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नही हुआ कोई ऐलान, खुद ही चुनना होगा अपना मुस्तेबिल
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नहीं हुुआ एलान, खुद ही चुनना होगा अपना सांसद
झांसी। लोकसभा के चुनाव में किसी भी मस्लक की ओर से कोई भी एलान जारी नहीं होने से मुस्लिम वोटरों में असमंजस की स्थिति है। ऐसे में सभी दलों के प्रत्याशी मुस्लिम वोटरों का रुख अपनी ओर करने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। हालांकि मुस्लिम मतदाता किस ओर मतदान करेंगे यह अभी तय नहीं है।
झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट पर लगभग दो लाख मतदाता हैं। जो चुनाव में अहम भूमिका अदा करने वाले हैं। लगभग हर चुनाव में उलेमाओं की ओर से एलान होने के बाद मुस्लिम मतदाता उसी ओर वोटिंग करते हैं। लेकिन इस बार के लोकसभा के चुनाव में देवबंद से लेकर बरेली व दिल्ली से कोई एलान नहीं होने के कारण मुस्लिम मतदाता असमंजस की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। मुस्लिम बस्तियों में भी लोगों का यही हाल देखा जा रहा है।
इस बार के लोकसभा चुनाव में शहर के उलेमा भी किसी भी तरह का बयान जारी करने से बच रहे हैं। वहीं, मुस्लिम मतदाताओं का मानना है कि हर बार सभी दल कई तरह के लुभावने वादे कर मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं लेकिन जीत हासिल करने के बाद मुस्लिमों की कोई भी सुध नहीं लेता है।
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वोट देना एक शरई हक है हर किसी को मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए। ऐसे प्रत्याशी का चुनाव करें जो धर्म जाति व वर्ग से हटकर लोगों की मदद को सदैव तैयार रहे। क्षेत्र की जनता की आवाज बनकर संसद में उठा सके, जिससे की सभी का भला हो सके।
मुफ्ती साबिर कासमी, मुस्लिम धर्मगुरू
हर बार की तरह इस बार भी कई उम्मीदवार चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मतदान के अधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिए। विकास की राह में अहम योगदान देने वाले प्रत्याशी को ही चुनकर
संसद में पहुंचाएं जिससे की क्षेत्र का भरपूर विकास हो सके।
मौलाना हाशिम, मुस्लिम धर्मगुरू
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झांसी। लोकसभा के चुनाव में किसी भी मस्लक की ओर से कोई भी एलान जारी नहीं होने से मुस्लिम वोटरों में असमंजस की स्थिति है। ऐसे में सभी दलों के प्रत्याशी मुस्लिम वोटरों का रुख अपनी ओर करने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। हालांकि मुस्लिम मतदाता किस ओर मतदान करेंगे यह अभी तय नहीं है।
झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट पर लगभग दो लाख मतदाता हैं। जो चुनाव में अहम भूमिका अदा करने वाले हैं। लगभग हर चुनाव में उलेमाओं की ओर से एलान होने के बाद मुस्लिम मतदाता उसी ओर वोटिंग करते हैं। लेकिन इस बार के लोकसभा के चुनाव में देवबंद से लेकर बरेली व दिल्ली से कोई एलान नहीं होने के कारण मुस्लिम मतदाता असमंजस की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। मुस्लिम बस्तियों में भी लोगों का यही हाल देखा जा रहा है।
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इस बार के लोकसभा चुनाव में शहर के उलेमा भी किसी भी तरह का बयान जारी करने से बच रहे हैं। वहीं, मुस्लिम मतदाताओं का मानना है कि हर बार सभी दल कई तरह के लुभावने वादे कर मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं लेकिन जीत हासिल करने के बाद मुस्लिमों की कोई भी सुध नहीं लेता है।
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वोट देना एक शरई हक है हर किसी को मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए। ऐसे प्रत्याशी का चुनाव करें जो धर्म जाति व वर्ग से हटकर लोगों की मदद को सदैव तैयार रहे। क्षेत्र की जनता की आवाज बनकर संसद में उठा सके, जिससे की सभी का भला हो सके।
मुफ्ती साबिर कासमी, मुस्लिम धर्मगुरू
हर बार की तरह इस बार भी कई उम्मीदवार चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मतदान के अधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिए। विकास की राह में अहम योगदान देने वाले प्रत्याशी को ही चुनकर
संसद में पहुंचाएं जिससे की क्षेत्र का भरपूर विकास हो सके।
मौलाना हाशिम, मुस्लिम धर्मगुरू