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Jhansi News: राम मंदिर आंदोलन में जेल में तब्दील हो गए थे झांसी के 21 स्कूल
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- अयोध्या जाने से रोकने के लिए स्टेशन से ले लिया जाता था घेरे में
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। राम मंदिर आंदोलन के दौरान झांसी के 21 स्कूलों को अस्थायी जेलों में तब्दील कर दिया गया था। इन जेलों में बाहर से आए कार सेवकों को बंद किया जाता था। पुलिस कार सेवकों को रेलवे स्टेशन पर ही घेर लेती थी और उन्हें बसों से अस्थायी जेलों में भेज दिया जाता था। इस दरम्यान जेल में तब्दील किए गए स्कूलों की छुट्टी रहती थी।
राम मंदिर आंदोलन का झांसी प्रमुख गढ़ रहा है। दक्षिण के राज्यों से अयोध्या की ओर जाने वाले कार सेवक झांसी से होकर ही गुजरते थे। लेकिन, उन्हें यहां से आगे बढ़ने नहीं दिया जाता था। पुलिस स्टेशन से ही उन्हें ट्रेनों से उतार लेती थी। इसके बाद बसों से अस्थायी जेलों में भेज दिया जाता था। 1989 में हुए आंदोलन में एक बार झांसी में कार सेवकों की संख्या लगभग दो लाख पहुंच गई थी। इनमें महिलाओं की संख्या भी खासी थी। ऐसे में पुलिस ने इन कार सेवकों को बंद करने के लिए जिले के 21 स्कूलों को अस्थायी जेलों में तब्दील कर दिया था। महिलाओं और पुरुषों को एक साथ जेल में बंद किया जाता था, बस उनके कक्ष अलग-अलग होते थे। अस्थायी जेलों के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहता था, ताकि कारसेवक भाग न सकें। लेकिन, कार सेवकों में अयोध्या पहुंचने का जुनून इस कदर हावी था कि वह पुलिस को चकमा देकर अस्थायी जेलों की चहारदीवारी को फांदकर निकल जाते थे। इसके अलावा अस्थायी जेलों से दिन भर जय श्रीराम की गूंज सुनाई देती थी।
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फोटो-- --
एक समय में झांसी में दो लाख से अधिक कार सेवकों का जमावड़ा हो गया था। यह सभी दक्षिण के राज्यों से झांसी होते हुए अयोध्या जाने वाले थे, परंतु पुलिस ने इन्हें यहां गिरफ्तार कर लिया था। कार सेवकों की संख्या अधिक होने की वजह से उन्हें बंद करने के लिए महानगर और ग्रामीण इलाकों के 21 स्कूलों को अस्थायी जेलों में तब्दील कर दिया गया था। इन जेलों के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहता था। बावजूद, तमाम कारसेवक दीवार फांदकर निकल जाते थे। - रवींद्र शुक्ल, पूर्व मंत्री
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पुलिस ने कारसेवकों को बंद करने के लिए झांसी के 21 स्कूलों में अस्थायी जेल बनाईं थीं। लेकिन, कारसेवकों की संख्या के सामने यह भी कम पड़ गईं थीं। ऐसे में यहां से पकड़े गए कार सेवकों को पुलिस बसों से महोबा, उरई, बांदा व ललितपुर में बनाई गईं जेलों में भेज देती थी। कारसेवकों को बताया नहीं जाता था कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। कारसेवक जय श्रीराम के नारे लगाते हुए जाते थे। कारसेवकों के इस उत्साह से आंदोलन को और भी बल मिलता था। - सुबोध गुबरेले, पूर्व जिलाध्यक्ष
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। राम मंदिर आंदोलन के दौरान झांसी के 21 स्कूलों को अस्थायी जेलों में तब्दील कर दिया गया था। इन जेलों में बाहर से आए कार सेवकों को बंद किया जाता था। पुलिस कार सेवकों को रेलवे स्टेशन पर ही घेर लेती थी और उन्हें बसों से अस्थायी जेलों में भेज दिया जाता था। इस दरम्यान जेल में तब्दील किए गए स्कूलों की छुट्टी रहती थी।
राम मंदिर आंदोलन का झांसी प्रमुख गढ़ रहा है। दक्षिण के राज्यों से अयोध्या की ओर जाने वाले कार सेवक झांसी से होकर ही गुजरते थे। लेकिन, उन्हें यहां से आगे बढ़ने नहीं दिया जाता था। पुलिस स्टेशन से ही उन्हें ट्रेनों से उतार लेती थी। इसके बाद बसों से अस्थायी जेलों में भेज दिया जाता था। 1989 में हुए आंदोलन में एक बार झांसी में कार सेवकों की संख्या लगभग दो लाख पहुंच गई थी। इनमें महिलाओं की संख्या भी खासी थी। ऐसे में पुलिस ने इन कार सेवकों को बंद करने के लिए जिले के 21 स्कूलों को अस्थायी जेलों में तब्दील कर दिया था। महिलाओं और पुरुषों को एक साथ जेल में बंद किया जाता था, बस उनके कक्ष अलग-अलग होते थे। अस्थायी जेलों के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहता था, ताकि कारसेवक भाग न सकें। लेकिन, कार सेवकों में अयोध्या पहुंचने का जुनून इस कदर हावी था कि वह पुलिस को चकमा देकर अस्थायी जेलों की चहारदीवारी को फांदकर निकल जाते थे। इसके अलावा अस्थायी जेलों से दिन भर जय श्रीराम की गूंज सुनाई देती थी।
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एक समय में झांसी में दो लाख से अधिक कार सेवकों का जमावड़ा हो गया था। यह सभी दक्षिण के राज्यों से झांसी होते हुए अयोध्या जाने वाले थे, परंतु पुलिस ने इन्हें यहां गिरफ्तार कर लिया था। कार सेवकों की संख्या अधिक होने की वजह से उन्हें बंद करने के लिए महानगर और ग्रामीण इलाकों के 21 स्कूलों को अस्थायी जेलों में तब्दील कर दिया गया था। इन जेलों के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहता था। बावजूद, तमाम कारसेवक दीवार फांदकर निकल जाते थे। - रवींद्र शुक्ल, पूर्व मंत्री
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पुलिस ने कारसेवकों को बंद करने के लिए झांसी के 21 स्कूलों में अस्थायी जेल बनाईं थीं। लेकिन, कारसेवकों की संख्या के सामने यह भी कम पड़ गईं थीं। ऐसे में यहां से पकड़े गए कार सेवकों को पुलिस बसों से महोबा, उरई, बांदा व ललितपुर में बनाई गईं जेलों में भेज देती थी। कारसेवकों को बताया नहीं जाता था कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। कारसेवक जय श्रीराम के नारे लगाते हुए जाते थे। कारसेवकों के इस उत्साह से आंदोलन को और भी बल मिलता था। - सुबोध गुबरेले, पूर्व जिलाध्यक्ष