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तीसरी लहर की चुनौती से निपटने के लिए 3636 बेड, 227 वेंटिलेटर
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झांसी। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए झांसी में 3636 बेड और 227 वेंटिलेटर मौजूद हैं। इनमें 2112 आईसीयू बेड हैं। इसके अलावा हाई फ्लो नेजल ऑक्सीजन (एचएफएनओ) मशीन से लेकर ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर तक की व्यवस्था है। अधिकारियों का दावा है कि तीसरी लहर आती है तो स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई कमी नहीं रहेगी।
कोरोना की दूसरी लहर ने झांसी में खूब कहर बरपाया था। स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर नजर आ रही थी। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाएं, मशीनें लगातार बढ़ाई जाती रहीं। अब जिले के एक मात्र कोविड के एल-3 अस्पताल मेडिकल कॉलेज में ही 33 से बढ़कर 129 वेंटिलेटर हो गए हैं। इसके अलावा 74 एचएफएनओ, 600 ऑक्सीजन सिलेंडर, 330 कोविड बेड, 120 आईसीयू बेड हैं। यहां पर खुद का लिक्विड ऑक्सीजन गैस प्लांट है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही ऑक्सीजन की कमी नहीं हो पाई थी। हालांकि, बेड भरे होने से कई मरीज जरूर भर्ती नहीं हो पाए। जिले में रेलवे अस्पताल और 63 नर्सिंगहोम समेत 64 एल-2 अस्पताल हैं। एल-2 इकाइयों में 110 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, 1996 जंबो सिलेंडर, 25 एचएफएनओ, 77 वाईपैप मशीनें हैं। इसके अलावा 23 एल-1 अस्पताल हैं, जिनमें 1524 बेड, 57 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, 345 जंबो सिलेंडर समेत अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। कोरोना की दूसरी लहर से सबक लेते हुए सरकार की तरफ से नौ सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट भी स्थापित कराए जा चुके है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि अब ऑक्सीजन समेत किसी भी प्रकार के संसाधन दवाओं की कमी नहीं होगी।
एक माह की दवाओं का स्टॉक, डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त
कोरोना में बिगड़े हुए केस मेडिकल कॉलेज में ही आते हैं। ऐसे में यहां पर एक महीने की दवाओं का स्टॉक कर लिया गया है। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि अस्पताल में कोरोना के इलाज की सभी जरूरी दवाएं, इंजेक्शन उपलब्ध हैं। इसके अलावा तीसरी लहर की आशंका को मद्देनजर रखते हुए डॉक्टरों की छुट्टियां भी निरस्त कर दी गई हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर ने झांसी में खूब कहर बरपाया था। स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर नजर आ रही थी। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाएं, मशीनें लगातार बढ़ाई जाती रहीं। अब जिले के एक मात्र कोविड के एल-3 अस्पताल मेडिकल कॉलेज में ही 33 से बढ़कर 129 वेंटिलेटर हो गए हैं। इसके अलावा 74 एचएफएनओ, 600 ऑक्सीजन सिलेंडर, 330 कोविड बेड, 120 आईसीयू बेड हैं। यहां पर खुद का लिक्विड ऑक्सीजन गैस प्लांट है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही ऑक्सीजन की कमी नहीं हो पाई थी। हालांकि, बेड भरे होने से कई मरीज जरूर भर्ती नहीं हो पाए। जिले में रेलवे अस्पताल और 63 नर्सिंगहोम समेत 64 एल-2 अस्पताल हैं। एल-2 इकाइयों में 110 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, 1996 जंबो सिलेंडर, 25 एचएफएनओ, 77 वाईपैप मशीनें हैं। इसके अलावा 23 एल-1 अस्पताल हैं, जिनमें 1524 बेड, 57 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, 345 जंबो सिलेंडर समेत अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। कोरोना की दूसरी लहर से सबक लेते हुए सरकार की तरफ से नौ सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट भी स्थापित कराए जा चुके है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि अब ऑक्सीजन समेत किसी भी प्रकार के संसाधन दवाओं की कमी नहीं होगी।
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एक माह की दवाओं का स्टॉक, डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त
कोरोना में बिगड़े हुए केस मेडिकल कॉलेज में ही आते हैं। ऐसे में यहां पर एक महीने की दवाओं का स्टॉक कर लिया गया है। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि अस्पताल में कोरोना के इलाज की सभी जरूरी दवाएं, इंजेक्शन उपलब्ध हैं। इसके अलावा तीसरी लहर की आशंका को मद्देनजर रखते हुए डॉक्टरों की छुट्टियां भी निरस्त कर दी गई हैं।
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