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उमा भारती ने इस्तीफे के पेशकश से किनारा काटा,,-City
Updated Fri, 01 Sep 2017 08:44 PM IST
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उमा ने इस्तीफे की पेशकश से किया किनारा
केन-बेतवा पर दिए बयान से भी पलटी केंद्रीय जल संसाधन मंत्री
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले इस्तीफे के पेशकश की बात से शुक्रवार को उमा भारती ने किनारा कर लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कुछ भी कहने के लिए सिर्फ अमित शाह अधिकृत हैं। वे केन-बेतवा नदी गठजोड़ पर दिए बयान से भी पलट गईं और उन्होंने मीडिया से कहा कि भाई-बहन के रिश्ते में क्यों दरार डालना चाहते हो? यह बात शुक्रवार को उन्होंने बाहर लक्ष्मी गेट स्थित मां काली मंदिर के दर्शन के बाद पत्रकारों से कहीं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले इस्तीफे की पेशकश का सवाल उनसे कई बार पूछा गया। उनसे से यह भी कहा कि गया कि केंद्रीय नेतृत्व के क्या उनके कार्य से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन वे हर सवाल पर किनारा काटती रही। उन्होेंने कहा कि यह सवाल उनको सुनाई नहीं दे रहे हैं। मैंने कुछ सुना ही नहीं। इतना ही नहीं बृहस्पतिवार को केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हो रहे पानी बंटवारे के विवाद के सवाल पर उनका कहना था कि मैं अगर इस मामले में अब बोलूंगी तो विवादों को जन्म देना होगा। अब इसपर शिवराज सिंह चौहान ही जवाब देंगे। इस बयान से वे शुक्रवार को पलट गई। उन्होंने मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र में हुए विकास की तारीफ करते हुए कहा कि शिवराज जो निर्णय लेंगे, अच्छा लेंगे। मीडिया भाई-बहन के रिश्ते में दरार डालने की कोशिश न करें।
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उमा ने इस्तीफे की पेशकश से किया किनारा
केन-बेतवा पर दिए बयान से भी पलटी केंद्रीय जल संसाधन मंत्री
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले इस्तीफे के पेशकश की बात से शुक्रवार को उमा भारती ने किनारा कर लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कुछ भी कहने के लिए सिर्फ अमित शाह अधिकृत हैं। वे केन-बेतवा नदी गठजोड़ पर दिए बयान से भी पलट गईं और उन्होंने मीडिया से कहा कि भाई-बहन के रिश्ते में क्यों दरार डालना चाहते हो? यह बात शुक्रवार को उन्होंने बाहर लक्ष्मी गेट स्थित मां काली मंदिर के दर्शन के बाद पत्रकारों से कहीं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले इस्तीफे की पेशकश का सवाल उनसे कई बार पूछा गया। उनसे से यह भी कहा कि गया कि केंद्रीय नेतृत्व के क्या उनके कार्य से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन वे हर सवाल पर किनारा काटती रही। उन्होेंने कहा कि यह सवाल उनको सुनाई नहीं दे रहे हैं। मैंने कुछ सुना ही नहीं। इतना ही नहीं बृहस्पतिवार को केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हो रहे पानी बंटवारे के विवाद के सवाल पर उनका कहना था कि मैं अगर इस मामले में अब बोलूंगी तो विवादों को जन्म देना होगा। अब इसपर शिवराज सिंह चौहान ही जवाब देंगे। इस बयान से वे शुक्रवार को पलट गई। उन्होंने मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र में हुए विकास की तारीफ करते हुए कहा कि शिवराज जो निर्णय लेंगे, अच्छा लेंगे। मीडिया भाई-बहन के रिश्ते में दरार डालने की कोशिश न करें।
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