फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   अदर्स- मंडल के सौ गांवों में छुट्टा जानवरों का सर्वे-City

अदर्स- मंडल के सौ गांवों में छुट्टा जानवरों का सर्वे-City

Thu, 07 Sep 2017 08:23 PM IST
Updated Thu, 07 Sep 2017 08:23 PM IST
विज्ञापन
अदर्स- मंडल के सौ गांवों में छुट्टा जानवरों का सर्वे-City
फोटो
विज्ञापन

-----
सौ गांवों में छुट्टा जानवरों का सर्वे शुरू
सब हेड: छुट्टा जानवरों पर रोक लगाने के लिए स्थायी समाधान होगा
- मुख्यमंत्री के निर्देश पर हो रहा है सर्वे, बाद में बनेगी कार्ययोजना
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
ला-इलाज मर्ज की तरह दिनोंदिन बढ़ते जा रहे छुट्टा जानवरों की समस्या का स्थायी समाधान होगा। इसके लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर सर्वे किया जा रहा है कि वास्तव में छुट्टा जानवरों की संख्या कितनी है। इसी संख्या के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार होगी।
मुख्यमंत्री ने छुट्टा जानवरों की समस्या के स्थायी समाधान करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी तक छुट्टा जानवरों का कोई आंकड़ा नहीं होने के कारण कार्ययोजना बनाने में दिक्कत आ रही है। क्योंकि, जब तक यह पता नहीं होगा कि कितने जानवर छुट्टा घूमते हैं, तब तक कोई कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकती है। इसलिए मुख्यमंत्री ने आवारा जानवरों का सर्वे कर वास्तविक संख्या का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। इन्हीं निर्देशों के क्रम में मंडलायुक्त अमित गुप्ता ने मंडल के तीनों जिलों (झांसी, जालौन और ललितपुर) में छुट्टा जानवरों का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी पशुधन प्रसार अधिकारी और सभी पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्साधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिले में 850 गांव हैं, लेकिन इसमें से 47 गांव चिह्नित किए गए हैं। इन गांवों में छुट्टा जानवरों की संख्या सर्वाधिक दिखाई देती है। शेष 53 गांव जालौन और ललितपुर जिले के शामिल किए गए हैं।
विज्ञापन



इन बिंदुओं पर होगी जांच
इन गांवों में सर्वे के दौरान पता लगाया जाएगा कि किसान पशुओं को क्यों छोड़ देते हैं।
यदि पशुओं को छोड़ देतेे हैं तो क्या उन्हें इनके गायब हो जाने की चिंता नहीं रहती है।
पशुओं को छुट्टा छोड़ देने से उन्हें क्या नुकसान होता है।
पशुओं के लिए ऐसा क्या किया जाए कि किसान उन्हें न छोड़ें।
इसमें यह भी देखा जाएगा कि कितने पशु ऐसे हैं, जिनका कोई मालिक नहीं है।
कितने पशु दूध देने वाले हैं और कितने दूध नहीं देते हैं। यदि दूध देते भी हैं तो कितना।

कमिश्नर को सौंपेंगे रिपोर्ट
सभी बिंदुओं पर सर्वे करने के बाद एक सप्ताह में रिपोर्ट तैयार कर मंडलायुक्त को सौंपी जाएगी।
- वाईएस तोमर
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी


रात में पकड़े जा रहे छुट्टा जानवर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
छुट्टा जानवरों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत नगर निगम ने दिन में जानवरों के बिदकने की आशंका को देखते हुए अब रात में धरपकड़ अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्वच्छ भारत अभियान के विशेष सचिव एवं मिशन निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने प्रदेश के सभी नगर आयुक्तों से कहा कि छुट्टा जानवरों गोशालाओं में रखा जाए, ताकि वह इधर-उधर न घूमें। इसके लिए 16 सितंबर तक लगातार अभियान चलाया जाए और प्रतिदिन की रिपोर्ट शाम 06 बजे शासन को दी जाए। नगर निगम ने अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन सड़कों पर रहने वाली भीड़-भाड़ को देखते हुए दिन में छुट्टा जानवरों को पकड़ना संभव नहीं हो पा रहा था, क्योंकि किसी छुट्टा जानवर को पकड़ने पर उसके बिदकने की संभावना रहती है। इसलिए नगर निगम ने इन जानवरों को पकड़ने के लिए रात का समय चुना है। रात्रि 11 बजे से सुबह 06 बजे तक दस कर्मचारियों की टीम शहर में घूमकर छुट्टा जानवरों को पकड़ रही है। बुधवार की रात में 13 जानवर पकड़े गए। इन्हें सकरार स्थित गोशाला भेज दिया गया। पशु चिकित्साधिकारी डा. आरके निरंजन ने बताया कि छुट्टा जानवरों को पकड़ने में कठिनाइयां आ रही हैं, लेकिन उन्हें पकड़ा जा रहा है।


पशुपालकों पर होगी एफआईआर
जो लोग जानवर पाले हुए हैं और दूध निकालकर उन्हें छुट्टा छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी, ताकि उनमें जानवरों को छुट्टा छोड़ने की प्रवृत्ति न रहे। जानवर छुट्टा नहीं रहने से सड़कें खाली रहेंगी, जिससे दुर्घटना की संभावना नहीं रहेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed