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वर्षों बाद बरसे झूमके बदरा-Cordination

Thu, 23 Aug 2018 07:36 PM IST
Updated Thu, 23 Aug 2018 07:36 PM IST
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वर्षों बाद बरसे झूमके बदरा-Cordination

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वर्षों बाद झूम के बरसे बदरा
सब हेड --- धान की फसल के लिए पानी का सूखा खत्म
- तिल और मूंगफली की पैदावार भी अच्छी होने के आसार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। चार साल से सूखा और कम वर्षा की विभीषिका से जूझ रहे बुंदेलखंड को अबकी बार हुई झमाझम बरसात ने खुश कर दिया है। धान की फसल की खातिर पानी के लिए जूझते किसानों को बृहस्पतिवार हुई बारिश संजीवनी साबित हुई। इतना ही नहीं, बरसात से खरीफ की अन्य फसलों जिसमें तिल, मूंगफली और उड़द की भी अच्छी पैदावार होने के आसार नजर आने लगे हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि मूंग व तिल के खेतों में यदि पानी भर गया हो तो नाली बनाकर उसे निकाल दें, ताकि खेत में पानी न भरे और ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हो सके।
बेहतर मानसून की संभावनाओं को देखते हुए अबकी बार जिले में 11,350 हेक्टेयर में धान की बुवाई की गई है, जबकि पिछले साल 10,419 हेक्टेयर में धान की पैदावार हुई थी। लेकिन, पिछले साल बहुत कम पानी बरसने के कारण किसानों को धान के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल सका था। नहरों से पानी छोड़ा भी गया था, पर पर्याप्त नहीं रहा था। लेकिन, अबकी बार मौसम विभाग ने अच्छी बरसात की संभावना जताई थी, इसलिए किसानों ने दिल खोलकर धान की फसल बोई है।
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पहले जुलाई में हुई अच्छी बरसात के दौरान धान की रोपाई हो गई थी, धान के लिए फिर से पानी की जरूरत थी तो मूसलाधार बरसात हो गई। इसी तरह मूंगफली की फसल भी अबकी बार पिछले साल की तुलना में 34 फीसदी अधिक क्षेत्रफल में बोई गई है। पिछले साल जहां 24,000 हेक्टेयर में बुवाई हुई थी, वहीं इस साल 32,200 हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई हुई है। पिछले साल जिले में खरीफ की फसल 2,30,804 हेक्टेयर में बोई गई थी, जबकि इस बार बुआई का रकबा बढ़ाया गया है और 2,31,000 हेक्टेयर में फसलें बोई गई हैं।
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आधी रात से हो रही झमाझम बरसात से खेत लबालब हो गए हैं। इससे धान के खेतों में भी पर्याप्त पानी भर गया है। मूंग, तिल और उड़द की फसलों में भी पर्याप्त पानी हो गया है। जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश कुमार सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि जिन किसानों के खेत पानी के भराव वाले क्षेत्र में हैं या जिनके खेतों में पानी भर गया है, यदि उन किसानों ने खेतों में मूंग, तिल या उड़द की फसल बोई है तो खेत से पानी निकालने का इंतजाम जरूर करें, ताकि फसलें सड़ें न। इससे फसलों का उत्पादन भी बेहतर होगा।
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