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जातियों की जकड़न से गायब हैं मुद्दे

Wed, 17 Apr 2019 08:23 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Apr 2019 08:23 PM IST
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जातियों की जकड़न से गायब हैं मुद्दे
जातियों की जकड़न से गायब हैं मुद्दे
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झांसी। झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट पर इस बार प्रमुख दलों से सभी नए प्रत्याशी हैं। भाजपा से अनुराग शर्मा मैदान में हैं, जबकि सपा-बसपा गठबंधन ने पहली बार श्याम सुंदर सिंह यादव पर दांव लगाया गया। कांग्रेस ने शिवचरण कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर चुनावी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जनता से जुड़े मुद्दे गायब हो गए हैं। चुनाव जातिगत आंकड़ों पर केंद्रित होकर रह गया है। किस जाति का वोट किसे मिलने वाला है? यह नुक्कड़ और चौराहों पर चर्चा का विषय है।

झांसी लोकसभा सीट से 11 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें समाजवादी पार्टी से श्यामसुंदर सिंह, भारतीय जनता पार्टी से अनुराग शर्मा, इंडियन नेशनल कांग्रेस से शिवशरण कुशवाहा, किसान रक्षा पार्टी से गौरीशंकर बिदुआ, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से जगत विक्रम सिंह, स्वतंत्र जनता पार्टी से दिलशाद अहमद सिद्दीकी, बुंदेलखंड क्रांति दल से श्रुति अग्रवाल, निर्दलीय कल्पना खर्द, राजा खटीक, रामगोपाल और सुनील प्रजापति शामिल हैं। हालांकि, मुख्य मुकाबला भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन व कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच नजर आ रहा है।
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मुख्य मुकाबले में प्रमुख प्रत्याशी एक दूसरे के वोट बैंक में सेंधमारी करते दिख रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया के पहले चुनाव में क्षेत्र से जुड़े मुद्दे हावी थे। नेता व उनके समर्थक लोगों की समस्याओं को लेकर मुखर थे लेकिन अब चुनावी परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जाति और धर्म की आबादी के आंकड़ों को आगे रखकर जीत-हार के कयास लगाए जा रहे हैं। नेता इसी आधार पर थोक वोट की आशा लगाए हैं। वह भी जाति और धर्मोें के चौधरियों को साधने में जुटे हैं।
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प्रमुख मुद्दे
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- हाइवे पर अन्ना जानवरों की समस्या।
- पानी को लेकर मचने वाली त्राहि-त्राहि।
- प्रमुख बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था।
- अधूरे पड़े ओवरब्रिज के निर्माण।
- सरकारी स्कूलों की जर्जर भवन।
- अंग्रेजी विद्यालयों की अनियंत्रित फीस।
- कुओं व बावड़ियों पर दबंगों के कब्जे।
- प्रमुख बाजारों में जाम की समस्या।
- बरसात में कई इलाकों में जलभराव की समस्या।
- ऐतिहासिक धरोहरों का रखरखाव।
- पर्यटन को बढ़ावा न मिलना।
- ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक और कर्मचारियों की कमी।
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