{"_id":"675608ac5a00ae780f097077","slug":"239-crore-rupees-are-frozen-in-the-bank-accounts-of-victims-of-cyber-fraud-jhansi-news-c-11-1-jhs1019-449603-2024-12-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: साइबर ठगी के पीड़ितों के बैंक खाते में फ्रीज हैं 2.39 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: साइबर ठगी के पीड़ितों के बैंक खाते में फ्रीज हैं 2.39 करोड़
Mon, 09 Dec 2024 02:29 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Mon, 09 Dec 2024 02:29 AM IST
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। साइबर ठगी के पीड़ितों के बैंक खाते में कुल 2.39 करोड़ रुपये फ्रीज हैं। इस रकम की वापसी प्रक्रिया अत्यधिक जटिल होती है। इस वजह से यह पैसा बैंक खातों में ही सालों से पड़ा है। भुक्तभोगियों को अपना पैसा वापस पाने के लिए बैंक समेत साइबर थाने के चक्कर काटने पड़ते हैं। काफी मशक्कत के बाद ही उनको यह रकम वापस मिल पाती है।
साइबर फ्राड से बाल-बाल बचने वालों की भी मुसीबत कम नहीं है। साइबर फ्राड का शिकार होने पर अगर समय रहते उन्होंने पुलिस के पास शिकायत दर्ज करा दी, तब पुलिस जिस खाते में रकम भेजती है, उसको रिपोर्ट करके फ्रीज करा देती है। बैंक भी ऐसे खाते को होल्ड कर देता है। जो रकम इस खाते में आती है, वह भी इसमें फ्रीज हो जाती है। बैंक भी आसानी से यह रकम वापस नहीं करते। मजबूरन भुक्तभोगी को कोर्ट की शरण लेनी पड़ती है। अधिकांश मामलों में कोर्ट के आदेश पर ही रकम वापस हो सकी है।
वर्ष 2018 से अब तक 600 से अधिक बैंक खातों में कुल 2.39 करोड़ रुपये फ्रीज हैं जबकि अभी तक 90 लाख रुपये भुक्तभोगियों के बीच दिया जा चुका। वहीं, एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है साइबर पुलिस ऐसे मामलों में संबंधित बैंक को रिपोर्ट भेज देती है। इसके बाद बैंक अपनी ओर से सत्यापित करके ही रकम वापस करता है।
विज्ञापन
कोर्ट का खटखटाना पड़ता है दरवाजा
साइबर पुलिस की ओर से सीज खाते से अपना पैसा वापस पाने के लिए भुक्तभोगियों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। कोर्ट बीएनएस की धारा 503 के तहत सुनवाई करते हुए पुलिस से रिपोर्ट तलब करती है। इसके बाद बैंक भी कोर्ट के आदेश पर पैसा रिलीज करने को राजी हो जाता है। कोर्ट के आदेश देने पर बैंक पैसा रिलीज करता है।
केस एक
सदर बाजार निवासी घनश्याम अग्रवाल के खाते से 20 जनवरी 2022 को साइबर जालसाज 5 लाख रुपये निकाल लिए। भुक्तभोगी घनश्याम ने इसकी पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 3 लाख रुपये फ्रीज करा दिए। यह पैसा तब से फ्रीज पड़ा है। छानबीन में मालूम चला कि इस खाते में 19 लाख रुपये हैं। इसमें कहां-कहां से पैसा आया, अभी यह साफ नहीं है। इस वजह से फ्रीज खाते में उनका पैसा भी फंसा हुआ है।
केस दो
सिविल लाइंस निवासी श्रुति गुप्ता के खाते से अप्रैल 2023 में जालसाजों ने 96 हजार रुपये निकाल लिए थे। श्रुति के बताने पर पुलिस ने खाता फ्रीज करा दिया। उस खाते से रकम निकाली नहीं जा सकी थी। श्रुति ने जब बैंक से संपर्क किया तब उसने पैसा रिलीज करने के लिए पुलिस की रिपोर्ट मांगी। साइबर पुलिस की रिपोर्ट पर भी पैसा रिलीज नहीं किया गया। मजबूरन श्रुति को कोर्ट जाना पड़ा। कोर्ट के आदेश के बाद अपना पैसा मिल सका।
विज्ञापन
झांसी। साइबर ठगी के पीड़ितों के बैंक खाते में कुल 2.39 करोड़ रुपये फ्रीज हैं। इस रकम की वापसी प्रक्रिया अत्यधिक जटिल होती है। इस वजह से यह पैसा बैंक खातों में ही सालों से पड़ा है। भुक्तभोगियों को अपना पैसा वापस पाने के लिए बैंक समेत साइबर थाने के चक्कर काटने पड़ते हैं। काफी मशक्कत के बाद ही उनको यह रकम वापस मिल पाती है।
साइबर फ्राड से बाल-बाल बचने वालों की भी मुसीबत कम नहीं है। साइबर फ्राड का शिकार होने पर अगर समय रहते उन्होंने पुलिस के पास शिकायत दर्ज करा दी, तब पुलिस जिस खाते में रकम भेजती है, उसको रिपोर्ट करके फ्रीज करा देती है। बैंक भी ऐसे खाते को होल्ड कर देता है। जो रकम इस खाते में आती है, वह भी इसमें फ्रीज हो जाती है। बैंक भी आसानी से यह रकम वापस नहीं करते। मजबूरन भुक्तभोगी को कोर्ट की शरण लेनी पड़ती है। अधिकांश मामलों में कोर्ट के आदेश पर ही रकम वापस हो सकी है।
विज्ञापन
वर्ष 2018 से अब तक 600 से अधिक बैंक खातों में कुल 2.39 करोड़ रुपये फ्रीज हैं जबकि अभी तक 90 लाख रुपये भुक्तभोगियों के बीच दिया जा चुका। वहीं, एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है साइबर पुलिस ऐसे मामलों में संबंधित बैंक को रिपोर्ट भेज देती है। इसके बाद बैंक अपनी ओर से सत्यापित करके ही रकम वापस करता है।
विज्ञापन
कोर्ट का खटखटाना पड़ता है दरवाजा
साइबर पुलिस की ओर से सीज खाते से अपना पैसा वापस पाने के लिए भुक्तभोगियों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। कोर्ट बीएनएस की धारा 503 के तहत सुनवाई करते हुए पुलिस से रिपोर्ट तलब करती है। इसके बाद बैंक भी कोर्ट के आदेश पर पैसा रिलीज करने को राजी हो जाता है। कोर्ट के आदेश देने पर बैंक पैसा रिलीज करता है।
केस एक
सदर बाजार निवासी घनश्याम अग्रवाल के खाते से 20 जनवरी 2022 को साइबर जालसाज 5 लाख रुपये निकाल लिए। भुक्तभोगी घनश्याम ने इसकी पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 3 लाख रुपये फ्रीज करा दिए। यह पैसा तब से फ्रीज पड़ा है। छानबीन में मालूम चला कि इस खाते में 19 लाख रुपये हैं। इसमें कहां-कहां से पैसा आया, अभी यह साफ नहीं है। इस वजह से फ्रीज खाते में उनका पैसा भी फंसा हुआ है।
केस दो
सिविल लाइंस निवासी श्रुति गुप्ता के खाते से अप्रैल 2023 में जालसाजों ने 96 हजार रुपये निकाल लिए थे। श्रुति के बताने पर पुलिस ने खाता फ्रीज करा दिया। उस खाते से रकम निकाली नहीं जा सकी थी। श्रुति ने जब बैंक से संपर्क किया तब उसने पैसा रिलीज करने के लिए पुलिस की रिपोर्ट मांगी। साइबर पुलिस की रिपोर्ट पर भी पैसा रिलीज नहीं किया गया। मजबूरन श्रुति को कोर्ट जाना पड़ा। कोर्ट के आदेश के बाद अपना पैसा मिल सका।