{"_id":"5cfad118bdec22078d330f48","slug":"15599413935-jhansi-news49","type":"story","status":"publish","title_hn":"रंगमंच पर अदाकारी के सीख रहे गुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रंगमंच पर अदाकारी के सीख रहे गुर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रंगमंच पर अदाकारी के सीख रहे गुर
झांसी। आईटीआई बुंदेलखंड नाट्य कला केंद्र में रंगमंच प्रेमियों को प्रशिक्षण देने के लिए दस दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ, जिसमें प्रशिक्षुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पहले दिन प्रशिक्षण लेने आने वालों को रंगमंच का महत्व और उस पर प्रदर्शन करने का तरीका बताया।
ग्रीष्मकालीन फिल्म एक्टिंग और नाट्य कार्यशाला में डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने पहले दिन प्रशिक्षण लेने पहुंचे 25 से अधिक नवोदित कलाकारों को सर्वप्रथम वॉइस एक्सरसाइज और एकाग्रता के लिए व्यायाम कराया। इसके बाद शब्दों को किस प्रकार से इस्तेमाल करना है, उसकी जानकारी उन्हें दी गई।
मध्यांतर सत्र में सभी को नाटकों का रिहर्सल कराया गया, जिसमें बारी-बारी से प्रशिक्षुओं ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया। पीएचडी व एमपीए प्रफुल्ल दास ने रंगमंच पर अदाकारी के गुर सिखाए। उन्होंने बताया कि रंगमंच पर अभिनय करते समय कलाकार को रोल के आधार पर खुद को ढालना बेहद जरूरी और यही अच्छे कलाकार की पहचान है। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षुओं को बॉडी मूवमेंट का भी प्रशिक्षण दिया और फिजिकल एक्सरसाइज कराई। कार्यशाला में संयोजक महेंद्र वर्मा, आकाश, शिवानी, निकिता, वेदिका, राघवेंद्र, योगेश, सौरभ उपस्थित रहे।
विज्ञापन
बुंदेलखंड में प्रतिभाएं छुपी हुईं हैं। यह प्रशिक्षण देने के पहले दिन समझ आ गया। बस, जरूरत है तो अच्छे मंच की। - प्रफुल्ल दास, कलाकार
अदाकारी का शौक है। इसलिए गर्मियों में खुद को और निखारने के लिए ग्रीष्मकालीन कैंप में हिस्सा ले रही हूं। - शिखा सिंह, प्रशिक्षु
लगातार प्रशिक्षण लेने से अदाकारी में निखार आता है। इसलिए, रंगमंच के कलाकारों को लगातार अभ्यास करना चाहिए। - मयंक, प्रशिक्षु
मंच पर प्रशिक्षण लेने से दूसरों से काफी कुछ सीखने को मिलता है। इसलिए, इस प्रकार के कैंप में अक्सर हिस्सा लेता हूं। - तरुण, प्रशिक्षु
विज्ञापन
झांसी। आईटीआई बुंदेलखंड नाट्य कला केंद्र में रंगमंच प्रेमियों को प्रशिक्षण देने के लिए दस दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ, जिसमें प्रशिक्षुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पहले दिन प्रशिक्षण लेने आने वालों को रंगमंच का महत्व और उस पर प्रदर्शन करने का तरीका बताया।
ग्रीष्मकालीन फिल्म एक्टिंग और नाट्य कार्यशाला में डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने पहले दिन प्रशिक्षण लेने पहुंचे 25 से अधिक नवोदित कलाकारों को सर्वप्रथम वॉइस एक्सरसाइज और एकाग्रता के लिए व्यायाम कराया। इसके बाद शब्दों को किस प्रकार से इस्तेमाल करना है, उसकी जानकारी उन्हें दी गई।
विज्ञापन
मध्यांतर सत्र में सभी को नाटकों का रिहर्सल कराया गया, जिसमें बारी-बारी से प्रशिक्षुओं ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया। पीएचडी व एमपीए प्रफुल्ल दास ने रंगमंच पर अदाकारी के गुर सिखाए। उन्होंने बताया कि रंगमंच पर अभिनय करते समय कलाकार को रोल के आधार पर खुद को ढालना बेहद जरूरी और यही अच्छे कलाकार की पहचान है। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षुओं को बॉडी मूवमेंट का भी प्रशिक्षण दिया और फिजिकल एक्सरसाइज कराई। कार्यशाला में संयोजक महेंद्र वर्मा, आकाश, शिवानी, निकिता, वेदिका, राघवेंद्र, योगेश, सौरभ उपस्थित रहे।
विज्ञापन
बुंदेलखंड में प्रतिभाएं छुपी हुईं हैं। यह प्रशिक्षण देने के पहले दिन समझ आ गया। बस, जरूरत है तो अच्छे मंच की। - प्रफुल्ल दास, कलाकार
अदाकारी का शौक है। इसलिए गर्मियों में खुद को और निखारने के लिए ग्रीष्मकालीन कैंप में हिस्सा ले रही हूं। - शिखा सिंह, प्रशिक्षु
लगातार प्रशिक्षण लेने से अदाकारी में निखार आता है। इसलिए, रंगमंच के कलाकारों को लगातार अभ्यास करना चाहिए। - मयंक, प्रशिक्षु
मंच पर प्रशिक्षण लेने से दूसरों से काफी कुछ सीखने को मिलता है। इसलिए, इस प्रकार के कैंप में अक्सर हिस्सा लेता हूं। - तरुण, प्रशिक्षु