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बराठा पेयजल योजना से पहले कोछाभांवर को मिलेगा पानी-Lalitpur
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बराठा से गर्मियों में सिर्फ कोछाभांवर की बुझेगी प्यास
बराठा बेसिन पेयजल योजना से गर्मियों में कोछाभांवर क्षेत्र को ही पानी मिल सकेगा। इसके बाद ही जल संकटग्रस्त मेडिकल क्षेत्र की तरफ पानी आगे बढ़ाया जाएगा। इस काम में चार से पांच महीने का वक्त लगने की उम्मीद है। हालांकि, पानी की मात्रा बढ़ाने के लिए बराठा में दो और ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं।
पेयजल महायोजना के अंतर्गत माताटीला से झांसी तक नई पाइपलाइन से पानी लाने में कम से कम तीन से चार साल लग जाएंगे। चूंकि, गर्मियों में मेडिकल कॉलेज के आसपास क्षेत्र में स्थित गुमनावारा, शिवाजी नगर, वीरांगना नगर, करगुवां, पिछोर, महाराणा प्रताप नगर, डॉक्टर्स, वकील कॉलोनी, कैमासन नगर, कोछाभांवर आदि में भीषण जलसंकट रहता है। इन क्षेत्रों में न तो कोई सरकारी पाइप लाइन है और न कोई दूसरा इंतजाम। अधिकांश घरों की बोरिंग सूख चुकी हैं। हैंडपंप भी अधिक देर तक चलाने पर पानी उगलना बंद कर देते हैं। जलसंस्थान के टैंकरों के भरोसे लोग एक- एक दिन काटने को मजबूर रहते हैं।
उक्त क्षेत्रों को गर्मियों तक पानी मिल सके, इसके लिए जलनिगम महायोजना के बजट से ही बंद पड़ी बराठा बेसिन पेयजल योजना को चालू कर रहा है। 2800 मीटर क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को बदल लिया गया है। इस योजना के तहत बड़ागांव क्षेत्र के बराठा के नजदीक लगे छह ट्यूबवेलों की मदद से करीब छह एमएलडी (साठ लाख लीटर) पानी प्रतिदिन मिल सकेगा। अतिरिक्त पानी के लिए नजदीक ही दो नए ट्यूबवेल भी लगाए जा रहे हैं।
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मगर, जलनिगम ने तय किया है कि वह अप्रैल तक बराठा बेसिन से पहले कोछाभांवर को पानी देगा। कोछाभांवर में तैयार हो रहे स्वच्छ जलाशय (सीडब्लूआर) में पानी भरने के बाद संबंधित क्षेत्र को जलापूर्ति की जाएगी। इसके बाद मेडिकल क्षेत्र के करगुवां, गुमनावारा, वीरांगना नगर, महाराणा प्रताप नगर और आसपास के क्षेत्रों में पाइप लाइन डालकर पानी को आगे बढ़ाया जाएगा। इस काम में तीन से चार महीने का वक्त लगने की उम्मीद है। ऐसे में मेडिकल क्षेत्र और आसपास के इलाकों के लोगों को इस बार भी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
‘बराठा बेसिन पेयजल योजना से अप्रैल तक कोछाभांवर को पानी मिलने लगेगा। मेडिकल क्षेत्र के लिए सखी के हनुमान के पास सीडब्लूआर बनाया जा रहा है। पाइप लाइन डाली जाएगी। जून के आखिर तक मेडिकल क्षेत्र में जलापूर्ति देने की तैयारी की जा रही है।’
अमित कुमार, अधिशासी अभियंता।
वर्ष 1999 में तैयार की गई थी बराठा योजना
महानगर के मेडिकल कॉलेज क्षेत्र से जुड़े क्षेत्रों की पेयजल समस्या को हल करने के लिए वर्ष 1999 में बराठा बेसिन पेयजल योजना शुरू की गई थी। योजना के अंतर्गत पाइप लाइन डल ही पाई थी कि फोरलेन निर्माण के दौरान यह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने अप्रैल 2008 में इसे पूरा कराने की बात कही। इसके तहत सात किलोमीटर पाइप लाइन बदलने का काम अगस्त 2009 में पूरा होना था, लेकिन जल निगम को कार्य पूरा कराने में दो साल से अधिक का समय लग गया। इसके लिए एनएचएआई ने जल निगम को समय से दो करोड़ अड़सठ लाख रुपये उपलब्ध करा दिए थे। कार्य पूरा होने के बाद जल निगम ने मई 2011 में टेस्टिंग की। योजना शुरू हो पाती कि कानपुर रोड पर ट्यूबवेल स्थल से बड़ागांव तक पड़ी पुरानी साढ़े तीन किलोमीटर पाइप लाइन में लीकेज हो गए। इसके बाद योजना को चालू करने का कोई कदम नहीं उठाया गया।
10 हजार आबादी को मिलेगी राहत
कोछाभांवर की आबादी दस हजार से अधिक है। गर्मियों में जलस्तर गिरने पर यहां लोगोें को दूर- दूर से पानी लाना पड़ता है। बराठा बेसिन से जलापूर्ति मिलने पर लोगों की समस्या दूर हो जाएगी।
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बराठा बेसिन पेयजल योजना से गर्मियों में कोछाभांवर क्षेत्र को ही पानी मिल सकेगा। इसके बाद ही जल संकटग्रस्त मेडिकल क्षेत्र की तरफ पानी आगे बढ़ाया जाएगा। इस काम में चार से पांच महीने का वक्त लगने की उम्मीद है। हालांकि, पानी की मात्रा बढ़ाने के लिए बराठा में दो और ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं।
पेयजल महायोजना के अंतर्गत माताटीला से झांसी तक नई पाइपलाइन से पानी लाने में कम से कम तीन से चार साल लग जाएंगे। चूंकि, गर्मियों में मेडिकल कॉलेज के आसपास क्षेत्र में स्थित गुमनावारा, शिवाजी नगर, वीरांगना नगर, करगुवां, पिछोर, महाराणा प्रताप नगर, डॉक्टर्स, वकील कॉलोनी, कैमासन नगर, कोछाभांवर आदि में भीषण जलसंकट रहता है। इन क्षेत्रों में न तो कोई सरकारी पाइप लाइन है और न कोई दूसरा इंतजाम। अधिकांश घरों की बोरिंग सूख चुकी हैं। हैंडपंप भी अधिक देर तक चलाने पर पानी उगलना बंद कर देते हैं। जलसंस्थान के टैंकरों के भरोसे लोग एक- एक दिन काटने को मजबूर रहते हैं।
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उक्त क्षेत्रों को गर्मियों तक पानी मिल सके, इसके लिए जलनिगम महायोजना के बजट से ही बंद पड़ी बराठा बेसिन पेयजल योजना को चालू कर रहा है। 2800 मीटर क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को बदल लिया गया है। इस योजना के तहत बड़ागांव क्षेत्र के बराठा के नजदीक लगे छह ट्यूबवेलों की मदद से करीब छह एमएलडी (साठ लाख लीटर) पानी प्रतिदिन मिल सकेगा। अतिरिक्त पानी के लिए नजदीक ही दो नए ट्यूबवेल भी लगाए जा रहे हैं।
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मगर, जलनिगम ने तय किया है कि वह अप्रैल तक बराठा बेसिन से पहले कोछाभांवर को पानी देगा। कोछाभांवर में तैयार हो रहे स्वच्छ जलाशय (सीडब्लूआर) में पानी भरने के बाद संबंधित क्षेत्र को जलापूर्ति की जाएगी। इसके बाद मेडिकल क्षेत्र के करगुवां, गुमनावारा, वीरांगना नगर, महाराणा प्रताप नगर और आसपास के क्षेत्रों में पाइप लाइन डालकर पानी को आगे बढ़ाया जाएगा। इस काम में तीन से चार महीने का वक्त लगने की उम्मीद है। ऐसे में मेडिकल क्षेत्र और आसपास के इलाकों के लोगों को इस बार भी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
‘बराठा बेसिन पेयजल योजना से अप्रैल तक कोछाभांवर को पानी मिलने लगेगा। मेडिकल क्षेत्र के लिए सखी के हनुमान के पास सीडब्लूआर बनाया जा रहा है। पाइप लाइन डाली जाएगी। जून के आखिर तक मेडिकल क्षेत्र में जलापूर्ति देने की तैयारी की जा रही है।’
अमित कुमार, अधिशासी अभियंता।
वर्ष 1999 में तैयार की गई थी बराठा योजना
महानगर के मेडिकल कॉलेज क्षेत्र से जुड़े क्षेत्रों की पेयजल समस्या को हल करने के लिए वर्ष 1999 में बराठा बेसिन पेयजल योजना शुरू की गई थी। योजना के अंतर्गत पाइप लाइन डल ही पाई थी कि फोरलेन निर्माण के दौरान यह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने अप्रैल 2008 में इसे पूरा कराने की बात कही। इसके तहत सात किलोमीटर पाइप लाइन बदलने का काम अगस्त 2009 में पूरा होना था, लेकिन जल निगम को कार्य पूरा कराने में दो साल से अधिक का समय लग गया। इसके लिए एनएचएआई ने जल निगम को समय से दो करोड़ अड़सठ लाख रुपये उपलब्ध करा दिए थे। कार्य पूरा होने के बाद जल निगम ने मई 2011 में टेस्टिंग की। योजना शुरू हो पाती कि कानपुर रोड पर ट्यूबवेल स्थल से बड़ागांव तक पड़ी पुरानी साढ़े तीन किलोमीटर पाइप लाइन में लीकेज हो गए। इसके बाद योजना को चालू करने का कोई कदम नहीं उठाया गया।
10 हजार आबादी को मिलेगी राहत
कोछाभांवर की आबादी दस हजार से अधिक है। गर्मियों में जलस्तर गिरने पर यहां लोगोें को दूर- दूर से पानी लाना पड़ता है। बराठा बेसिन से जलापूर्ति मिलने पर लोगों की समस्या दूर हो जाएगी।