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15 घंटे बिजली, बाकी ‘पावर कट’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:57 AM IST
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electric problm, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। प्रदेश में आंधी - तूफान से टावर क्या गिरे? बिजली होने के बाद भी ‘करंट’ मिलना मुश्किल हो गया है। ओवर लोडिंग के कारण ग्रिड में फ्रीक्वेंसी डाउन होने की स्थिति बनी हुई है। इससे लोगों को अघोषित कटौती का सामना करना पड़ रहा है। पनकी कंट्रोल के आदेश पर महानगर में 24 घंटे के अंतराल में सात घंटे की कटौती की गई। जबकि, स्थानीय स्तर पर ओवर लोडिंग व फाल्ट से हर सब स्टेशन पर दो से तीन घंटे की अतिरिक्त बिजली काटी गई, इससे लोगों का बुरा हाल रहा।
पिछले दिनों प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर आई आंधी से ग्रिड लाइन के टावर टूट गए थे। इनमें प्रमुख रूप से लखनऊ, सरोजनी नगर से मलेसेमऊ, रायबरेली व मोहनलाल गंज के जैतीपुर में ट्रांसमिशन लाइनें व कई जगह टावर टूटे पड़े हैं। टावरों के टूटने से संबंधित क्षेत्रों में ग्रिड लाइन से करंट आगे बढ़ना बंद हो गया है। सभी जगह युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य जारी है, पर दस जून से पहले काम पूरा होने की उम्मीद कम ही लग रही है।
इधर, ग्रिड में ‘करंट’ दौड़ाने के लिए जगह न होने के कारण यूपी पावर कारपोरेशन ने पारीछा, ओबरा आदि प्लांटों की कई इकाइयों का उत्पादन बंद कर रखा है।
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अब बंद इकाइयों का असर प्रदेश की विद्युत आपूर्ति पर पड़ने लगा है। प्रदेश में बढ़ी बिजली की मांग के कारण ग्रिड की फ्रीक्वेंसी डाउन हो रही है। इस कारण ग्रिड को फेल होने से बचाने के लिए हर जनपद में मुख्यालय के आदेश पर विद्युत कटौती की जा रही है।
झांसी महानगर में मंगलवार की रात बारह बजे से बुधवार की रात बारह बजे के बीच सात घंटे की कटौती मुख्यालय के आदेश पर की गई, जबकि स्थानीय स्तर पर दो घंटे की अतिरिक्त कटौती की गई। कटौती के कारण लोगों के इनवर्टरों ने भी जवाब दे दिया है। इस कारण लोगों का बिना बिजली के पल- पल काटना मुश्किल हो रहा है।
‘मुख्यालय (पनकी कंट्रोल) के आदेश पर बार- बार कटौती की जा रही है। स्थिति को सामान्य होने में कम से कम एक सप्ताह का समय लग जाएगा।’
राकेश कुमार गुप्ता
अधीक्षण अभियंता (नगर)
इस तरह काटी गई बिजली
पनकी कंट्रोल के आदेश पर महानगर में मंगलवार की रात एक बजे से सुबह चार बजे तक, सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक व दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक कटौती की गई। शाम छह बजे से रात बारह बजे तक स्थानीय स्तर पर दो घंटे की अतिरिक्त कटौती की गई।
रात में चालू हुईं पारीछा की बंद इकाइयां
बुधवार की रात को पारीछा थर्मल पावर की बंद पांचों इकाइयों से उत्पादन शुरू कर दिया गया।
ग्रिड लाइनों के टावर गिरने के बाद से कारपोरेशन ने कई थर्मल पावर प्लांटों पर उत्पादन बंद करा रखा है। इनमें पारीछा थर्मल पावर प्लांट भी शामिल है। प्लांट में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित हैं। इनमें 210 मेगावाट की नंबर चार इकाई को छोड़कर बाकी पांच इकाइयों की मशीनें शनिवार सेे बंद (थर्मल ब्रेकिंग) चल रही थीं।
फ्रीक्वेंसी का यह है मानक
ग्रिड में दौड़ने वाली करंट की फ्रीक्वेंसी 50 हर्ट्स रहती है। ओवर लोडिंग के कारण वर्तमान में फ्रीक्वेंसी 49 हर्ट्स पर पहुंच गई है। अगर फ्रीक्वेंसी साढ़े 47 हर्ट्स पर पहुंच जाए तो ग्रिड फेल हो जाएगी। जुलाई 2012 में ऐसी स्थिति बनने पर ग्रिड फेल हो गई थी। इससे पूरे प्रदेश में ब्लैक आउट हो गया था।
एक समय हो रही जलापूर्ति
विद्युत कटौती का प्रभाव शहर की जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है। पानी की एक टंकी को भरने में सात से आठ घंटे का समय लगता है। पर, लगातार बिजली न मिलने के कारण पानी की टंकी समय पर नहीं भर पा रही है। इस कारण नगर के तेरह स्थानों पर स्थित पानी की टंकियों से एक समय ही जलापूर्ति हो पा रही है। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों के हालात और भी खराब
जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों का और भी बुरा हाल है। अधिकांश क्षेत्रों में 24 में से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इसका सीधा असर लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है।
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पिछले दिनों प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर आई आंधी से ग्रिड लाइन के टावर टूट गए थे। इनमें प्रमुख रूप से लखनऊ, सरोजनी नगर से मलेसेमऊ, रायबरेली व मोहनलाल गंज के जैतीपुर में ट्रांसमिशन लाइनें व कई जगह टावर टूटे पड़े हैं। टावरों के टूटने से संबंधित क्षेत्रों में ग्रिड लाइन से करंट आगे बढ़ना बंद हो गया है। सभी जगह युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य जारी है, पर दस जून से पहले काम पूरा होने की उम्मीद कम ही लग रही है।
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इधर, ग्रिड में ‘करंट’ दौड़ाने के लिए जगह न होने के कारण यूपी पावर कारपोरेशन ने पारीछा, ओबरा आदि प्लांटों की कई इकाइयों का उत्पादन बंद कर रखा है।
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अब बंद इकाइयों का असर प्रदेश की विद्युत आपूर्ति पर पड़ने लगा है। प्रदेश में बढ़ी बिजली की मांग के कारण ग्रिड की फ्रीक्वेंसी डाउन हो रही है। इस कारण ग्रिड को फेल होने से बचाने के लिए हर जनपद में मुख्यालय के आदेश पर विद्युत कटौती की जा रही है।
झांसी महानगर में मंगलवार की रात बारह बजे से बुधवार की रात बारह बजे के बीच सात घंटे की कटौती मुख्यालय के आदेश पर की गई, जबकि स्थानीय स्तर पर दो घंटे की अतिरिक्त कटौती की गई। कटौती के कारण लोगों के इनवर्टरों ने भी जवाब दे दिया है। इस कारण लोगों का बिना बिजली के पल- पल काटना मुश्किल हो रहा है।
‘मुख्यालय (पनकी कंट्रोल) के आदेश पर बार- बार कटौती की जा रही है। स्थिति को सामान्य होने में कम से कम एक सप्ताह का समय लग जाएगा।’
राकेश कुमार गुप्ता
अधीक्षण अभियंता (नगर)
इस तरह काटी गई बिजली
पनकी कंट्रोल के आदेश पर महानगर में मंगलवार की रात एक बजे से सुबह चार बजे तक, सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक व दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक कटौती की गई। शाम छह बजे से रात बारह बजे तक स्थानीय स्तर पर दो घंटे की अतिरिक्त कटौती की गई।
रात में चालू हुईं पारीछा की बंद इकाइयां
बुधवार की रात को पारीछा थर्मल पावर की बंद पांचों इकाइयों से उत्पादन शुरू कर दिया गया।
ग्रिड लाइनों के टावर गिरने के बाद से कारपोरेशन ने कई थर्मल पावर प्लांटों पर उत्पादन बंद करा रखा है। इनमें पारीछा थर्मल पावर प्लांट भी शामिल है। प्लांट में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित हैं। इनमें 210 मेगावाट की नंबर चार इकाई को छोड़कर बाकी पांच इकाइयों की मशीनें शनिवार सेे बंद (थर्मल ब्रेकिंग) चल रही थीं।
फ्रीक्वेंसी का यह है मानक
ग्रिड में दौड़ने वाली करंट की फ्रीक्वेंसी 50 हर्ट्स रहती है। ओवर लोडिंग के कारण वर्तमान में फ्रीक्वेंसी 49 हर्ट्स पर पहुंच गई है। अगर फ्रीक्वेंसी साढ़े 47 हर्ट्स पर पहुंच जाए तो ग्रिड फेल हो जाएगी। जुलाई 2012 में ऐसी स्थिति बनने पर ग्रिड फेल हो गई थी। इससे पूरे प्रदेश में ब्लैक आउट हो गया था।
एक समय हो रही जलापूर्ति
विद्युत कटौती का प्रभाव शहर की जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है। पानी की एक टंकी को भरने में सात से आठ घंटे का समय लगता है। पर, लगातार बिजली न मिलने के कारण पानी की टंकी समय पर नहीं भर पा रही है। इस कारण नगर के तेरह स्थानों पर स्थित पानी की टंकियों से एक समय ही जलापूर्ति हो पा रही है। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों के हालात और भी खराब
जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों का और भी बुरा हाल है। अधिकांश क्षेत्रों में 24 में से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इसका सीधा असर लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है।