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Jhansi News: चार माह में जांचीं 25 हजार फर्में, 17 निकलीं फर्जी

Tue, 04 Nov 2025 02:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Nov 2025 02:00 AM IST
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25,000 firms investigated in four months, 17 found to be fake
- लखनऊ-मुरादाबाद के साथ झांसी में भी फर्जी फर्माें का नेटवर्क, 25 करोड़ की लगाई चपत
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- राज्य कर विभाग के रैकी अभियान में सामने आई गड़बडृ़ी, कार्रवाई के साथ किया गया पंजीयन निरस्त

संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। लखनऊ और मुरादाबाद की तरह झांसी में भी पंजीकृत फर्मों ने टैक्स चोरी कर सरकार को करोड़ों की चपत लगाई है। चार माह में केंद्र व राज्य कर के अधीन पंजीकृत 71 हजार से अधिक फर्मों में से 25 हजार से अधिक की जांच की जा चुकी है। इनमें 17 फर्जी फर्में पकड़ी गई हैं। इन फर्मों ने करीब 25 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान पहुंचाया है। विभाग ने इन पर कार्रवाई करते हुए पंजीयन निरस्त कर दिया है।

झांसी परिक्षेत्र में कुल 71,861 व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत हैं। इनमें 41,330 व्यापारी राज्य जीएसटी और 30,511 व्यापारी केंद्र जीएसटी के दायरे में आते हैं। राज्य कर आयुक्त के निर्देश पर सभी फर्मों की जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
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एडिशनल कमिश्नर (ग्रेड-1) डीके सचान के नेतृत्व में गठित टीमें निरीक्षण व सत्यापन कर रही हैं। जुलाई से अक्तूबर के बीच हुए अभियान में 25,761 फर्मों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 18,589 सेंट्रल और 7,172 स्टेट जीएसटी फर्में शामिल हैं।
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जांच में सामने आया कि पकड़ी गई 17 फर्में केवल कागजों पर कारोबार कर रही थीं। इनमें से कई ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन कराया था। विभाग ने इन पर कड़ी कार्रवाई करते हुए पंजीयन निरस्त कर दिया है।


एआई तकनीक से हो रही जांच

- बोगस फर्माें की जांच के लिए राज्य कर विभाग ने अत्याधुनिक डेटा आधारित प्रक्रिया अपनाई है। डेटा का गहन विश्लेषण के बाद संदिग्ध फर्माें को ट्रेस किया जा रहा है। मौके पर जाकर सत्यापन किया जाता। कागजों में गड़बड़ी मिलने के बाद मौके पर पहुंचकर देखा जाता है तो फर्म धरातल पर मिलती ही नहीं। इससे फर्म के फर्जीवाड़े का खुलासा हो जा रहा है।



इन बिंदुओं की हो रही जांच

- बगैर खरीदे माल बिक्री करने वाली फर्म।

- खरीद और बिक्री के बीच बड़ा अंतर और बेमेल लेनदेन की पहचान।

- फर्म के पंजीकृत व्यापार स्थान का भौतिक सत्यापन

- दिखाए गए स्टॉक के सापेक्ष मौके पर माल का प्राप्त न होना।



झांसी में पंजीकृत फर्में जो फर्जी तरीके से पंजीयन लेकर अपना गड़बड़झाला किए हुए हैं, उनका नेटवर्क यूपी के अलावा अन्य छह अन्य राज्यों में भी फैला हुआ है। विभागीय अफसरों के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, तमिलनाडु व महाराष्ट्र तक फैला हुआ है। विभाग ने इन फर्माें की भी कुंडली खंगालना शुरू कर दिया है। पकड़े जाने पर इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

पकड़ी गई फर्मों के कारनामे

विजय ट्रेडर्स (पंजीकरण: मई 2025) — रेडीमेड वस्त्र कारोबार के नाम पर पंजीकृत फर्म के दस्तावेज कूटरचित पाए गए। आधार व पैन प्रयागराज के, जबकि संचालन का पता उल्दन का दर्शाया गया था।

डीके इंटरप्राइजेज — जून 2025 में 5.51 करोड़ रुपये की खरीद दिखाई, लेकिन बिक्री दर्ज नहीं की। जेल चौराहा स्थित पते पर जांच में कोई फर्म संचालित नहीं मिली और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बंद पाए गए।

आरके इंटरप्राइजेज (पंजीकरण: जून 2025) — स्वामिनी राखी वर्मा, निवासी हरियाणा। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराया गया। दिए गए बिजली बिल की जांच में पता किसी अन्य व्यक्ति का निकला।

एआर इंटरप्राइजेज और एसबी इंटरप्राइजेज (राजगढ़, झांसी) चमड़ा कारोबार के नाम पर पंजीकृत। जीएसटी पंजीयन में उपयोग किए गए बिजली बिल फर्जी पाए गए और स्थल पर कोई फर्म नहीं मिली।



बयान

रैकी अभियान के तहत संदिग्ध फर्मों की जांच जारी है। अब तक 17 फर्जी फर्में पकड़ी जा चुकी हैं। फर्जीवाड़ा सामने आने पर एफआईआर दर्ज कर पंजीयन निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही इनसे कारोबार करने वाली अन्य फर्मों की भी जांच की जा रही है। -ंडी.के. सचान, एडिशनल कमिश्नर (ग्रेड-1), झांसी जोन
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