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मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा, 55 से 11 लाख जुर्माना वसूला
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झांसी। दूध, दाल, नमकीन और मसालों तक में मिलावट की जा रही है। कहीं कलर मिलाया गया तो कहीं खतरनाक केमिकल का प्रयोग मिला है। प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले 55 लोगों पर 11 लाख का जुर्माना किया गया है। साथ ही खाद्य विभाग को निर्देशित किया गया है कि वह त्योहारी सीजन में निरंतर चेकिंग करते रहें।
क्या खाएं क्या पीएं। हर जगह मिलावट है। सबसे ज्यादा मिलावट के मामले दूध में सामने आ रहे हैं। प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट के मुताबिक दूध में पानी का तो प्रयोग हो नही रहा है क्रीम भी निकाली जा रही है। अप्रैल से सितंबर माह तक दूध के 70 सैंपल लिए गए थे। इन सभी को जांच के लिए गोरखपुर की प्रयोगशाला में भेजा गया था। वहां से जारी रिपोर्ट के मुताबिक दूध में पानी की मिलावट सर्वाधिक आई है। इसके साथ ही दाल, मसाले, मावा के भी नमूने भरे गए थे। विभागीय अफसरों का कहना है कि 284 सैंपल लेकर जांच को भेजे दए थे। इनमें 55 फेल हो गए थे। नमूने फेल होने के बाद एडीएम की कोर्ट में वाद दायर किया था। न्याय निर्णयन अधिकारी ने सुनवाई करने के दौरान सभी 55 खाद्य विक्रेताओं पर 11 लाख का जुर्माना लगाया है।
सबसे ज्यादा झांसी के विक्रेताओं पर अर्थदंड
मंडल में सबसे ज्यादा झांसी के खाद्य विक्रेताओं पर अर्थदंड लगा है। बताया गया कि झांसी के 22, ललितपुर के 15 और जालौन के 13 खाद्य पदार्थ बेचने वाले व्यापारियों पर जुर्माना लगाया गया है।
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जांच में आठ हानिकारक पदार्थ भी मिले
सहायक आयुक्त ने बताया कि हाल ही में प्रयोगशाला से प्राप्त हुई सैंपलों की जांच की रिपोर्ट में खाद्य पदार्थों के आठ नमूनों में सेहत के लिए हानिकारक तत्व भी पाए गए हैं। इनमें चार पान मसाला, एक-एक अनाज, गरम मसाला, तेल और कत्था में हानिकारक तत्व की पुष्टि हुई है। इस मामले में भी वाद दायर किया गया है।
ये है सजा का प्रावधान
जानकारों के मुताबिक किसी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट की पुष्टि होने पर पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा हानिकारक तत्व की पुष्टि होने पर दस लाख रुपये जुर्माना और उम्रकैद दोनों हो सकती है।
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क्या खाएं क्या पीएं। हर जगह मिलावट है। सबसे ज्यादा मिलावट के मामले दूध में सामने आ रहे हैं। प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट के मुताबिक दूध में पानी का तो प्रयोग हो नही रहा है क्रीम भी निकाली जा रही है। अप्रैल से सितंबर माह तक दूध के 70 सैंपल लिए गए थे। इन सभी को जांच के लिए गोरखपुर की प्रयोगशाला में भेजा गया था। वहां से जारी रिपोर्ट के मुताबिक दूध में पानी की मिलावट सर्वाधिक आई है। इसके साथ ही दाल, मसाले, मावा के भी नमूने भरे गए थे। विभागीय अफसरों का कहना है कि 284 सैंपल लेकर जांच को भेजे दए थे। इनमें 55 फेल हो गए थे। नमूने फेल होने के बाद एडीएम की कोर्ट में वाद दायर किया था। न्याय निर्णयन अधिकारी ने सुनवाई करने के दौरान सभी 55 खाद्य विक्रेताओं पर 11 लाख का जुर्माना लगाया है।
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सबसे ज्यादा झांसी के विक्रेताओं पर अर्थदंड
मंडल में सबसे ज्यादा झांसी के खाद्य विक्रेताओं पर अर्थदंड लगा है। बताया गया कि झांसी के 22, ललितपुर के 15 और जालौन के 13 खाद्य पदार्थ बेचने वाले व्यापारियों पर जुर्माना लगाया गया है।
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जांच में आठ हानिकारक पदार्थ भी मिले
सहायक आयुक्त ने बताया कि हाल ही में प्रयोगशाला से प्राप्त हुई सैंपलों की जांच की रिपोर्ट में खाद्य पदार्थों के आठ नमूनों में सेहत के लिए हानिकारक तत्व भी पाए गए हैं। इनमें चार पान मसाला, एक-एक अनाज, गरम मसाला, तेल और कत्था में हानिकारक तत्व की पुष्टि हुई है। इस मामले में भी वाद दायर किया गया है।
ये है सजा का प्रावधान
जानकारों के मुताबिक किसी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट की पुष्टि होने पर पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा हानिकारक तत्व की पुष्टि होने पर दस लाख रुपये जुर्माना और उम्रकैद दोनों हो सकती है।