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पंचायत चुनाव : आरक्षण सूची जारी, बदल गया पचास फीसदी सीटों का गणित

Sun, 21 Mar 2021 01:58 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Mar 2021 01:58 AM IST
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50 percent reservation change
झांसी। नए आधार वर्ष 2015 के मुताबिक शनिवार को ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य एवं ब्लॉक प्रमुखों की सीटों का आरक्षण तय कर दिया गया। आधार वर्ष बदलने से ग्राम पंचायतों की करीब पचास फीसदी सीटों का चुनावी गणित बदल गया। आरक्षित सीटों की सूची ब्लॉक, तहसील, डीपीआरओ एवं जिलाधिकारी कार्यालय पर चस्पा कर दी गई है।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण तय करने में इस दफे सरकार को काफी किरकिरी उठानी पड़ी। पंचायती राज विभाग ने 11 फरवरी को शासनादेश जारी करते हुए चक्रानुक्रम के मुताबिक आरक्षण करने का निर्णय लिया और वर्ष 1995 के चुनाव को आधार वर्ष माना लेकिन, मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। आरक्षण सूची के अंतिम प्रकाशन से ठीक पहले 15 मार्च को हाईकोर्ट ने उस शासनादेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद सरकार को वर्ष 2015 को आधार मानते हुए नया शासनादेश जारी करना पड़ा और आरक्षण के लिए फिर से कवायद शुरू करनी पड़ी। उम्मीद जताई जा रही थी कि आधार वर्ष बदलने से जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख समेत ग्राम पंचायतों के जातिगत कोटे में भी बदलाव होगा। लेकिन, इस संख्या में कोई बदलाव नहीं किया। आरक्षण सूची के मुताबिक करीब पचहत्तर फीसदी स्थानों के आरक्षण बदल गए। नए शासनादेश के मुताबिक 23 मार्च तक आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। 25 मार्च तक सुनवाई के बाद इनका अंतिम प्रकाशन करा दिया जाएगा। इसके पहले शुक्रवार देर-रात तक सीडीओ शैलेष कुमार की अगुवाई में डीपीआरओ जगदीश राम समेत अन्य अफसर इनको अंतिम रुप देने में लगे रहे। जनपद में ग्राम प्रधान के 165 सीटें सामान्य, अनुसूचित जनजाति महिला के लिए एक, अनुसूचित जनजाति की एक, अनुसूचित जाति महिला की 43, अनुसूचित जाति 77, पिछड़ा वर्ग महिला 47, पिछड़ा वर्ग 86, महिला 76 के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं।
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23 तक कर सकते आपत्ति, चार सदस्यीय कमेटी करेगी सुनवाई
आरक्षित सीटों को लेकर 23 मार्च तक लिखित रूप में आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। यह आपत्ति डीपीआरओ कार्यालय, ब्लॉक, तहसील एवं जिलाधिकारी कार्यालय में दाखिल की जा सकेगी। इन आपत्तियों का निस्तारण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। समिति में सीडीओ, जिला पंचायत राज अधिकारी एवं अपर जिला पंचायत अधिकारी को शामिल किया गया है।
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आठ ब्लॉक प्रमुखोें की सीटों में नए आधार वर्ष के चलते चार के आरक्षण में बदलाव हुआ है। इनमें बबीना, बड़ागांव, मऊरानीपुर एवं गुरसराय का आरक्षण बदल गया। जबकि बंगरा, बामौर, मोंठ एवं चिरगांव की सीट में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
ब्लॉक प्रमुख सीटोें में आरक्षण की स्थिति
बबीना- पिछड़ा वर्ग
बड़ागांव- पिछड़ा वर्ग (महिला)
बंगरा- अनुसूचित जाति (महिला)
बामौर- अनुसूचित जाति
मोंठ- अनुसूचित जाति
मऊरानीपुर- सामान्य
चिरगांव- सामान्य
गुरसराय- महिला
जिला पंचायत सदस्यों के लिए आरक्षित सीटें
आधार वर्ष बदलने से 24 जिपं सदस्य सीटों में 10 सीटों का आरक्षण बदल गया। नए आरक्षण में जिन सीटों का आरक्षण बदला उनमें पूंछ, साकिन, सेमरी, रक्सा, बबीना रूरल, देवरीसिंह पुरा, भदरवारा, मारकुवां, भसनेह, कुरैठा की सीट शामिल हैं।
पूंछ- सामान्य
साकिन- महिला
भरोसा- महिला
सेमरी- पिछड़ा वर्ग (महिला)
पहाड़ी बुजुर्ग- पिछड़ा वर्ग (महिला)
बघेरा- अनुसूचित जाति
भोजला- अनुसूचित जाति
फूटेरा बरूआसागर- पिछड़ा वर्ग
रक्सा- पिछड़ा वर्ग
राजापुर- सामान्य
खैलार- सामान्य
बबीना ग्रामीण- पिछड़ा वर्ग
सकरार- अनुसूचित जाति
बंगराधवा- अनुसूचित जाति
देवरी सिंह पुरा- सामान्य
भदरवारा- सामान्य
स्यावरी- अनुसूचित जाति (महिला)
चुरारा- अनुसूचित जाति (महिला)
सिमरधा- महिला
मारकुवां- पिछड़ा
भसनेह- महिला
ककरवई- अनुसूचित जाति
कुरैठा- सामान्य
बिलाटीकरके- अनुसूचित जाति (महिला)
कुल पदोें की संख्या
ग्राम पंचायत- 496
ग्राम पंचायत सदस्य- 6170
क्षेत्र पंचायत सदस्य- 599
जिला पंचायत सदस्य- 24
नए शासनादेश के मुताबिक वर्ष 2015 के आधार वर्ष के मुताबिक आरक्षण तय किए गए हैं। सबसे पहले अनुसूचित जनजाति महिला, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति महिला, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग महिला, पिछड़ा वर्ग एवं महिला उक्त वर्गों की जनसंख्या के अवरोही क्रम के मुताबिक सीटें तय की गई हैं। आरक्षण सूची सभी स्थानों पर चस्पा कर दी गई है।- शैलेष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी

जिपं सदस्यों की दस सीटों में ही बदलाव
झांसी। आधार वर्ष बदल जाने की वजह से जिपं एवं ब्लॉक प्रमुख की सीटों में परिवर्तन होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन ब्लॉक प्रमुखों की चार एवं जिपं सदस्यों की 10 सीटों में ही बदलाव हुआ। 14 सीटों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। आधार वर्ष बदल जाने के बाद से उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ी हुई थीं, लेकिन जिन सीटों के आरक्षण में बदलाव नहीं हुआ उनको काफी राहत मिली है। इन सीटों के तमाम उम्मीदवारों ने पहले ही मोटी रकम चुनावी तैयारियों में खर्च कर दी थी। वहीं, आरक्षण सूची के अंतरिम प्रकाशन के बाद एक बार फिर प्रमुख सियासी दलों में गतिविधियां तेज हो गईं। संभावित उम्मीदवार फिर नए जोश के साथ चुनावी क्षेत्र में सक्रिय होना शुरू हो गए। प्रमुख सियासी दलों के कई क्षेत्रीय नेताओं की सीट भी नए आरक्षण की जद में आई है। नए आरक्षण से जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर निगाह जमाए रखने वाले कई उम्मीदवारों की उम्मीदें भी खत्म हुई हैं। वहीं, ग्राम प्रधान सीटों के नए आरक्षण ने भी ग्रामीण इलाकों के सियासी समीकरण को काफी प्रभावित किया है। अंतरिम सूची जारी होने के बाद ग्रामीण इलाकों में सियासी ताप भी बढ़ गया। हालांकि अभी आरक्षण पर आपत्तियां जताई जा सकती हैं, लेकिन इनमें बदलाव की गुंजाइश कम है।
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