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बिजली थाने में लंबित चल रहे 3338 मुकदमे, जिले भर में दौड़ रहा एक विवेचक

Fri, 22 Jan 2021 07:47 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jan 2021 07:47 PM IST
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3338 case pending in jhansi
झांसी। बिजली थाने में धड़ाधड़ दर्ज हो रहे मुकदमों का शीघ्र निस्तारण न होने के कारण लोग परेशान हो रहे हैं। सितंबर 2019 में खुले इस थाने में अभी तक चार हजार से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, लेकिन विवेचकों की कमी के कारण उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। अभी विवेचना के लिए 3338 मुकदमे लंबित चल रहे हैं। उपनिरीक्षक की कमी से थाना प्रभारी ही विवेचक की दोहरी भूमिका निभा रहे हैं।
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पहले किसी भी तरह की चोरी पकड़ने पर सिविल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाती थी। इसके बाद अगर संबंधित व्यक्ति को पुलिस कार्रवाई से बचना है तो वह विभाग में जाकर शमन शुल्क और राजस्व निर्धारण एक साथ जमा करें। इसके बाद विभाग राजस्व जमा होने का एक पत्र लिखकर देगा, जिसके आधार पर ही पुलिस कार्रवाई से बचा जा सकता था। खासकर सीधे चोरी में लगने वाली धारा 135 में लोग ज्यादा परेशान होते थे। ऐसे मामलों में पुलिस भी लोगों को परेशान करने से नहीं चूकती थी।
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इन्हीं सब समस्याओं को दूर करने के लिए विगत 19 सितंबर 2019 को सीपरी बाजार खालसा सबस्टेशन के बगल में खाली पड़े विभाग के भवन में विद्युत चोरी निरोधक पुलिस थाना दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का कार्यालय खोल दिया गया था। अभी तक बिजली अधिकारी और विजिलेंस द्वारा पूरे जनपद में की गई चेकिंग के बाद 4015 एफआईआर दर्ज कराईं जा चुकीं हैं। इसमें 2019 में 650, 2020 में 3011 व 2021 में अभी तक 354 मामले दर्ज हो चुके हैं। शुरुआत में थाने में तीन उपनिरीक्षक तैनात थे, जिससे विवेचनाओं का काम हल्का रहता था, लेकिन अभी एक ही उपनिरीक्षक रह गए हैं। वे ही थाना प्रभारी का चार्ज देख रहे हैं। इससे विवेचनाएं लंबित होती जा रहीं हैं।
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- पिछले पंद्रह महीने में 4015 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें 634 लोग शमन शुल्क जमा करा चुके हैं, जिनका मामला खत्म कर दिया गया है। 63 मामलों में न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। बाकी की विवेचना चल रही है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर विवेचनाओं में थाने में तैनात आठ आरक्षियों की भी मदद ली जा रही है।
रामकुमार, थाना प्रभारी।
634 मामलों में जमा कराए 3.32 करोड़
बिजली थाना पुलिस अभी तक दर्ज 4015 मामलों में 634 में फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी है। इन मामलों में 3 करोड़ 32 लाख 96 हजार रुपये 274 रुपये जमा कराए गए। इसमें 25147000 रुपये शमन शुल्क व 8149274 राजस्व जमा कराया गया।

ज्यादातर ऐसे आते हैं मामले
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- बिना कनेक्शन घर मेें कटिया डालकर बिजली चोरी
- बकाये पर कनेक्शन कटने के बाद फिर जोड़ लेना
- मीटर के पहले कट लगाकर।
- मीटर में कारस्तानी कर।
- चोरी की बिजली से सिंचाई की मोटर चलाना।
- घरेलू बिजली कनेक्शन व्यावसायिक इस्तेमाल।
ये है कानून
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- बिजली चोरी करते पाए जाने पर अगर अब तय शमन शुल्क जमा नहीं करते हैं तो तीन माह से सात साल तक ही सजा हो सकती है।
- धारा 135 विद्युत अधिनियम: कटिया डालकर, घरेलू बिजली का व्यावसायिक इस्तेमाल।
- धारा 136 विद्युत अधिनियम: बिजली के सरकारी उपकरणों को नुकसान पहुंचाना।
- धारा 137 विद्युत अधिनियम: विद्युत चोरी का सामान बरामद होने पर।
- धारा 138 विद्युत अधिनियत: मीटर से छेड़छाड़, काटे गए कनेक्शन को फिर जोड़ना।
- धारा 139 विद्युत अधिनियम: बिजली की बर्बादी करने जैसे मामलों में।
- धारा 140 विद्युत अधिनियम: बिजली के तार और अन्य उपकरण चोरी के मामले।
दो- दो करोड़ रुपये बढ़ाया लक्ष्य
अभी शहर के तीनों वितरण खंडों का 12- 12 करोड़ लक्ष्य है। मगर, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने इस लक्ष्य को दो- दो करोड़ रुपये और बढ़ा दिया है। साथ ही, विजिलेंस को एक महीने में 200 किलोवाट तक चोरी पकड़ने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए अधिकारियों से अधिक से अधिक चेकिंग करने, बकायेदारों से बकाया वसूलने, कटे कनेक्शन के उपभोक्ताओं से वसूली करने पर जोर देने को कहा है। इसलिए चेकिंग अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा चोरियां पकड़ने का प्रयास चल रहा है।
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