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Jhansi News: सरकारी खजाने के दम पर हनक पर सवार हैं 68 गनरधारी

Thu, 10 Jul 2025 01:08 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jul 2025 01:08 AM IST
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68 gunners are riding high on the strength of the government treasury

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। गनर लेकर चलने का शौक सरकारी खजाने पर भारी पड़ रहा है। हालांकि मुफ्त में किसी को गनर नहीं मिलता, लेकिन जनपद के 68 नेता, बिल्डर और कारोबारी ऐसे हैं, जिन्हें दस फीसदी की बेहद रियायती दरों पर गनर मिले हैं। ऐसे में उनके गनर पर होने वाला नब्बे फीसदी खर्च सरकार उठा रही है जबकि सौ फीसदी दर पर चुनिंदा लोगों ने ही गनर लिए हैं। कई वीआईपी ऐसे भी सामने आए, जिन्होंने गनर मांगे लेकिन सौ फीसदी शुल्क मांगे जाने पर गनर लेने से हाथ खड़े कर दिए।

किसी की जान पर खतरा होने की आशंका को देखकर पुलिस दो श्रेणियों में सुरक्षा मुहैया कराती है। पहली श्रेणी में निशुल्क सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें किसी आपराधिक मामले में वादी, गवाह पैरोकार समेत कोर्ट के निर्देश पर किसी को मुफ्त में सुरक्षा मिलती है। सांसद, विधायक समेत जनपद के आला अफसरों को भी इसी श्रेणी में गनर दिए गए हैं। वहीं, दूसरी श्रेणी में अपनी जान को खतरा बताकर सुरक्षा मांगने वालों को शामिल किया गया है। इनसे परिस्थिति के मुताबिक, दस प्रतिशत, 25 प्रतिशत, 50 प्रतिशत, 75 प्रतिशत एवं 100 प्रतिशत शुल्क लेकर गनर दिया जाता है।
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नियमों के मुताबिक पूर्व विधायक, पूर्व सांसद को 10 प्रतिशत भुगतान पर गनर दिया जा सकता है। सबसे अधिक होड़ इसी दस फीसदी छूट के साथ गनर लेने वालों की है। इनमें सबसे अधिक संख्या भाजपा नेताओं की है। इसके साथ कारोबारी, बिल्डर समेत 68 लोगों को इस तरह की सुरक्षा दी गई है जबकि सौ फीसदी शुल्क देकर चुनिंदा लोग ही सुरक्षा ले रहे हैं। आरआई सुभाष सिंह का कहना है कि कमेटी के फैसले के मुताबिक ही गनर सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।
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इनसेट

पुलिस कर्मी के वेतन से तय होता है शुल्क



गनर के तौर पर मुहैया कराए गए पुलिसकर्मी के वेतन के अनुसार भुगतान तय होता है। दरोगा, कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल के वेतन के मुताबिक ही गनर लेने वालों से भुगतान लिया जाता है। सौ फीसदी भुगतान करने वालों से गनर के वेतन का पूरा पैसा लिया जाता है। इसी तरह, 75 प्रतिशत भुगतान करने वाले से उसके वेतन का 75 फीसदी पैसा लिया जाता है, जबकि शेष 25 फीसदी की हिस्सेदारी सरकार करती है। 10 फीसदी खर्च देने वालों के लिए 90 फीसदी पैसा सरकार खर्च करती है।


इनसेट



शासन स्तर से तय होती है फाइल

गनर मुहैया कराने की अंतिम मंजूरी शासन स्तर से होती है। सरकारी गनर की मांग करने पर सबसे पहले उसकी एलआईयू रिपोर्ट तैयार करता है। इसके आधार पर जिलास्तरीय समिति अपनी संस्तुति करती है। यह प्रस्ताव मंडलीयस्तरीय समिति के माध्यम से शासन को भेजा जाता है। उसके बाद शुल्क की दर तय होती है।
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