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सिविक एमीनिटीज- सर्वे पूरा, 85 मकान बिना रजिस्ट्री के-City
Updated Thu, 10 Aug 2017 07:33 PM IST
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सिविक एमीनिटीज
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न रजिस्ट्री न नक्शा पास, ये कैसा इलाका पॉश
सब हेड: नगर निगम के सर्वे में सामने आया 82 मकानों का सच
क्रासर
30 डिसमिल जमीन पर कटे हैं प्लाट, पुराने स्टेट बैंक के आसपास की जमीन पर संशय
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
शहर के बीचोंबीच नंदनी टॉकीज के पीछे पॉश इलाके में 15 हजार वर्ग फुट जमीन पर 82 मकान बिना रजिस्ट्री और नक्शा पास कराए बने हैं। बृहस्पतिवार को नगर निगम द्वारा की गई नापजोख में यह सज सामने आया। अब इन पर संकट मंडरा रहा है। हालांकि पुराने स्टेट बैंक के आसपास की जमीन पर संशय अभी भी बरकरार है।
इलाइट चौराहा से आगे गोविंद चौराहा मार्ग पर रामराजा मार्केट के पीछे सिविल लाइन में जमीन नंबर 213 में 12 एकड़ जमीन है। इसमें 09 एकड़ जमीन प्राइवेट है और 03 एकड़ पर नगर निगम का दावा है। यह जमीन रामराजा मार्केट के पीछे से पुराने स्टेट बैंक के आसपास की है। जमीन का सर्वे कर लिया गया है। यहां पर 82 ऐसे मकान बने हैं, जिनके पास जमीन की न तो कोई रजिस्ट्री है और न हो कोई ऐसा दस्तावेज है, जिससे साबित हो सके कि यह उनकी संपत्ति है। इसमें भी कई मकान ऐसे हैं, जो एक से दूसरे, फिर तीसरे को बेच दिए गए। नियमानुसार यदि कोई जमीन बेची जाती है तो उसका रजिस्टर्ड बैनामा होता है। लेकिन, यहां पर जो जमीन बेची गई उसका कोई पुख्ता रिकार्ड नहीं है। कोई दस रुपये के स्टांप पर बेच नामा लिखाए हुए है तो कोई पचास रुपये के स्टांप पर। इसी जमीन के 30 डिसिमल हिस्से पर प्लाटिंग है। इसमें लगभग 15 हजार वर्ग फुट जमीन है। प्लाटों की रजिस्ट्री नहीं है।
नगर निगम के संपत्ति विभाग के आनंद सिंह दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी नापजोख करते रहे। नापजोख पूरी हो गई है। अब अगले निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
मुकदमा खारिज
स्थानीय अदालत में जमीन संबंधी एक मामला खारिज कर दिया गया है। इससे नगर निगम को कार्रवाई करने में आसानी हो जाएगी।
पट्टे की जमीन का है मामला
वर्षों पहले नगर पालिका ने बाबूलाल अग्रवाल को जमीन पट्टे पर दी थी। नगर निगम का कहना है कि जमीन का रिन्यूवल नहीं किया, जिससे 2009 में पट्टा निरस्त हो गया था। वहीं, बाबूलाल अग्रवाल के परिजन विनय अग्रवाल का कहना है कि जिलाधिकारी कार्यालय में 36 रुपये सालाना लीज के हिसाब से पैसा जमा है और 2056 तक का पट्टा उनके पास है।
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न रजिस्ट्री न नक्शा पास, ये कैसा इलाका पॉश
सब हेड: नगर निगम के सर्वे में सामने आया 82 मकानों का सच
क्रासर
30 डिसमिल जमीन पर कटे हैं प्लाट, पुराने स्टेट बैंक के आसपास की जमीन पर संशय
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
शहर के बीचोंबीच नंदनी टॉकीज के पीछे पॉश इलाके में 15 हजार वर्ग फुट जमीन पर 82 मकान बिना रजिस्ट्री और नक्शा पास कराए बने हैं। बृहस्पतिवार को नगर निगम द्वारा की गई नापजोख में यह सज सामने आया। अब इन पर संकट मंडरा रहा है। हालांकि पुराने स्टेट बैंक के आसपास की जमीन पर संशय अभी भी बरकरार है।
इलाइट चौराहा से आगे गोविंद चौराहा मार्ग पर रामराजा मार्केट के पीछे सिविल लाइन में जमीन नंबर 213 में 12 एकड़ जमीन है। इसमें 09 एकड़ जमीन प्राइवेट है और 03 एकड़ पर नगर निगम का दावा है। यह जमीन रामराजा मार्केट के पीछे से पुराने स्टेट बैंक के आसपास की है। जमीन का सर्वे कर लिया गया है। यहां पर 82 ऐसे मकान बने हैं, जिनके पास जमीन की न तो कोई रजिस्ट्री है और न हो कोई ऐसा दस्तावेज है, जिससे साबित हो सके कि यह उनकी संपत्ति है। इसमें भी कई मकान ऐसे हैं, जो एक से दूसरे, फिर तीसरे को बेच दिए गए। नियमानुसार यदि कोई जमीन बेची जाती है तो उसका रजिस्टर्ड बैनामा होता है। लेकिन, यहां पर जो जमीन बेची गई उसका कोई पुख्ता रिकार्ड नहीं है। कोई दस रुपये के स्टांप पर बेच नामा लिखाए हुए है तो कोई पचास रुपये के स्टांप पर। इसी जमीन के 30 डिसिमल हिस्से पर प्लाटिंग है। इसमें लगभग 15 हजार वर्ग फुट जमीन है। प्लाटों की रजिस्ट्री नहीं है।
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नगर निगम के संपत्ति विभाग के आनंद सिंह दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी नापजोख करते रहे। नापजोख पूरी हो गई है। अब अगले निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
मुकदमा खारिज
स्थानीय अदालत में जमीन संबंधी एक मामला खारिज कर दिया गया है। इससे नगर निगम को कार्रवाई करने में आसानी हो जाएगी।
पट्टे की जमीन का है मामला
वर्षों पहले नगर पालिका ने बाबूलाल अग्रवाल को जमीन पट्टे पर दी थी। नगर निगम का कहना है कि जमीन का रिन्यूवल नहीं किया, जिससे 2009 में पट्टा निरस्त हो गया था। वहीं, बाबूलाल अग्रवाल के परिजन विनय अग्रवाल का कहना है कि जिलाधिकारी कार्यालय में 36 रुपये सालाना लीज के हिसाब से पैसा जमा है और 2056 तक का पट्टा उनके पास है।
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