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अंतिम संस्कार में काम आएंगे गोबर के लट्ठे-Cordination
Updated Tue, 28 Aug 2018 08:48 PM IST
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गोबर के लट्ठों से होगा अंतिम संस्कार
सब हेड: गाय पालन को मिलेगा प्रोत्साहन, जिले की दो गोशालाओं में होंगे तैयार
- लकड़ी का प्रयोग कम करने से प्रदूषण कम होगा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पर्यावरण प्रदूषण कम करने और गाय पालन को बढ़ावा देने के लिए अब गोबर के लट्ठों से अंतिम संस्कार किया जाएगा। इससे लकड़ी का उपयोग कम होगा तथा लट्ठे सस्ते भी पड़ेंगे। पहले चरण में मऊरानीपुर और दिगारा गोशालाओं में लट्ठे तैयार होंगे लेकिन धीरे-धीरे इस तकनीक को बढ़ावा देकर लट्ठों का उपयोग अधिक से अधिक किया जाएगा।
छुट्टा जानवर बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या हैं। यूं तो छुट्टा जानवरों पर रोक लगाने के लिए कोई कारगर योजना नहीं है, फिर भी राज्य गोसेवा आयोग प्रयास कर रहा है कि गायों के पालन को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए। गायों के पालन से व्यावसायिक लाभ भी मिले, इसलिए प्रयास किया जा रहा है कि गायों के गोबर से बने लट्ठे (यह उपले से बड़े होते हैं और मशीन से बनते हैं) का ज्यादा से ज्यादा उत्पादन किया जाए। चूंकि, लट्ठे मशीन से बनते हैं, इसलिए शासन ने राघव गो संरक्षण गोशाला कुरैचा नाका मऊरानीपुर और श्री कृष्ण गोशाला दिगारा को गोबर से लट्ठा बनाने की मशीन दी है।
इन दोनों गोशालाओं में साढ़े चार सौ गायें हैं। गोशालाओं में बनने वाले लट्ठे शवों के अंतिम संस्कार के काम आएंगे और लकड़ी की जगह इस्तेमाल होंगे, जिससे लड़की कम से कम जलेगी। इससे न केवल पर्यावरण साफ-सुथरा रहेगा, बल्कि लकड़ी की अवैध तरीके से कटान भी रुकेगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वाईएस तोमर ने बताया कि दो गोशालाओं को लट्ठे बनाने की मशीन दे दी गई है। अन्य लोग इससे प्रेरणा ले सकते हैं, ताकि गाय के गोबर का अधिक से अधिक सदुपयोग हो सके।
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सब हेड: गाय पालन को मिलेगा प्रोत्साहन, जिले की दो गोशालाओं में होंगे तैयार
- लकड़ी का प्रयोग कम करने से प्रदूषण कम होगा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पर्यावरण प्रदूषण कम करने और गाय पालन को बढ़ावा देने के लिए अब गोबर के लट्ठों से अंतिम संस्कार किया जाएगा। इससे लकड़ी का उपयोग कम होगा तथा लट्ठे सस्ते भी पड़ेंगे। पहले चरण में मऊरानीपुर और दिगारा गोशालाओं में लट्ठे तैयार होंगे लेकिन धीरे-धीरे इस तकनीक को बढ़ावा देकर लट्ठों का उपयोग अधिक से अधिक किया जाएगा।
छुट्टा जानवर बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या हैं। यूं तो छुट्टा जानवरों पर रोक लगाने के लिए कोई कारगर योजना नहीं है, फिर भी राज्य गोसेवा आयोग प्रयास कर रहा है कि गायों के पालन को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए। गायों के पालन से व्यावसायिक लाभ भी मिले, इसलिए प्रयास किया जा रहा है कि गायों के गोबर से बने लट्ठे (यह उपले से बड़े होते हैं और मशीन से बनते हैं) का ज्यादा से ज्यादा उत्पादन किया जाए। चूंकि, लट्ठे मशीन से बनते हैं, इसलिए शासन ने राघव गो संरक्षण गोशाला कुरैचा नाका मऊरानीपुर और श्री कृष्ण गोशाला दिगारा को गोबर से लट्ठा बनाने की मशीन दी है।
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इन दोनों गोशालाओं में साढ़े चार सौ गायें हैं। गोशालाओं में बनने वाले लट्ठे शवों के अंतिम संस्कार के काम आएंगे और लकड़ी की जगह इस्तेमाल होंगे, जिससे लड़की कम से कम जलेगी। इससे न केवल पर्यावरण साफ-सुथरा रहेगा, बल्कि लकड़ी की अवैध तरीके से कटान भी रुकेगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वाईएस तोमर ने बताया कि दो गोशालाओं को लट्ठे बनाने की मशीन दे दी गई है। अन्य लोग इससे प्रेरणा ले सकते हैं, ताकि गाय के गोबर का अधिक से अधिक सदुपयोग हो सके।
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