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जनपद में मिले 13 नए कुष्ठ रोगी -City
Updated Mon, 13 Aug 2018 07:32 PM IST
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जनपद में मिले 13 नए कुष्ठ रोगी
- कुष्ठ रोगी खोज अभियान के अंतर्गत 1275 संदिग्ध पाए गए
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में पहली बार चलाए गए कुष्ठ रोगी खोज अभियान के अंतर्गत 1275 संदिग्ध कुष्ठ रोगी पाए गए। इनमें से 13 नए कुष्ठ रोगी मिले हैं। जिसमें चार मोंठ, तीन गुरसराय, दो-दो चिरगांव व मऊरानीपुर और एक-एक बड़ागांव व झांसी के हैं।
16 से 29 जुलाई तक चलाए गए कुष्ठ रोगी खोज अभियान के तहत बच्चों का भी निरीक्षण किया गया। खास बात यह रही कि किसी भी बच्चे में कुष्ठ के लक्षण नहीं पाए गए। संदिग्ध रोगियों की खोज के लिए जनपद में 19,22,781 लोगों का निरीक्षण किया गया। इसके बाद 1275 संदिग्ध और 13 नए रोगी होने की पुष्टि हुई। झांसी में हर साल कुष्ठ रोगियों का औसतन अनुपात छह व्यक्ति प्रति एक लाख में रहता है। डिप्टी सीएमओ डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि कुष्ठ रोग का बैक्टीरिया टीबी के बैक्टीरिया की प्रजाति का होता है। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के छींकने से फैलता है। एक संक्रमित व्यक्ति के छींकने से एक बार में 1000 से ज्यादा बैक्टीरिया निकलते हैं। यदि सामने वाले व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है तो ऐसे व्यक्ति पर बैक्टीरिया जल्दी हावी हो जाता है। यह बैक्टीरिया सीधे जाकर नसों और मांसपेशियों में असर करता है।
दो तरह की दवा
दो तरह के मरीजों के लिए दो तरह की दवाएं दी जाती हैं। एक ऐसे रोगी जो असंक्रामक रोगी के रूप में होते हैं और उनसे कुष्ठ रोग फैलने का डर नहीं होता है, उन्हें छह माह तक पौसी बैसिलरी की दवा दी जाती है। दूसरे ऐसे रोगी जो संक्रामक रोगी के रूप में होते हैं, उन्हें 12 माह तक मल्टी बैसिलरी की दवा दी जाती है। यदि कुष्ठ का शुरुआती दौर में इलाज शुरू कर देते हैं, तो उसके बैक्टीरिया को रोका जा सकता है। इससे नए मरीज भी नहीं मिलेंगे और विकलांगता की स्थिति पैदा नहीं होगी।
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- कुष्ठ रोगी खोज अभियान के अंतर्गत 1275 संदिग्ध पाए गए
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में पहली बार चलाए गए कुष्ठ रोगी खोज अभियान के अंतर्गत 1275 संदिग्ध कुष्ठ रोगी पाए गए। इनमें से 13 नए कुष्ठ रोगी मिले हैं। जिसमें चार मोंठ, तीन गुरसराय, दो-दो चिरगांव व मऊरानीपुर और एक-एक बड़ागांव व झांसी के हैं।
16 से 29 जुलाई तक चलाए गए कुष्ठ रोगी खोज अभियान के तहत बच्चों का भी निरीक्षण किया गया। खास बात यह रही कि किसी भी बच्चे में कुष्ठ के लक्षण नहीं पाए गए। संदिग्ध रोगियों की खोज के लिए जनपद में 19,22,781 लोगों का निरीक्षण किया गया। इसके बाद 1275 संदिग्ध और 13 नए रोगी होने की पुष्टि हुई। झांसी में हर साल कुष्ठ रोगियों का औसतन अनुपात छह व्यक्ति प्रति एक लाख में रहता है। डिप्टी सीएमओ डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि कुष्ठ रोग का बैक्टीरिया टीबी के बैक्टीरिया की प्रजाति का होता है। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के छींकने से फैलता है। एक संक्रमित व्यक्ति के छींकने से एक बार में 1000 से ज्यादा बैक्टीरिया निकलते हैं। यदि सामने वाले व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है तो ऐसे व्यक्ति पर बैक्टीरिया जल्दी हावी हो जाता है। यह बैक्टीरिया सीधे जाकर नसों और मांसपेशियों में असर करता है।
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दो तरह की दवा
दो तरह के मरीजों के लिए दो तरह की दवाएं दी जाती हैं। एक ऐसे रोगी जो असंक्रामक रोगी के रूप में होते हैं और उनसे कुष्ठ रोग फैलने का डर नहीं होता है, उन्हें छह माह तक पौसी बैसिलरी की दवा दी जाती है। दूसरे ऐसे रोगी जो संक्रामक रोगी के रूप में होते हैं, उन्हें 12 माह तक मल्टी बैसिलरी की दवा दी जाती है। यदि कुष्ठ का शुरुआती दौर में इलाज शुरू कर देते हैं, तो उसके बैक्टीरिया को रोका जा सकता है। इससे नए मरीज भी नहीं मिलेंगे और विकलांगता की स्थिति पैदा नहीं होगी।
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