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भव्यता खो रही विराट विष् णु प्रतिमा
Updated Wed, 05 Jul 2017 09:31 PM IST
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भव्यता खो रही टौरिया पर रखी विराट प्रतिमा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर/डोंगराखुर्द। डोंगराखुर्द से करीब 12 किलोमीटर दूर ढाई सौ फुट की ऊंचाई पर सटूकरे की टौरिया पर्वत पर स्थित भगवान विष्णु की अधूरी प्रतिमा संपूर्णता की आस देख रही है। मानव कद इस विराट प्रतिमा का निर्माण एक संत द्वारा किया गया था। यहां पांडवों के निवास करने से यह स्थल महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां आने के लिए पक्की सड़क न होने से लोगों को बारिश के दिनों में परेशानी होती है। वन विभाग और पर्यटन विभाग इस मनोरम स्थान और भव्य प्रतिमा से अनभिज्ञ हैं। इससे यह स्थल अपनी सुंदरता खोता जा रहा है।
मड़ावरा वन रेंज के अंतर्गत डोंगराखुर्द, पटना-पारौल गांव के आगे करीब पांच किलोमीटर दूर विंध्यांचल पर्वत श्रंखलाओं पर प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल पंडवन अपनी आलौकिकता के लिए जाना जाता है। जानकार बताते हैं कि वनवास के दौरान यहां पांडवों ने काफी समय व्यतीत किया था। पंडवन धर्म स्थल के आगे दो पहाड़ों के बाद विंध्यांचल पर्वत पर करीब ढाई सौ फुट की ऊंचाई पर सटूकरे की टौरिया स्थित है। इस टौरिया पर वर्ष 1990 में रामस्वरूप दास त्यागी महाराज ने तपस्या शुरू की और यहां भव्य मंदिर बनाया। वह यहां पहाड़ी काटकर भगवान विष्णु की लेटी हुई प्रतिमा बनाने लगे। तभी से इस टौरिया का नाम सिद्ध टेकरी आश्रम हो गया। जानकार विष्णु की इस प्रतिमा को अधूरी बताते हैं। गांववालों में मान्यता है कि यह विराट प्रतिमा पूर्ण होते ही बिना किसी सहयोग के सीधी मुद्रा में खड़ी हो जाएगी। इस प्रतिमा में विराट भगवान के बारह-बारह हाथ दर्शाए गए हैं। इन हाथों में गदा, तीर, फूल, धनुष, मृदंग के साथ ही वह दायां हाथ आशीर्वाद देता हुआ दिखाया गया है। इसमें भगवान विराट फूलों पर खड़े हैं। यहां भगवान हनुमान के साथ ही भगवान भोलेनाथ की भी विश्रामावस्था में प्रतिमा है।
वन विभाग से विवाद के बाद करीब आठ वर्ष पूर्व त्यागी महाराज यह स्थान छोड़कर चले गए। तब से यह प्रतिमा अधूरी है। मंदिर में त्यागी महाराज की समाधि बनी है। यहां मंदिर के पास एक सीढ़ी युक्त तीन फीट ऊंचा मचान भी बना है। इससे क्षेत्र का मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। इसी पहाड़ी से पंडवन व जामनी नदी का सुंदर नजारा दिखता है। इस मंदिर में हर वर्ष सावन सहित अन्य महीनों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। वन विभाग और पर्यटन विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते यहां आने के लिए पक्का मार्ग तक नहीं बन सका है। बरसात के दौरान यह रास्ता काफी दुर्गम हो जाता है। यह स्थल विकसित न होने से अपनी पहचान खोता जा रहा है।
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शासन की अनदेखी से प्रगति रुकी
सटूकरे की टौरिया पर भगवान की भव्य प्रतिमा के पूर्ण निर्माण व स्थापना की इच्छा पूरे क्षेत्रवासियों व भक्तों की है। प्रशासन की अनदेखी के चलते इस स्थान की प्रगति नहीं हो पा रही है। यह सिद्ध क्षेत्र है और यहां अनेक सनातन धर्म से संबंधित मूर्तियां स्थित हैं। तपो भूमि स्थल पर एक परम भक्त महात्मा निवास करते थे, जिनके द्वारा कई मूर्तियों का निर्माण किया गया है और उन्होंने ही भगवान विष्णु व अन्य मूर्तियों का निर्माण किया है।
- उद्धव महाराज, प्रयाग राज।
पर्यटन केंद्र बन सकता है यह स्थान
पंडवन से आगे तीन पहाड़ों के बाद स्थित सिद्ध टेकरी विराट आश्रम पर यदि शासन-प्रशासन मंदिर निर्माण के कार्य में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करे तो यह इलाका प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र के रूप में भी विकसित हो सकता है।
- रामबाबा डुंगरासन माता मंदिर।
जनप्रतिनिधि नहीं करते पहल
क्षेत्रवासियों के सहयोग से सिद्धटेकरी मंदिर बनाया गया है। करीब बीस गांव के लोग सटूकरे की टौरिया पर मंदिर निर्माण के कार्य के लिए जाते थे, श्रमदान करते थे। लेकिन शासन व जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला है। जनप्रतिनिधि चाहें तो मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर हो जाएंगी और यह धार्मिक स्थल अपनी संपूर्णता के लिए जाना जाएगा।
- कामता कुशवाहा, पटना।
बारिश में जर्जर मार्ग से असुविधा
सटूकरे की टौरिया तक पहुंचने में जर्जर मार्ग से बारिश के दिनों में काफी दिक्कत होती है। यहां तक कि पैदल रास्ता भी नहीं रहता है। यदि टौरिया तक जाने के लिए पक्की सड़क व बिजली की व्यवस्था हो जाए, तो लोगों को पहुंचने में असुविधा नहीं उठानी पड़ेगी।
- रामसिंह, डोंगराखुर्द।
डीएफओ ने जताई अनभिज्ञता
पंडवन से आगे स्थित सटूकरे की टौरिया पर बने मंदिर का कार्य रुकवाने की सही जानकारी नहीं है। यह मामला उनके समय का नहीं है। मामले के बारे में जानकारी के बाद ही कुछ कह सकेंगे। क्षेत्र के विकास का मामला पर्यटन विभाग को देखना चाहिए।
वीके जैन, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर/डोंगराखुर्द। डोंगराखुर्द से करीब 12 किलोमीटर दूर ढाई सौ फुट की ऊंचाई पर सटूकरे की टौरिया पर्वत पर स्थित भगवान विष्णु की अधूरी प्रतिमा संपूर्णता की आस देख रही है। मानव कद इस विराट प्रतिमा का निर्माण एक संत द्वारा किया गया था। यहां पांडवों के निवास करने से यह स्थल महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां आने के लिए पक्की सड़क न होने से लोगों को बारिश के दिनों में परेशानी होती है। वन विभाग और पर्यटन विभाग इस मनोरम स्थान और भव्य प्रतिमा से अनभिज्ञ हैं। इससे यह स्थल अपनी सुंदरता खोता जा रहा है।
मड़ावरा वन रेंज के अंतर्गत डोंगराखुर्द, पटना-पारौल गांव के आगे करीब पांच किलोमीटर दूर विंध्यांचल पर्वत श्रंखलाओं पर प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल पंडवन अपनी आलौकिकता के लिए जाना जाता है। जानकार बताते हैं कि वनवास के दौरान यहां पांडवों ने काफी समय व्यतीत किया था। पंडवन धर्म स्थल के आगे दो पहाड़ों के बाद विंध्यांचल पर्वत पर करीब ढाई सौ फुट की ऊंचाई पर सटूकरे की टौरिया स्थित है। इस टौरिया पर वर्ष 1990 में रामस्वरूप दास त्यागी महाराज ने तपस्या शुरू की और यहां भव्य मंदिर बनाया। वह यहां पहाड़ी काटकर भगवान विष्णु की लेटी हुई प्रतिमा बनाने लगे। तभी से इस टौरिया का नाम सिद्ध टेकरी आश्रम हो गया। जानकार विष्णु की इस प्रतिमा को अधूरी बताते हैं। गांववालों में मान्यता है कि यह विराट प्रतिमा पूर्ण होते ही बिना किसी सहयोग के सीधी मुद्रा में खड़ी हो जाएगी। इस प्रतिमा में विराट भगवान के बारह-बारह हाथ दर्शाए गए हैं। इन हाथों में गदा, तीर, फूल, धनुष, मृदंग के साथ ही वह दायां हाथ आशीर्वाद देता हुआ दिखाया गया है। इसमें भगवान विराट फूलों पर खड़े हैं। यहां भगवान हनुमान के साथ ही भगवान भोलेनाथ की भी विश्रामावस्था में प्रतिमा है।
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वन विभाग से विवाद के बाद करीब आठ वर्ष पूर्व त्यागी महाराज यह स्थान छोड़कर चले गए। तब से यह प्रतिमा अधूरी है। मंदिर में त्यागी महाराज की समाधि बनी है। यहां मंदिर के पास एक सीढ़ी युक्त तीन फीट ऊंचा मचान भी बना है। इससे क्षेत्र का मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। इसी पहाड़ी से पंडवन व जामनी नदी का सुंदर नजारा दिखता है। इस मंदिर में हर वर्ष सावन सहित अन्य महीनों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। वन विभाग और पर्यटन विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते यहां आने के लिए पक्का मार्ग तक नहीं बन सका है। बरसात के दौरान यह रास्ता काफी दुर्गम हो जाता है। यह स्थल विकसित न होने से अपनी पहचान खोता जा रहा है।
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शासन की अनदेखी से प्रगति रुकी
सटूकरे की टौरिया पर भगवान की भव्य प्रतिमा के पूर्ण निर्माण व स्थापना की इच्छा पूरे क्षेत्रवासियों व भक्तों की है। प्रशासन की अनदेखी के चलते इस स्थान की प्रगति नहीं हो पा रही है। यह सिद्ध क्षेत्र है और यहां अनेक सनातन धर्म से संबंधित मूर्तियां स्थित हैं। तपो भूमि स्थल पर एक परम भक्त महात्मा निवास करते थे, जिनके द्वारा कई मूर्तियों का निर्माण किया गया है और उन्होंने ही भगवान विष्णु व अन्य मूर्तियों का निर्माण किया है।
- उद्धव महाराज, प्रयाग राज।
पर्यटन केंद्र बन सकता है यह स्थान
पंडवन से आगे तीन पहाड़ों के बाद स्थित सिद्ध टेकरी विराट आश्रम पर यदि शासन-प्रशासन मंदिर निर्माण के कार्य में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करे तो यह इलाका प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र के रूप में भी विकसित हो सकता है।
- रामबाबा डुंगरासन माता मंदिर।
जनप्रतिनिधि नहीं करते पहल
क्षेत्रवासियों के सहयोग से सिद्धटेकरी मंदिर बनाया गया है। करीब बीस गांव के लोग सटूकरे की टौरिया पर मंदिर निर्माण के कार्य के लिए जाते थे, श्रमदान करते थे। लेकिन शासन व जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला है। जनप्रतिनिधि चाहें तो मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर हो जाएंगी और यह धार्मिक स्थल अपनी संपूर्णता के लिए जाना जाएगा।
- कामता कुशवाहा, पटना।
बारिश में जर्जर मार्ग से असुविधा
सटूकरे की टौरिया तक पहुंचने में जर्जर मार्ग से बारिश के दिनों में काफी दिक्कत होती है। यहां तक कि पैदल रास्ता भी नहीं रहता है। यदि टौरिया तक जाने के लिए पक्की सड़क व बिजली की व्यवस्था हो जाए, तो लोगों को पहुंचने में असुविधा नहीं उठानी पड़ेगी।
- रामसिंह, डोंगराखुर्द।
डीएफओ ने जताई अनभिज्ञता
पंडवन से आगे स्थित सटूकरे की टौरिया पर बने मंदिर का कार्य रुकवाने की सही जानकारी नहीं है। यह मामला उनके समय का नहीं है। मामले के बारे में जानकारी के बाद ही कुछ कह सकेंगे। क्षेत्र के विकास का मामला पर्यटन विभाग को देखना चाहिए।
वीके जैन, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।