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शस्त्र लाइसेंस की 1000 फाइल लौटाईं
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झांसी। कलक्ट्रेट से शस्त्र लाइसेंस की एक हजार फाइलें वापस लौटा दी गईं हैं। अब आवेदकों को इनमें कई और रिपोर्ट लगवानी होंगी। आवेदकों को बताना होगा कि उन्हें किससे जान का खतरा है। साथ ही पड़ोसियों से भी एनओसी लेना होगा। लोग शौकिया या स्टेटस सिंबल के तौर पर शस्त्र का इस्तेमाल न कर सकें और वास्तविक जरूरतमंदों को लाइसेंस जारी हों, इसके लिए यह नए प्रावधान लागू किए गए हैं।
जानमाल की सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस जारी किया जाता है। लेकिन, तमाम लोग शौकिया व बतौर स्टेटस सिंबल लाइसेंसी शस्त्रों का इस्तेमाल करते हैं। जिले में तेइस हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंसधारक हैं। मंजूरी के इंतजार में कलक्ट्रेट में एक हजार आवेदन लंबित पड़े हुए थे। लेकिन, ये सभी फाइलें लौटा दी गईं हैं। आवेदन में कुछ नए प्रावधान लागू कर दिए गए हैं।
अब आवेदन पत्र पर आवेदक के पड़ोसियों की रिपोर्ट भी लगाई जाएगी। उन्हें बताना होगा कि संबंधित व्यक्ति किस प्रकृति का है। वो शस्त्र रखने योग्य है या नहीं, झगड़ालू प्रवृत्ति का तो नहीं है। आमतौर पर आवेदकों की ओर से शस्त्र लेने का कारण जानमाल की सुरक्षा बताया जाता है, लेकिन अब आवेदकों को ये भी बताना होगा कि उन्हें किससे जान का खतरा है। ये सभी रिपोर्टें लगवाने के लिए कलक्ट्रेट पहुंची एक हजार फाइलें वापस लौटा दी गईं हैं। लोग शस्त्रों का दुरुपयोग न कर सकें, शौकिया शस्त्र न रखें और लाइसेंसी शस्त्र स्टेटस सिंबल न बनकर रह जाए, इसके लिए उक्त प्रावधान जोड़े गए हैं। ऐसे में वास्तविक जरूरतमंदों के ही शस्त्र लाइसेंस जारी हो पाएंगे।
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पांच हजार में सिर्फ दो सौ का सपना हुआ पूरा
झांसी। शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर अक्तूबर 2013 में रोक लगाई गई थी। पिछले साल ये रोक हटी है। इसके साथ ही आवेदकों की बाढ़ सी आ गई थी। एक ही माह में पांच हजार से अधिक आवेदन पत्र बिक गए थे। लेकिन, इस अवधि में महज 210 लोगों ही लाइसेंस जारी हो पाए हैं।
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जानमाल की सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस जारी किया जाता है। लेकिन, तमाम लोग शौकिया व बतौर स्टेटस सिंबल लाइसेंसी शस्त्रों का इस्तेमाल करते हैं। जिले में तेइस हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंसधारक हैं। मंजूरी के इंतजार में कलक्ट्रेट में एक हजार आवेदन लंबित पड़े हुए थे। लेकिन, ये सभी फाइलें लौटा दी गईं हैं। आवेदन में कुछ नए प्रावधान लागू कर दिए गए हैं।
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अब आवेदन पत्र पर आवेदक के पड़ोसियों की रिपोर्ट भी लगाई जाएगी। उन्हें बताना होगा कि संबंधित व्यक्ति किस प्रकृति का है। वो शस्त्र रखने योग्य है या नहीं, झगड़ालू प्रवृत्ति का तो नहीं है। आमतौर पर आवेदकों की ओर से शस्त्र लेने का कारण जानमाल की सुरक्षा बताया जाता है, लेकिन अब आवेदकों को ये भी बताना होगा कि उन्हें किससे जान का खतरा है। ये सभी रिपोर्टें लगवाने के लिए कलक्ट्रेट पहुंची एक हजार फाइलें वापस लौटा दी गईं हैं। लोग शस्त्रों का दुरुपयोग न कर सकें, शौकिया शस्त्र न रखें और लाइसेंसी शस्त्र स्टेटस सिंबल न बनकर रह जाए, इसके लिए उक्त प्रावधान जोड़े गए हैं। ऐसे में वास्तविक जरूरतमंदों के ही शस्त्र लाइसेंस जारी हो पाएंगे।
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पांच हजार में सिर्फ दो सौ का सपना हुआ पूरा
झांसी। शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर अक्तूबर 2013 में रोक लगाई गई थी। पिछले साल ये रोक हटी है। इसके साथ ही आवेदकों की बाढ़ सी आ गई थी। एक ही माह में पांच हजार से अधिक आवेदन पत्र बिक गए थे। लेकिन, इस अवधि में महज 210 लोगों ही लाइसेंस जारी हो पाए हैं।