{"_id":"61ae640ce72fd30ef57115ed","slug":"500-crores-spent-on-the-roads-of-jhansi-yet-neither-the-potholes-were-removed-nor-the-roads-improved-jhansi-news-jhs210377362","type":"story","status":"publish","title_hn":"झांसी की सड़कों पर 500 करोड़ खर्च... फिर भी न गड्ढे दूर हुए और न ही सड़कें सुधरीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झांसी की सड़कों पर 500 करोड़ खर्च... फिर भी न गड्ढे दूर हुए और न ही सड़कें सुधरीं
विज्ञापन
झांसी। नई सड़कों का जाल बिछाने, सड़कों को गड्ढामुक्त करने, मरम्मत करने और खड़ंजा बिछाने पर विधायक निधि और सांसद निधि के साथ ही जिले की 12 एजेंसियों ने 500 करोड़ खर्च कर दिए। एक बड़ी रकम खपा दी गई। लेकिन हकीकत क्या है सब जानते हैं। इस समय कोई भी मार्ग देख लीजिए हर जगह गड्ढे हैं। कई सड़कें तो चलने काबिल तक नहीं बचीं। अब कोई यह पूछने वाला नहीं है कि आखिर इतनी रकम खर्च करने के बाद भी सड़कों की सेहत सुधरी क्यों नहीं।
सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत में नगर निगम, जिला पंचायत, पीडब्ल्यूडी, आरईएस, उप्र आवास विकास परिषद, यूपीएससीआईडीसी, उप्र राज्य निर्माण निगम लिमिटेड, सिंचाई विभाग, उप्र जल निगम, मंडी परिषद समेत करीब डेढ़ दर्जन विभिन्न एजेंसियां अपने फंड से काम कराती हैं। सड़कों की दशा सुधारने में विधायक निधि- सांसद निधि का भी भरपूर इस्तेमाल होता है। बुंदेलखंड विकास निधि एवं प्रधानमंत्री आदर्शं ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) का पैसा भी खर्च होता है लेकिन, सड़क हैं कि दुरुस्त होने का नाम नहीं ले रहीं।
आंकड़ों के मुुताबिक पिछले पांच साल के दौरान सिर्फ सड़कों को बनाने एवं उनकी मरम्मत पर अलग-अलग 500 करोड़ रुपये की रकम खर्च हो चुकी। इस रकम से शहरी इलाकों के अलावा ग्रामीण इलाकों की सड़कें दुरुस्त हुईं लेकिन, न शहरी इलाकों की सड़कों की सेहत दुरुस्त हुई न ग्रामीण इलाकों की। नारायण बाग की ओर जाने वाला रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। यहां से हजारों लोग रोजाना गुजरते हैं लेकिन, इसकी मरम्मत कई वर्षों से नहीं हुई। इलाहाबाद बैंक तिराहे के पास की सड़क टूट चुकी है। इसका भी निर्माण नहीं हुआ हालांकि शहरी इलाके में मुख्य मार्ग दुरुस्त कर दिए गए लेकिन, यहां के भीतरी इलाकों की दशा बहुत खराब है।
विज्ञापन
मोहल्लों के भीतर की सड़कों पर ध्यान नहीं
शहर को चमकाने-दमकाने की खातिर नगर निगम और पीडब्ल्यूडी ने भले मुख्य सड़कों की दशा दुरुस्त कर दी हो लेकिन, शहर के भीतरी इलाकों की सड़कों का बेहद बुरा हाल है। शिवाजी नगर, नई बस्ती, लहरगिर्द, ओरछा गेट के बाहर, पिछोर, हीरापुरा, नैनागढ़, अलीगोल, आजादगंज, सागरगेट, छनियापुरा, प्रेमगंज आदि इलाकों के मोहल्लों के अंदर की गलियां की बुरी दशा है।
सड़क के नाम पर सबसे अधिक खर्च करने वाले महकमे
पीडब्ल्यूडी- 275 करोड़ (पीएमएजीवाई के साथ)
आरईएस- 20 करोड़
नगर निगम 30 करोड़
जिला पंचायत 82 करोड़
विधायक निधि, सांसद निधि एवं बुंदेलखंड पैकेज की मदद से- 30 करोड़
आवास विकास परिषद, सिंचाई विभाग, मंडी परिषद, राज्य निर्माण निगम- 63 करोड़
विज्ञापन
सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत में नगर निगम, जिला पंचायत, पीडब्ल्यूडी, आरईएस, उप्र आवास विकास परिषद, यूपीएससीआईडीसी, उप्र राज्य निर्माण निगम लिमिटेड, सिंचाई विभाग, उप्र जल निगम, मंडी परिषद समेत करीब डेढ़ दर्जन विभिन्न एजेंसियां अपने फंड से काम कराती हैं। सड़कों की दशा सुधारने में विधायक निधि- सांसद निधि का भी भरपूर इस्तेमाल होता है। बुंदेलखंड विकास निधि एवं प्रधानमंत्री आदर्शं ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) का पैसा भी खर्च होता है लेकिन, सड़क हैं कि दुरुस्त होने का नाम नहीं ले रहीं।
विज्ञापन
आंकड़ों के मुुताबिक पिछले पांच साल के दौरान सिर्फ सड़कों को बनाने एवं उनकी मरम्मत पर अलग-अलग 500 करोड़ रुपये की रकम खर्च हो चुकी। इस रकम से शहरी इलाकों के अलावा ग्रामीण इलाकों की सड़कें दुरुस्त हुईं लेकिन, न शहरी इलाकों की सड़कों की सेहत दुरुस्त हुई न ग्रामीण इलाकों की। नारायण बाग की ओर जाने वाला रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। यहां से हजारों लोग रोजाना गुजरते हैं लेकिन, इसकी मरम्मत कई वर्षों से नहीं हुई। इलाहाबाद बैंक तिराहे के पास की सड़क टूट चुकी है। इसका भी निर्माण नहीं हुआ हालांकि शहरी इलाके में मुख्य मार्ग दुरुस्त कर दिए गए लेकिन, यहां के भीतरी इलाकों की दशा बहुत खराब है।
विज्ञापन
मोहल्लों के भीतर की सड़कों पर ध्यान नहीं
शहर को चमकाने-दमकाने की खातिर नगर निगम और पीडब्ल्यूडी ने भले मुख्य सड़कों की दशा दुरुस्त कर दी हो लेकिन, शहर के भीतरी इलाकों की सड़कों का बेहद बुरा हाल है। शिवाजी नगर, नई बस्ती, लहरगिर्द, ओरछा गेट के बाहर, पिछोर, हीरापुरा, नैनागढ़, अलीगोल, आजादगंज, सागरगेट, छनियापुरा, प्रेमगंज आदि इलाकों के मोहल्लों के अंदर की गलियां की बुरी दशा है।
सड़क के नाम पर सबसे अधिक खर्च करने वाले महकमे
पीडब्ल्यूडी- 275 करोड़ (पीएमएजीवाई के साथ)
आरईएस- 20 करोड़
नगर निगम 30 करोड़
जिला पंचायत 82 करोड़
विधायक निधि, सांसद निधि एवं बुंदेलखंड पैकेज की मदद से- 30 करोड़
आवास विकास परिषद, सिंचाई विभाग, मंडी परिषद, राज्य निर्माण निगम- 63 करोड़