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जीएसटी: औपचारिक बनी हेल्प डेस्क-City
Updated Fri, 14 Jul 2017 09:51 PM IST
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जीएसटी हेल्प डेस्क के नाम पर खानापूरी, अफसर नहीं मिलते
निराश होकर लौट रहे व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जीएसटी से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए वाणिज्य कर कार्यालय में बनाई गई हेल्प डेस्क के नाम पर खानापूरी हो रही है। अधिकारी नियमित नहीं बैठते और ऐसे में कारोबारियों को निराश होकर लौटना पड़ता है। समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
शुक्रवार की दोपहर एक बजे प्रेमनगर निवासी सुभाष गुप्ता वाणिज्य कर कार्यालय में खोली गई हेल्प डेस्क पर अपनी समस्या लेकर पहुंचे। उनको सलाह लेनी थी कि वे मोबाइल की छोटी सी दुकान खोले है। उसमें वे रिचार्ज कार्ड भी बेचते हैं, मगर कंपनी अब उनको बिना जीएसटी के कार्ड देने से मना कर रही है। जबकि उनका वार्षिक टर्नओवर तो तीन लाख रुपये भी नहीं है। ऐसी स्थिति में उनको क्या करना चाहिए? विभाग ने सुबह दस बजे दो बजे तक दो महिला अधिकारियों की ड्यूटी लगाई थी, लेकिन उस समय दोनों ही हेल्प डेस्क पर मौजूद नहीं थी। इस कारण सुभाष गुप्ता को मायूस होकर लौटना पड़ा।
दरअसल, व्यापारियों की मदद के लिए बनाई गई हेल्प डेस्क औपचारिक बनकर रह गई है। अधिकांश समय हेल्प सीट से अधिकारी नदारत रहते हैं, इससे समस्या लेकर आ रहे व्यापारियों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। हाल यह है कि हेल्प डेस्क रजिस्टर में दस जुलाई के बाद किसी की शिकायत दर्ज नहीं की गई। रजिस्टर के विवरण में अधिकारी यह भी स्पष्ट नहीं कर रहे कि उन्होेंने व्यापारी की समस्या पर क्या सुझाव दिया? वाणिज्य कर अधिवक्ता भी इस व्यवस्था से नाराज चल रहे हैं। हेल्प डेस्क प्रभारी अभिषेक गुप्ता ने बताया कि सुबह दस बजे से रात आठ बजे तक दो शिफ्टों में अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। पिछले तीन दिन से कैडर को लेकर चल रही कार्य बहिष्कार के कारण महिला अधिकारियों को मालूम नहीं था कि उनको आज हेल्प डेस्क पर बैठना है।
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निराश होकर लौट रहे व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जीएसटी से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए वाणिज्य कर कार्यालय में बनाई गई हेल्प डेस्क के नाम पर खानापूरी हो रही है। अधिकारी नियमित नहीं बैठते और ऐसे में कारोबारियों को निराश होकर लौटना पड़ता है। समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
शुक्रवार की दोपहर एक बजे प्रेमनगर निवासी सुभाष गुप्ता वाणिज्य कर कार्यालय में खोली गई हेल्प डेस्क पर अपनी समस्या लेकर पहुंचे। उनको सलाह लेनी थी कि वे मोबाइल की छोटी सी दुकान खोले है। उसमें वे रिचार्ज कार्ड भी बेचते हैं, मगर कंपनी अब उनको बिना जीएसटी के कार्ड देने से मना कर रही है। जबकि उनका वार्षिक टर्नओवर तो तीन लाख रुपये भी नहीं है। ऐसी स्थिति में उनको क्या करना चाहिए? विभाग ने सुबह दस बजे दो बजे तक दो महिला अधिकारियों की ड्यूटी लगाई थी, लेकिन उस समय दोनों ही हेल्प डेस्क पर मौजूद नहीं थी। इस कारण सुभाष गुप्ता को मायूस होकर लौटना पड़ा।
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दरअसल, व्यापारियों की मदद के लिए बनाई गई हेल्प डेस्क औपचारिक बनकर रह गई है। अधिकांश समय हेल्प सीट से अधिकारी नदारत रहते हैं, इससे समस्या लेकर आ रहे व्यापारियों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। हाल यह है कि हेल्प डेस्क रजिस्टर में दस जुलाई के बाद किसी की शिकायत दर्ज नहीं की गई। रजिस्टर के विवरण में अधिकारी यह भी स्पष्ट नहीं कर रहे कि उन्होेंने व्यापारी की समस्या पर क्या सुझाव दिया? वाणिज्य कर अधिवक्ता भी इस व्यवस्था से नाराज चल रहे हैं। हेल्प डेस्क प्रभारी अभिषेक गुप्ता ने बताया कि सुबह दस बजे से रात आठ बजे तक दो शिफ्टों में अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। पिछले तीन दिन से कैडर को लेकर चल रही कार्य बहिष्कार के कारण महिला अधिकारियों को मालूम नहीं था कि उनको आज हेल्प डेस्क पर बैठना है।
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