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26 थानों में खोली गईं महिला हेल्प डेस्क, कहीं भी नहीं मिलता न्याय

Fri, 28 May 2021 01:24 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 28 May 2021 01:24 AM IST
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26 thano me kholi gaye mahila help desk, khi nhi mili sunbayi
26 थानों में खोली गई महिला हेल्प डेस्क, कहीं भी नहीं मिलता न्याय
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झांसी। महिलाओं के भीतर सुरक्षा का भरोसा जगाने को लंबे चौड़े वायदों के संग मिशन शक्ति की शुरूआत हुई थी। इसके जरिए हर थाने में अलग महिला डेस्क शुरू की गई जिससे महिलाओं से जुड़े मामले जल्दी निपट जाएं और उनको न्याय मिले लेकिन, यह सभी दावे छह महीने बाद भी हकीकत में नहीं उतर सके। थानों में बनी हेल्प डेस्क अब कागजों में सिमट चुकी है। अगर यह हेल्प डेस्क वास्तव में काम करती तो आज गुरसराय में शोहदे की वजह से जान गंवाने वाली किशोरी जीवित होती।
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना मिशन शक्ति अक्तूबर माह में लांच हुई। शुरूआत कोतवाली में विशेष महिला डेस्क की स्थापना के साथ हुई। इसके बाद जनपद के सभी 26 थानों में यह डेस्क तैयार हुई। शहर के नवाबाद, कोतवाली, प्रेमनगर, सीपरी बाजार एवं सदर बाजार में भी डेस्क ने काम करना शुरू किया लेकिन, महज कुछ दिनों के भीतर डेस्क का वजूद खत्म कर दिया गया। यह अब कागजों में सिमट चुकी है। महिलाओं की शिकायतों को निपटाने में महिला डेस्क कहीं नहीं दिखती। यही हाल महिला थाने का है। यहां सालभर में कुल 210 मामले दर्ज हुए लेकिन, यहां दर्ज मामलों को भी कछुआ की रफ्तार से ही निपटाया जाता है। लिहाजा बदमाशों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। पुलिस के इसी अंदाज का फायदा उठाकर गांधीनगर निवासी युवक किशोरी को लगातार परेशान करता रहा। किशोरी ने कई दफे पुलिस से गुहार लगाई लेकिन, कागजी महिला डेस्क उसकी कोई मदद न कर सके। आखिरकार किशोरी को मजबूर होकर अपनी जान दे देनी पड़ी।
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तीन दिन से गुमसुम थी किशोरी
झांसी। गुरसराय में छेड़छाड़ से परेशान होकर आत्महत्या करने वाली किशोरी तीन दिन से गुमसुम थी। परिजनों के मुताबिक उसने तीन दिन से खाना भी नहीं खाया। परिजनों ने कई बार किशोरी से सब कुछ भूलने की बात कही। उसे समझाया भी, लेकिन युवक की हरकतों ने उसे मजबूर कर दिया। किशोरी के आत्मघाती कदम उठाने के बाद परिजनों में कोहराम है। काश पुलिस अपना काम ठीक से करती, तो आज एक बिटिया यूं अपनी जिंदगी से जंग न हारती।
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इनसेट
एंटी रोमियो स्क्वायड भी लापता
शोहदों को सबक सीखने के इरादे से सरकार ने जोर-शोर के साथ एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन कराया था लेकिन, यह स्क्वायड भी अब लापता है। कुछ पुलिसकर्मियों की ड्यूटी बताई जा रही लेकिन, वह भी कागजों में बताई जा रही। मौके पर अब कोई स्क्वायड नहीं दिखता। पिछले करीब ढा़ई वर्ष से एंटी रोमियो स्क्वायड की ओर से कोई उल्लेखनीय कार्रवाई दर्ज नहीं हुई।

इनसेट
पुलिस अफसर तक नहीं उठाते सीयूजी फोन
झांसी में पुलिसिंग का बुरा हाल है। पीड़ित पुलिस से मदद की गुहार लगा सकें, इसके लिए थाने से लेकर प्रत्येक पुलिस अफसर को सरकारी सीयूजी फोन दिए गए। थानेदार एवं अफसरों के नंबर भी सार्वजनिक हैं लेकिन, अफसरों के लिए सीयूजी फोन पर आने वाली कॉल्स की कोई कीमत नहीं। पीड़ित कई बार न्याय की गुहार लगाने के लिए फोन करते रह जाते हैं लेकिन, अफसर फोन को साइलेंट मोड में डाल देते हैं। इस वजह से गोपनीय सूचनाएं भी पुलिस तक नहीं पहुंचतीं। पीड़ितों का कहना है थानेदार के सुनवाई न करने की उन्होंने कई बार सीधे एसएसपी से फोन पर शिकायत करनी चाही लेकिन, उनका भी सीयूजी नंबर सिर्फ पीआरओ उठाते हैं। ऐसे में उनकी शिकायत आज तक नहीं सुलझ सकी। वहीं, आला अफसर के इस रवैये को देखकर तमाम थानेदारों ने भी सीयूजी फोन उठाना बंद कर दिया है।
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