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राष्ट्रीय फेरी नीति--Dehat
Updated Sun, 02 Jul 2017 08:43 PM IST
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कमेटी करेगी फेरी वालों के लिए जमीन तय
सब हेड -- राष्ट्रीय फेरी नीति अब जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन समिति
- 25 तक मांगे गए हैं आवेदन, 20 से 40 तक सदस्य होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
राष्ट्रीय फेरी नीति के दूसरे चरण का काम शुरू हो गया है। अब फेरी वालों के बैठने के लिए जमीन चिह्नित की जाएगी। चिह्नीकरण का काम 20 से 40 सदस्यों की कमेटी करेगी। कमेटी का सदस्य बनने के लिए 25 जुलाई तक आवेदन मांगे गए हैं। राष्ट्रीय फेरी नीति के नाम में शासन ने फेरबदल कर दिया है। अब इसको जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन समिति के नाम से जाना जाएगा। पहले चरण में फेरी वालों का चिह्नीकरण हो जाने के बाद अब उनके बैठने के लिए जमीन चिह्नित जाएगी।
शासन की मंशा है कि सब्जी, फल, अंडा, चाट- पकौड़ा और छोले- भटूरे बेचने वाले सड़क किनारे खड़े न हों, बल्कि उन्हें स्थान दिया जाए। ताकि, अतिक्रमण हटाने के नाम पर बार- बार उन्हें न हटाया जाए। इससे उनका कारोबार भी प्रभावित नहीं होगा। इसके लिए राष्ट्रीय फेरी नीति के अंतर्गत शहर के सभी हाथ ठेला और खोमचा लगाने वालों का सर्वे किया गया था। इसमें शहर में 7,638 वेंडरों (फेरी वालों) को चिह्नित किया गया था। इसके अलावा शहर को चार जोन में बांटा गया था, ताकि शहर वेंडरों से अतिक्रमणमुक्त रहे। कोई योजना बन पाती इसकेे पहले फेरी नीति के नाम में शासन ने बदलाव कर दिया व स्वयंसेवी संगठनों और अधिकारियों की टीम गठित करने के निर्देश दिए, ताकि वेंडरों के बैठने के लिए ऐसा प्लान तैयार किया जा सके, जिससे उन्हें भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो।
इन विभागों के अधिकारी होंगे शामिल
जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन समिति में जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त, फायर ब्रिगेड अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, झांसी विकास प्राधिकरण, यातायात पुलिस, बिजली और जल संस्थान जैसे विभागों के अफसर शामिल होंगे।
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यह होंगे समिति के सदस्य
पथ विक्रेताओं में से कोई सदस्य, पथ विक्रेता यूनियन का सदस्य, पथ विक्रेता महिला सदस्य, स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को शामिल कर नगर पथ विक्रय समिति गठित की जाएगी।
दो वर्ग फिट जमीन मिलेगी
फेरी वालों को बैठने के लिए दो फिट लंबी और दो फिट चौड़ी जमीन दी जाएगी। यह जमीन केवल उन्हीं फेरी वालों मिलेगी, जिनके रजिस्ट्रेशन होंगे।
25 तक कर सकते हैं आवेदन
जो भी व्यक्ति समिति का सदस्य बनना चाहता है, वह अपना आवेदन पत्र नगर निगम कार्यालय में संपत्ति अधिकारी के पास 25 जुलाई तक जमा कर सकता है। आवेदन पत्र के साथ चरित्र प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य है।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त
ये होंगे फायदे
- शहर में गंदगी कम हो जाएगी
- ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु चलेगी
- अवैध वसूली ठेकेदारी बंद होगी
- फुटपाथों पर अवैध कब्जे नहीं होंगे
ये है प्लान
वेंडिंग जोन
- इसके अंतर्गत शहर की 08 मीटर चौड़ी सड़कों को शामिल किया गया है। इन्हीं सड़कों पर हाथ ठेला वालों को जगह आवंटित की जाएगी।
नो वेंडिंग जोन
- इसके अंतर्गत इलाइट से कोछाभांवर, इलाइट से ललितपुर रोड, इलाइट से पहूंज पुल, इलाइट से करारी तक सड़क किनारे पर कोई भी हाथ ठेला लगाकर व्यापार करना प्रतिबंधित रहेगा।
मोबाइल जोन
- इस जोन में उन क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जहां हाथ ठेला वाले चलते- फिरते अपना कारोबार कर सकेंगे। लेकिन, शर्त यह रहेगी कि एक स्थान पर स्थाई रूप से खड़े नहीं हो सकेंगे।
प्रतिबंधित जोन
- इसमें शहर के वह क्षेत्र शामिल रहेंगे, जहां पर फुटपाथ, सड़क अथवा सड़क के किनारे किसी तरह के अस्थाई दुकानदार कारोबार नहीं कर सकेंगे।
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सब हेड -- राष्ट्रीय फेरी नीति अब जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन समिति
- 25 तक मांगे गए हैं आवेदन, 20 से 40 तक सदस्य होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
राष्ट्रीय फेरी नीति के दूसरे चरण का काम शुरू हो गया है। अब फेरी वालों के बैठने के लिए जमीन चिह्नित की जाएगी। चिह्नीकरण का काम 20 से 40 सदस्यों की कमेटी करेगी। कमेटी का सदस्य बनने के लिए 25 जुलाई तक आवेदन मांगे गए हैं। राष्ट्रीय फेरी नीति के नाम में शासन ने फेरबदल कर दिया है। अब इसको जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन समिति के नाम से जाना जाएगा। पहले चरण में फेरी वालों का चिह्नीकरण हो जाने के बाद अब उनके बैठने के लिए जमीन चिह्नित जाएगी।
शासन की मंशा है कि सब्जी, फल, अंडा, चाट- पकौड़ा और छोले- भटूरे बेचने वाले सड़क किनारे खड़े न हों, बल्कि उन्हें स्थान दिया जाए। ताकि, अतिक्रमण हटाने के नाम पर बार- बार उन्हें न हटाया जाए। इससे उनका कारोबार भी प्रभावित नहीं होगा। इसके लिए राष्ट्रीय फेरी नीति के अंतर्गत शहर के सभी हाथ ठेला और खोमचा लगाने वालों का सर्वे किया गया था। इसमें शहर में 7,638 वेंडरों (फेरी वालों) को चिह्नित किया गया था। इसके अलावा शहर को चार जोन में बांटा गया था, ताकि शहर वेंडरों से अतिक्रमणमुक्त रहे। कोई योजना बन पाती इसकेे पहले फेरी नीति के नाम में शासन ने बदलाव कर दिया व स्वयंसेवी संगठनों और अधिकारियों की टीम गठित करने के निर्देश दिए, ताकि वेंडरों के बैठने के लिए ऐसा प्लान तैयार किया जा सके, जिससे उन्हें भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो।
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इन विभागों के अधिकारी होंगे शामिल
जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन समिति में जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त, फायर ब्रिगेड अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, झांसी विकास प्राधिकरण, यातायात पुलिस, बिजली और जल संस्थान जैसे विभागों के अफसर शामिल होंगे।
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यह होंगे समिति के सदस्य
पथ विक्रेताओं में से कोई सदस्य, पथ विक्रेता यूनियन का सदस्य, पथ विक्रेता महिला सदस्य, स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को शामिल कर नगर पथ विक्रय समिति गठित की जाएगी।
दो वर्ग फिट जमीन मिलेगी
फेरी वालों को बैठने के लिए दो फिट लंबी और दो फिट चौड़ी जमीन दी जाएगी। यह जमीन केवल उन्हीं फेरी वालों मिलेगी, जिनके रजिस्ट्रेशन होंगे।
25 तक कर सकते हैं आवेदन
जो भी व्यक्ति समिति का सदस्य बनना चाहता है, वह अपना आवेदन पत्र नगर निगम कार्यालय में संपत्ति अधिकारी के पास 25 जुलाई तक जमा कर सकता है। आवेदन पत्र के साथ चरित्र प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य है।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त
ये होंगे फायदे
- शहर में गंदगी कम हो जाएगी
- ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु चलेगी
- अवैध वसूली ठेकेदारी बंद होगी
- फुटपाथों पर अवैध कब्जे नहीं होंगे
ये है प्लान
वेंडिंग जोन
- इसके अंतर्गत शहर की 08 मीटर चौड़ी सड़कों को शामिल किया गया है। इन्हीं सड़कों पर हाथ ठेला वालों को जगह आवंटित की जाएगी।
नो वेंडिंग जोन
- इसके अंतर्गत इलाइट से कोछाभांवर, इलाइट से ललितपुर रोड, इलाइट से पहूंज पुल, इलाइट से करारी तक सड़क किनारे पर कोई भी हाथ ठेला लगाकर व्यापार करना प्रतिबंधित रहेगा।
मोबाइल जोन
- इस जोन में उन क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जहां हाथ ठेला वाले चलते- फिरते अपना कारोबार कर सकेंगे। लेकिन, शर्त यह रहेगी कि एक स्थान पर स्थाई रूप से खड़े नहीं हो सकेंगे।
प्रतिबंधित जोन
- इसमें शहर के वह क्षेत्र शामिल रहेंगे, जहां पर फुटपाथ, सड़क अथवा सड़क के किनारे किसी तरह के अस्थाई दुकानदार कारोबार नहीं कर सकेंगे।