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Jhansi News: आठ लाख चालानों से 14 करोड़ की कमाई, स्मार्ट सिटी ने मांगा आधा हिस्सा

Sun, 04 Oct 2026 01:53 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2026 01:53 AM IST
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14 crore earned from 8 lakh challans; Smart City seeks half the share.
झांसी। यातायात नियमों के उल्लंघन पर शहर में किए जा रहे ऑनलाइन चालानों से पुलिस विभाग को अब तक करीब 14 करोड़ रुपये राजस्व मिल चुका है। स्मार्ट सिटी की ओर से बनाए गए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) की मदद से चार साल में करीब आठ लाख चालान किए गए हैं। अब स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इन चालानों से मिलने वाले राजस्व में आधा हिस्सा मांगा है। स्मार्ट सिटी का तर्क है कि आईसीसीसी के संचालन और रखरखाव पर हर साल करीब छह करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
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वर्ष 2022 में तैयार हुए आईसीसीसी में शहर के प्रमुख स्थानों पर लगे कैमरों और सेंसर की मदद से यातायात व्यवस्था पर नजर रखी जाती है। तेज रफ्तार, लालबत्ती पार करने समेत यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान करने में भी इनका इस्तेमाल होता है। इसके आधार पर ऑनलाइन चालान किए जाते हैं।
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192 करोड़ से बना, पांच साल के रखरखाव का भी अनुबंध
आईसीसीसी के निर्माण और पांच साल तक रखरखाव के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने करीब 192 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यहां सीसीटीवी कैमरों के अलावा रेड लाइट और स्पीड उल्लंघन पकड़ने की व्यवस्था, ट्रैफिक सिग्नल, सार्वजनिक सूचना प्रणाली और पर्यावरण की निगरानी करने वाले सेंसर लगाए गए हैं। स्मार्ट सिटी के अनुसार, यातायात पुलिस ने आईसीसीसी की मदद से अब तक करीब आठ लाख चालान किए हैं। इनसे अगस्त तक करीब 14 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ है।
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मध्य प्रदेश और गुजरात का दिया उदाहरण
स्मार्ट सिटी के सीईओ अन्ना सुदन ने एसएसपी को लिखे पत्र में राजस्व में हिस्सेदारी देने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि मध्य प्रदेश और गुजरात में आईसीसीसी की मदद से पुलिस विभाग द्वारा किए गए चालानों से प्राप्त राजस्व में स्मार्ट सिटी को भी हिस्सा दिया जा रहा है। स्मार्ट सिटी ने इसी आधार पर झांसी में भी चालान से मिलने वाले राजस्व में आधी हिस्सेदारी देने का अनुरोध किया है।

अनुबंध खत्म, तीन महीने का मिला विस्तार
आईसीसीसी के संचालन और रखरखाव का मौजूदा अनुबंध जून 2026 में समाप्त हो गया था। इसके बाद सितंबर तक तीन महीने का विस्तार दिया गया। स्मार्ट सिटी का कहना है कि आगे आईसीसीसी के संचालन और रखरखाव के लिए स्मार्ट सिटी मिशन और शासन से अब तक राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। उसके पास इसके खर्च का वहन करने के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है।

आईसीसीसी के संचालन और रखरखाव के लिए मौजूदा समय में करीब छह करोड़ रुपये सालाना दिए जा रहे हैं। नई निविदा में 14 करोड़ रुपये को अनुमानित लागत मानकर प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव है।


आईसीसीसी में ये हैं सुविधाएं
...................................
- 100 सीसीटीवी कैमरों की स्थापना
- छह स्थानों पर स्मार्ट ट्रैफिक सेंसर सिस्टम
- 11 स्थानों पर एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम
- आठ-आठ स्थानों पर स्पीड और रेड लाइट वायलेशन सिस्टम
- 13-13 स्थानों पर एएनपीआर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, इमरजेंसी कॉल बॉक्स सिस्टम
- 17 स्थानों पर फ्री वाई-फाई सिस्टम
- 10 स्थानों पर वेरिएबल मैसेज डिस्प्ले सिस्टम
- पांच स्थानों पर एनवायरमेंट सेंसर सिस्टम
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