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रेलवे क्वार्टर आवंटन का नियम बदला,,-Lalitpur
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रेलवे का घर पाने के लिए नहीं करना होगा इंतजार
झांसी। रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों के आवास नीति आवंटन नियम में बदलाव कर दिया है। अब तीन माह से अधिक खाली रहने वाले आवासों के लिए एक सामान्य पूल बनाया जाएगा, जिस पूल (शाखा) में आवास के लिए आवेदन लंबित होगा, उस पूल के कर्मचारी को यह आवास मिल जाएगा। इससे स्थानांतरित होकर आने वाले कर्मचारियों को जबरन आवास नहीं लेना होगा और न ही उनका मकान भत्ता (एचआरए) बंद होगा।
झांसी रेलवे कालॉनी में 2300 से अधिक आवास बने हैं। इन सभी आवासों को 16 विभाग के कर्मचारियों को पूल में बांटा गया है। इनमें कई ऐसे पूल हैं, जिनमें एक भी आवास खाली नहीं हैं और कई पूल में खाली पड़े हैं। दरअसल, इन आवासों में न तो समुचित सफाई की जा रही है और न ही स्वच्छ जलापूर्ति हो पा रही है। अधिकांश क्वार्टरों के दरवाजे और खिड़कियां टूटी हैं। इससे रेलवे कर्मचारी आवास लेने से बचते हैं। अगर कोई कर्मचारी आवास खाली करता है और दूसरा उसमें कब्जा नहीं लेता है तो ऐसी स्थिति में कार्य निरीक्षक को आवास अपने कब्जे में लेना चाहिए, लेकिन वह भी ऐसा नहीं करते। इससे 200 से अधिक आवास खाली पड़े हैं।
इस कारण रेल प्रशासन ने नवंबर 2017 में दोनों यूनियनों की सहमति से नियम बना रखा है कि स्थानांतरित होकर आने वाले कर्मचारी को रेलवे आवास लेना ही होगा। अन्यथा उसका मकान भत्ता बंद कर दिया जाएगा। इस नियम के आधार पर 480 कर्मचारियों का एचआरए बंद कर दिया गया था। उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ के विरोध पर एक साल बाद उक्त कर्मचारियों को एचआरए मिल सका था।
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दूसरी तरफ जिन पूल में कर्मचारी आवास लेना चाहते हैं, लेकिन उनमें खाली नहीं है। इस समस्या को खत्म करने के लिए रेलवे बोर्ड ने सभी मंडलों को निर्देश जारी किए हैं कि वह तीन महीने से अधिक अवधि से खाली आवासों को एक सामान्य पूल में रखकर उनको मांग के हिसाब से बांट दिया जाए। ताकि कर्मचारियों को आवास लेने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ा।
यह भी है कारण
सातवें वेतन आयोग ने स्टेशन केटेगिरी के हिसाब से आठ, 16 और 24 फीसदी एचआरए (मकान भत्ता) कर दिया है।। इस हिसाब से अब कर्मचारियों को सरकारी आवास लेने पर दस हजार रुपये से ऊपर ही देना पड़ता है। इससे कम में उसे निजी आवास किराए पर मिल सकता है। इस कारण कर्मचारी आवास आवंटित होने के बाद वे उसमें कब्जा नहीं लेते हैं।
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झांसी। रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों के आवास नीति आवंटन नियम में बदलाव कर दिया है। अब तीन माह से अधिक खाली रहने वाले आवासों के लिए एक सामान्य पूल बनाया जाएगा, जिस पूल (शाखा) में आवास के लिए आवेदन लंबित होगा, उस पूल के कर्मचारी को यह आवास मिल जाएगा। इससे स्थानांतरित होकर आने वाले कर्मचारियों को जबरन आवास नहीं लेना होगा और न ही उनका मकान भत्ता (एचआरए) बंद होगा।
झांसी रेलवे कालॉनी में 2300 से अधिक आवास बने हैं। इन सभी आवासों को 16 विभाग के कर्मचारियों को पूल में बांटा गया है। इनमें कई ऐसे पूल हैं, जिनमें एक भी आवास खाली नहीं हैं और कई पूल में खाली पड़े हैं। दरअसल, इन आवासों में न तो समुचित सफाई की जा रही है और न ही स्वच्छ जलापूर्ति हो पा रही है। अधिकांश क्वार्टरों के दरवाजे और खिड़कियां टूटी हैं। इससे रेलवे कर्मचारी आवास लेने से बचते हैं। अगर कोई कर्मचारी आवास खाली करता है और दूसरा उसमें कब्जा नहीं लेता है तो ऐसी स्थिति में कार्य निरीक्षक को आवास अपने कब्जे में लेना चाहिए, लेकिन वह भी ऐसा नहीं करते। इससे 200 से अधिक आवास खाली पड़े हैं।
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इस कारण रेल प्रशासन ने नवंबर 2017 में दोनों यूनियनों की सहमति से नियम बना रखा है कि स्थानांतरित होकर आने वाले कर्मचारी को रेलवे आवास लेना ही होगा। अन्यथा उसका मकान भत्ता बंद कर दिया जाएगा। इस नियम के आधार पर 480 कर्मचारियों का एचआरए बंद कर दिया गया था। उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ के विरोध पर एक साल बाद उक्त कर्मचारियों को एचआरए मिल सका था।
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दूसरी तरफ जिन पूल में कर्मचारी आवास लेना चाहते हैं, लेकिन उनमें खाली नहीं है। इस समस्या को खत्म करने के लिए रेलवे बोर्ड ने सभी मंडलों को निर्देश जारी किए हैं कि वह तीन महीने से अधिक अवधि से खाली आवासों को एक सामान्य पूल में रखकर उनको मांग के हिसाब से बांट दिया जाए। ताकि कर्मचारियों को आवास लेने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ा।
यह भी है कारण
सातवें वेतन आयोग ने स्टेशन केटेगिरी के हिसाब से आठ, 16 और 24 फीसदी एचआरए (मकान भत्ता) कर दिया है।। इस हिसाब से अब कर्मचारियों को सरकारी आवास लेने पर दस हजार रुपये से ऊपर ही देना पड़ता है। इससे कम में उसे निजी आवास किराए पर मिल सकता है। इस कारण कर्मचारी आवास आवंटित होने के बाद वे उसमें कब्जा नहीं लेते हैं।