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मंडल के डाकघरों में 81 की जगह सिर्फ 15 डाकिये ही बांट रहे डाक
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झांसी। मंडल के डाकघरों में लगभग दो साल से डाकियों की कमी है। विभाग में सृजित पद 81 के सापेक्ष सिर्फ 15 डाकिये ही काम कर रहे हैं। जिसका सीधा असर डाक सेवाओं पर पड़ रहा है। आलम यह है कि तीन दिन में डिलीवर होने वाली डाक सात से आठ दिन में डिलीवर हो रही है।
मंडल के झांसी, ललितपुर व जालौन में तीन प्रधान डाकघर व 75 उप डाकघर सहित कुल 78 डाकघर हैं। पत्रों, पार्सलों व मनीआर्डर को लोगों के घरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डाकियों के कंधों पर ही है। वहीं, इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक का कार्य भी डाकियों के द्वारा ही किया जा रहा है। लेकिन दो साल से मंडल के डाकघरों में डाकियों की कमी है। जिसके चलते डाक व पार्सल वितरण कार्य में देरी हो रही है। जिसका खमियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आलम यह है कि मंडल के डाकघरों में सृजित पद 81 हैं जबकि सिर्फ 15 डाकियों से ही काम कराया जा रहा है। ऐसे में मौजूद डाकियों के ऊपर कार्यभार भी काफी अधिक हो गया है।
इस संबंध में प्रवर डाक अधीक्षक जितेंद्र सिंह ने बताया कि विभाग में दो साल से डाकियों की कमी है। कई डाकिये सेवानिवृत हो चुके हैं और कई डाकिये बाबू का इम्तिहान पास कर विभाग में ही र्क्लक बन गए हैं। ग्रामीण इलाकों में डाक सेवकों से डाकियों का काम कराया जा रहा है।
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मंडल के झांसी, ललितपुर व जालौन में तीन प्रधान डाकघर व 75 उप डाकघर सहित कुल 78 डाकघर हैं। पत्रों, पार्सलों व मनीआर्डर को लोगों के घरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डाकियों के कंधों पर ही है। वहीं, इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक का कार्य भी डाकियों के द्वारा ही किया जा रहा है। लेकिन दो साल से मंडल के डाकघरों में डाकियों की कमी है। जिसके चलते डाक व पार्सल वितरण कार्य में देरी हो रही है। जिसका खमियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आलम यह है कि मंडल के डाकघरों में सृजित पद 81 हैं जबकि सिर्फ 15 डाकियों से ही काम कराया जा रहा है। ऐसे में मौजूद डाकियों के ऊपर कार्यभार भी काफी अधिक हो गया है।
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इस संबंध में प्रवर डाक अधीक्षक जितेंद्र सिंह ने बताया कि विभाग में दो साल से डाकियों की कमी है। कई डाकिये सेवानिवृत हो चुके हैं और कई डाकिये बाबू का इम्तिहान पास कर विभाग में ही र्क्लक बन गए हैं। ग्रामीण इलाकों में डाक सेवकों से डाकियों का काम कराया जा रहा है।
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