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32 साल बाद जेल अधिकारी व कर्मचारी पर मुकदमा
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32 साल बाद जेल अधिकारी व कर्मचारी पर मुकदमा
ललितपुर। फर्जी दस्तावेज तैयार कर बंदी की रिहाई के मामले में तत्कालीन जेल अधिकारी, कर्मचारियों और बंदी के खिलाफ 32 साल बाद धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। झांसी पुलिस एवं झांसी के जिला जज और पुलिस उपमहानिरीक्षक कानपुर की जांच में खुलासा होने के बाद थाना कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई की है।
लूट और हत्या के जुर्म में मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिला के अंतर्गत कस्बा पिपरई निवासी बशीर खां जिला कारागार में दोष सिद्ध कैदी था। उसे सात दिसंबर 1987 को रिहा किया गया, लेकिन 21 मार्च 2018 को उच्च न्यायालय के आदेश पर जिला जज झांसी, झांसी पुलिस एवं उपमहानिरीक्षक कानपुर परिक्षेत्र द्वारा की गई जांच में यह खुलासा हुआ कि कि दोष सिद्ध बंदी बशीर खां न तो जनपद न्यायालय द्वारा जमानत पर रिहा हुआ है और न ही उत्तर प्रदेश शासन के किसी वैध आदेश के अंतर्गत उसकी रिहाई के आदेश दिए गए हैं। इससे बंदी की रिहाई फर्जी व कूटरचित आदेश के आधार पर की गई है। इसमें दोष सिद्ध बंदी एवं तत्कालीन कारागार अधिकारी व कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका स्पष्ट प्रतीत होती है।
जेल अधीक्षक बीके मिश्रा की तहरीर के आधार पर थाना कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन जिला कारागार अधिकारी व कर्मचारी एवं सिद्धदोष बंदी मध्य प्रदेश के पिपरई निवासी बशीर खां पर धोखाधड़ी, आदेश के फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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ललितपुर। फर्जी दस्तावेज तैयार कर बंदी की रिहाई के मामले में तत्कालीन जेल अधिकारी, कर्मचारियों और बंदी के खिलाफ 32 साल बाद धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। झांसी पुलिस एवं झांसी के जिला जज और पुलिस उपमहानिरीक्षक कानपुर की जांच में खुलासा होने के बाद थाना कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई की है।
लूट और हत्या के जुर्म में मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिला के अंतर्गत कस्बा पिपरई निवासी बशीर खां जिला कारागार में दोष सिद्ध कैदी था। उसे सात दिसंबर 1987 को रिहा किया गया, लेकिन 21 मार्च 2018 को उच्च न्यायालय के आदेश पर जिला जज झांसी, झांसी पुलिस एवं उपमहानिरीक्षक कानपुर परिक्षेत्र द्वारा की गई जांच में यह खुलासा हुआ कि कि दोष सिद्ध बंदी बशीर खां न तो जनपद न्यायालय द्वारा जमानत पर रिहा हुआ है और न ही उत्तर प्रदेश शासन के किसी वैध आदेश के अंतर्गत उसकी रिहाई के आदेश दिए गए हैं। इससे बंदी की रिहाई फर्जी व कूटरचित आदेश के आधार पर की गई है। इसमें दोष सिद्ध बंदी एवं तत्कालीन कारागार अधिकारी व कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका स्पष्ट प्रतीत होती है।
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जेल अधीक्षक बीके मिश्रा की तहरीर के आधार पर थाना कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन जिला कारागार अधिकारी व कर्मचारी एवं सिद्धदोष बंदी मध्य प्रदेश के पिपरई निवासी बशीर खां पर धोखाधड़ी, आदेश के फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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