की गई। उन्होंने माना कि कई घर ऐसे भी रहे जहां भवन स्वामी बाहर नहीं आए। ऐसे मकानों का आकलन करने के बाद उन्हें सूची में शामिल कर लिया गया।
क्षेत्रफल के आधार पर किया निर्धारण
वर्ष 2013 से पूर्व किराये के आधार पर हाउस टैक्स वसूल किया जाता था। लेकिन, उसके बाद से क्षेत्रफल के आधार पर संशोधन हुआ है। संशोधन के बाद से हाउस टैक्स के बिल में भी इजाफा हुआ है। इसके आधार पर कई लोगों को फायदा हुआ। अपर नगर आयुक्त ने बताया कि कई घर ऐसे थे जिनका एक या दो कमरों का मकान है और उनसे एक हजार रुपये हाउस टैक्स वसूला जा रहा था। जब हाउस टैक्स संशोधित हुआ तो सर्वे के उपरांत उनका हाउस टैक्स कम भी किया गया।
न्यायालय की ले सकते हैं शरण
नगर आयुक्त के अनुसार पूर्व में आपत्तियां मांगी गईं थीं। तकरीबन चौदह हजार आपत्तियों को एक-एक कर दूर किया गया। अगर अब भी किसी को संदेह है तो वह न्यायालय की शरण ले सकता है तथा लोक अदालत में अपील कर मामले का निपटारा किया जा सकता है।
अगर हाउस टैक्स में गलत संशोधन जैसे क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी या पुराने मकान पर छूट न मिली हो तो ऐसे मामलों में जांच की जाएगी और शत प्रतिशत बिल की खामी को दूर किया जाएगा। इसके अलावा अन्य कोई संशोधन नहीं होगा। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर
एकाएक नगर निगम ने तीन गुना हाउस टैक्स थमा दिया है। जो समझ के परे है। संशोधित बिल लेकर नगर निगम के कई बार चक्कर काटे पर कोई सुनने का तैयार नहीं है। - शंकर सिंह, प्रेमगंज
नगर निगम में यदि पांच साल में हाउस टैक्स संशोधित होता था तो विभाग को नियमानुसार करना चाहिए। एकाएक संशोधन कर लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी गई हैं।
पवन उपाध्याय, सिद्धेश्वर नगर
नगर निगम ने हाउस टैक्स में एकाएक बढ़ोतरी में मनमाना रवैया अपनाया है। सर्वे के दौरान पूछने पर बताया था कि कुछ प्रतिशत ही बढ़ोतरी होगी। लेकिन, यहां तीन गुना बिल आया। - आलोक त्रिपाठी, चंद्रभान का हाता, सीपरी बाजार
इस साल का बिल जमा कर चुका हूं। दोबारा नगर निगम की तरफ से रसीद भेज दी गई। तीन दिन से अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं पर कोई भी समस्या सुनने को तैयार नहीं। - रज्जाक, बाहर ओरछा गेट
नगर निगम की ओर से डोर टू डोर हाउस टैक्स रसीद पाने के बाद रोजाना लोग बिल संशोधन के लिए चक्कर काट रहे हैं। क्षेत्र के लोगोें की समस्याओं को देखते हुए सदन की बैठक में मुद्दा उठाया जाएगा। - उमेश जोशी, पार्षद
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झांसी। नगर निगम ने 16 साल बाद हाउस टैक्स संशोधित किया है। पिछले साल तक जो मकान मालिक ढाई सौ रुपये टैक्स देते थे उनका एक हजार रुपये कर दिया गया है। घर-घर पहुंच रहे बिल लोगों के पसीने छुड़ा रहे हैं। लोग बिल संशोधन कराने के लिए अब भी नगर निगम पहुंच रहे हैं पर उनकी एक नहीं सुनी जा रही है।
वर्ष 2015-16 में नगर निगम ने हाउस टैक्स के लिए सर्वे कराया। नगर निगम का दावा है कि घर-घर जाकर सर्वे किया गया। इसके बाद आपत्तियां मांगी गईं। इसके बाद ही बिल जारी किए गए। इस बार क्षेत्रफल को आधार बनाकर टैक्स का निर्धारण किया गया। आरोप है कि इसमें मनमानी हुई। लोगों का कहना है कि आफिस में बैठकर टैक्स निर्धारित कर दिया गया।
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सीपरी बाजार निवासी सुरेश ने बताया कि इस बार उन्हें जो रसीद प्राप्त हुई हैं वह पूर्व के बिल से चार से पांच गुना ज्यादा हैं। नगर निगम के कर्मी से हाउस टैक्स में हुए संशोधन के बारे में पूछा तो वह बिना कुछ कहे बिल देकर चले गए।
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अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बताया कि नगर निगम अधिनियम के तहत पूरे प्रदेश में हर पांच वर्ष में सर्वे होता है। नगर निगम झांसी में 2002 के बाद से कोई सर्वे नहीं हुआ था और न ही कोई हाउस टैक्स संशोधित हुआ था। 2015-16 में सोलह टीमों ने सर्वे किया। इसके बाद 2017-18 में हाउस टैक्स जारी किया गया। टैक्स को ऑनलाइन करने के पूर्व आपत्ति मांगी गई थीं और सबका निस्तारण करा दिया गया। उसके बाद ही फाइनल सूची जारी की गई। उन्होंने माना कि कई घर ऐसे भी रहे जहां भवन स्वामी बाहर नहीं आए। ऐसे मकानों का आकलन करने के बाद उन्हें सूची में शामिल कर लिया गया।
क्षेत्रफल के आधार पर किया निर्धारण
वर्ष 2013 से पूर्व किराये के आधार पर हाउस टैक्स वसूल किया जाता था। लेकिन, उसके बाद से क्षेत्रफल के आधार पर संशोधन हुआ है। संशोधन के बाद से हाउस टैक्स के बिल में भी इजाफा हुआ है। इसके आधार पर कई लोगों को फायदा हुआ। अपर नगर आयुक्त ने बताया कि कई घर ऐसे थे जिनका एक या दो कमरों का मकान है और उनसे एक हजार रुपये हाउस टैक्स वसूला जा रहा था। जब हाउस टैक्स संशोधित हुआ तो सर्वे के उपरांत उनका हाउस टैक्स कम भी किया गया।
न्यायालय की ले सकते हैं शरण
नगर आयुक्त के अनुसार पूर्व में आपत्तियां मांगी गईं थीं। तकरीबन चौदह हजार आपत्तियों को एक-एक कर दूर किया गया। अगर अब भी किसी को संदेह है तो वह न्यायालय की शरण ले सकता है तथा लोक अदालत में अपील कर मामले का निपटारा किया जा सकता है।
अगर हाउस टैक्स में गलत संशोधन जैसे क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी या पुराने मकान पर छूट न मिली हो तो ऐसे मामलों में जांच की जाएगी और शत प्रतिशत बिल की खामी को दूर किया जाएगा। इसके अलावा अन्य कोई संशोधन नहीं होगा। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर
एकाएक नगर निगम ने तीन गुना हाउस टैक्स थमा दिया है। जो समझ के परे है। संशोधित बिल लेकर नगर निगम के कई बार चक्कर काटे पर कोई सुनने का तैयार नहीं है। - शंकर सिंह, प्रेमगंज
नगर निगम में यदि पांच साल में हाउस टैक्स संशोधित होता था तो विभाग को नियमानुसार करना चाहिए। एकाएक संशोधन कर लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी गई हैं।
पवन उपाध्याय, सिद्धेश्वर नगर
नगर निगम ने हाउस टैक्स में एकाएक बढ़ोतरी में मनमाना रवैया अपनाया है। सर्वे के दौरान पूछने पर बताया था कि कुछ प्रतिशत ही बढ़ोतरी होगी। लेकिन, यहां तीन गुना बिल आया। - आलोक त्रिपाठी, चंद्रभान का हाता, सीपरी बाजार
इस साल का बिल जमा कर चुका हूं। दोबारा नगर निगम की तरफ से रसीद भेज दी गई। तीन दिन से अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं पर कोई भी समस्या सुनने को तैयार नहीं। - रज्जाक, बाहर ओरछा गेट
नगर निगम की ओर से डोर टू डोर हाउस टैक्स रसीद पाने के बाद रोजाना लोग बिल संशोधन के लिए चक्कर काट रहे हैं। क्षेत्र के लोगोें की समस्याओं को देखते हुए सदन की बैठक में मुद्दा उठाया जाएगा। - उमेश जोशी, पार्षद