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874 आपत्तियों के निस्तारण में छूट रहे पसीने, 10 महीने लेट हुई महायोजना
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झांसी। महानगर में आने वाले 10 साल में होने वाले बदलाव को देखते हुए तैयार की गई महायोजना 2031 अफसरों की लापरवाही से 10 महीने लेट हो गई है। महायोजना को लेकर आईं 874 आपत्तियों के निस्तारण में अफसरों के पसीने छूट रहे हैं। सबसे ज्यादा आपत्तियां ग्रीन बेल्ट को आवासीय और आवासीय भूमि को व्यावसायिक कराने को लेकर हैं।
झांसी विकास प्राधिकरण को जनवरी 2022 से नई महायोजना 2031 को लागू करना था। लेकिन लेटलतीफी के चलते महायोजना के पहले ड्राफ्ट का प्रकाशन ही जून में हो सका। इसके तहत झांसी का दायरा 90 वर्ग किमी से बढ़ाकर 160 वर्ग किमी किया गया। इसके साथ ही आवासीय क्षेत्र के रकबे में 35 फीसदी की बढ़ोतरी की गई। इस बार महायोजना में जेडीए सीमा में शामिल 101 गांवों को भी लाया गया।
महायोजना के प्रकाशन के बाद अफसरों ने लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगे थे। जिसके बाद जेडीए को 874 आपत्तियां मिलीं। इनमें सबसे ज्यादा करीब 30 आपत्ति ग्रीन बेल्ट को आवासीय करने और 25 आपत्तियां आवासीय को व्यावसायिक करने से संबंधित रहीं। अब आपत्तियों के निस्तारण में अफसरों के पसीने छूट रहे हैं। अफसर पांच महीने बाद भी आपत्तियों का निस्तारण नहीं करा सके हैं। जिसके चलते महायोजना करीब 10 महीने पिछड़ गई है।
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ग्रीन जोन को लेकर फंस रहा पेच
नई महायोजना में हाईवे पर स्थित ग्रीन और नो कंस्ट्रक्शन जोन को 30 मीटर करने का प्रस्ताव था। इसे लेकर लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई। साथ ही ग्रीन बेल्ट को कम करने की भी आपत्तियां बड़ी संख्या में मिलीं। लोगों का जोर ग्रीन बेल्ट को आवासीय करने पर है। ऐसे में अफसर ग्रीन जोन तय करने को लेकर मंथन कर रहे हैं।
महायोजना 2031 के तहत मिली आपत्तियों का निस्तारण किया जा रहा है। जल्द ही बोर्ड बैठक कराकर नई महायोजना को लागू कराया जाएगा। - दिनेश कुमार, सचिव जेडीए
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झांसी विकास प्राधिकरण को जनवरी 2022 से नई महायोजना 2031 को लागू करना था। लेकिन लेटलतीफी के चलते महायोजना के पहले ड्राफ्ट का प्रकाशन ही जून में हो सका। इसके तहत झांसी का दायरा 90 वर्ग किमी से बढ़ाकर 160 वर्ग किमी किया गया। इसके साथ ही आवासीय क्षेत्र के रकबे में 35 फीसदी की बढ़ोतरी की गई। इस बार महायोजना में जेडीए सीमा में शामिल 101 गांवों को भी लाया गया।
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महायोजना के प्रकाशन के बाद अफसरों ने लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगे थे। जिसके बाद जेडीए को 874 आपत्तियां मिलीं। इनमें सबसे ज्यादा करीब 30 आपत्ति ग्रीन बेल्ट को आवासीय करने और 25 आपत्तियां आवासीय को व्यावसायिक करने से संबंधित रहीं। अब आपत्तियों के निस्तारण में अफसरों के पसीने छूट रहे हैं। अफसर पांच महीने बाद भी आपत्तियों का निस्तारण नहीं करा सके हैं। जिसके चलते महायोजना करीब 10 महीने पिछड़ गई है।
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ग्रीन जोन को लेकर फंस रहा पेच
नई महायोजना में हाईवे पर स्थित ग्रीन और नो कंस्ट्रक्शन जोन को 30 मीटर करने का प्रस्ताव था। इसे लेकर लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई। साथ ही ग्रीन बेल्ट को कम करने की भी आपत्तियां बड़ी संख्या में मिलीं। लोगों का जोर ग्रीन बेल्ट को आवासीय करने पर है। ऐसे में अफसर ग्रीन जोन तय करने को लेकर मंथन कर रहे हैं।
महायोजना 2031 के तहत मिली आपत्तियों का निस्तारण किया जा रहा है। जल्द ही बोर्ड बैठक कराकर नई महायोजना को लागू कराया जाएगा। - दिनेश कुमार, सचिव जेडीए