{"_id":"5c6f0eb1bdec22120179bded","slug":"191550782129-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी अंकतालिका लगाकर बन गया विपणन सहायक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जी अंकतालिका लगाकर बन गया विपणन सहायक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्जी अंकतालिका लगाकर बन गया विपणन सहायक
झांसी। संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी वर्ष 2006 की हाईस्कूल की फर्जी अंकतालिका लगाकर विपणन सहायक बन गया। वह लगातार नौकरी भी करता रहा। पिछले दिनों प्रधानमंत्री पोर्टल पर की गई एक शिकायत के आधार पर हुई जांच में पूरे मामले का खुलासा हो गया। इस पर कर्मचारी मकबूल अहमद को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच शुरू हो गई है। दोष सिद्ध होने पर उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उससे दस वर्ष के बढ़े हुए वेतन की वसूली भी की जाएगी। इसी तरह के मामले में विभाग के तीन और कर्मचारी जांच के घेरे में हैं।
संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय में गोदाम चौकीदार मकबूल अहमद ने पदोन्नति के लिए गुरुकुल वृंदावन, मथुरा की वर्ष 2006 की हाई स्कूल के समकक्ष अधिकारी परीक्षा पास होने की अंकतालिका विभाग में लगाई। इस आधार पर उसे आठ फरवरी 2008 को चौकीदार से विपणन सहायक पद पर पदोन्नति दे दी गई। इसके बाद कोई समस्या नहीं आई और नौकरी धड़ल्ले से चलती रही। पिछले दिनों मकबूल अहमद की फर्जी अंकतालिका के आधार पर पदोन्नति पाए जाने की शिकायत प्रधानमंत्री पोर्टल के आईजीआरएस पर की गई। वहां से यह शिकायत विभाग में आई तो उसकी जांच शुरू हुई। कुलसचिव गुरुकुल वृंदावन मथुरा से शैक्षिक योग्यता के प्रमाण पत्र की जांच कराई गई। 13 फरवरी 19 को आई कुलसचिव की रिपोर्ट में बताया गया कि ‘मकबूल अहमद की अधिकारी परीक्षा (कक्षा-10) 2006 अनुक्रमांक 117589 के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की कॉपी सही नहीं है। वह कूटरचित और फर्जी है। यह कार्य अभ्यर्थी अथवा उसके अभिभावकों द्वारा किन्हीं शिक्षा माफिया से मिलकर निजी हित में किया गया है।’
संभागीय खाद्य नियंत्रक नरेंद्र कुमार ने बताया कि मकबूल अहमद उप्र. सरकारी सेवा नियमावली के दोषी प्रतीत हो रहे हैं, इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। जांच सहायक संभागीय लेखाधिकारी (खाद्य) को सौंप दी है। 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने बताया कि फर्जी मार्कशीट के आधार पर पदोन्नति पाने का दोषी पाए जाने पर मकबूल अहमद से दस साल की रिकवरी होगी और एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मकबूल अहमद को एक साल बाद सेवानिवृत्त होना था।
विज्ञापन
2003 में हुई थी शिकायत
मकबूल अहमद की इसी तरह की शिकायत 2003 में भी हुई थी, लेकिन उस समय शिकायत निराधार पाई गई थी। जब दोबारा शिकायत की गई तो मामला खुल गया।
विज्ञापन
झांसी। संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी वर्ष 2006 की हाईस्कूल की फर्जी अंकतालिका लगाकर विपणन सहायक बन गया। वह लगातार नौकरी भी करता रहा। पिछले दिनों प्रधानमंत्री पोर्टल पर की गई एक शिकायत के आधार पर हुई जांच में पूरे मामले का खुलासा हो गया। इस पर कर्मचारी मकबूल अहमद को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच शुरू हो गई है। दोष सिद्ध होने पर उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उससे दस वर्ष के बढ़े हुए वेतन की वसूली भी की जाएगी। इसी तरह के मामले में विभाग के तीन और कर्मचारी जांच के घेरे में हैं।
संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय में गोदाम चौकीदार मकबूल अहमद ने पदोन्नति के लिए गुरुकुल वृंदावन, मथुरा की वर्ष 2006 की हाई स्कूल के समकक्ष अधिकारी परीक्षा पास होने की अंकतालिका विभाग में लगाई। इस आधार पर उसे आठ फरवरी 2008 को चौकीदार से विपणन सहायक पद पर पदोन्नति दे दी गई। इसके बाद कोई समस्या नहीं आई और नौकरी धड़ल्ले से चलती रही। पिछले दिनों मकबूल अहमद की फर्जी अंकतालिका के आधार पर पदोन्नति पाए जाने की शिकायत प्रधानमंत्री पोर्टल के आईजीआरएस पर की गई। वहां से यह शिकायत विभाग में आई तो उसकी जांच शुरू हुई। कुलसचिव गुरुकुल वृंदावन मथुरा से शैक्षिक योग्यता के प्रमाण पत्र की जांच कराई गई। 13 फरवरी 19 को आई कुलसचिव की रिपोर्ट में बताया गया कि ‘मकबूल अहमद की अधिकारी परीक्षा (कक्षा-10) 2006 अनुक्रमांक 117589 के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की कॉपी सही नहीं है। वह कूटरचित और फर्जी है। यह कार्य अभ्यर्थी अथवा उसके अभिभावकों द्वारा किन्हीं शिक्षा माफिया से मिलकर निजी हित में किया गया है।’
विज्ञापन
संभागीय खाद्य नियंत्रक नरेंद्र कुमार ने बताया कि मकबूल अहमद उप्र. सरकारी सेवा नियमावली के दोषी प्रतीत हो रहे हैं, इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। जांच सहायक संभागीय लेखाधिकारी (खाद्य) को सौंप दी है। 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने बताया कि फर्जी मार्कशीट के आधार पर पदोन्नति पाने का दोषी पाए जाने पर मकबूल अहमद से दस साल की रिकवरी होगी और एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मकबूल अहमद को एक साल बाद सेवानिवृत्त होना था।
विज्ञापन
2003 में हुई थी शिकायत
मकबूल अहमद की इसी तरह की शिकायत 2003 में भी हुई थी, लेकिन उस समय शिकायत निराधार पाई गई थी। जब दोबारा शिकायत की गई तो मामला खुल गया।