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किसानों संग छल: 1.78 करोड़ का ड्राफ्ट लेने के बावजूद नहीं दिया सोलर पंप

Wed, 06 Jan 2021 01:32 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Wed, 06 Jan 2021 01:32 AM IST
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1.78 carore take Draf after that not give solar pump
सोलर सिंचाई पंप (सांकेतिक चित्र)
पीएम कुसुम योजना के जरिए किसानों को मिलने वाला सोलर पंप पैसा देने के बाद भी किसानों को नहीं मिला जबकि कंपनी को 1.78 करोड़ के बैंक ड्राफ्ट सौंपे जा चुके हैं। कंपनी को दिसंबर तक काम पूरा करना था लेकिन, अब तक एक भी किसान को यह पंप नहीं दिए गए।
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पीएम कुसुम योजना के जरिए सब्सिडी पर किसानों को सोलर पंप दिए जाने थे। बुंदेलखंड में जरूरत को देखते हुए दूसरे जनपदों के मुकाबले अधिक संख्या में पंप दिए जाने का लक्ष्य तय हुआ। यहां 3 एचपी (एसी) के 105 पंप, डीसी के 92 पंप एवं 5 एचपी(एसी) के 49 पंप दिए जाने थे। तीन एचपी के लिए किसानों ने 66223, 67748 एवं पांच एचपी सोलर पंप के लिए 94764 रुपये का ड्राफ्ट जमा किया।
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पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर कुल 246 किसानों से बैंक ड्राफ्ट लिए गए। यह ड्राफ्ट गुजरात की एक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से बनवाए गए लेकिन, कंपनी शुरू से ही इस काम को लेकर लापरवाह रही। सबसे पहले यह काम सितंबर तक पूरा होना था लेकिन, कंपनी ने कोई काम नहीं किए। इस वजह से किसानों के सभी ड्राफ्ट कालातीत हो गए।
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अमर उजाला में खबर छपने के बाद कंपनी की लापरवाही उजागर हुई। कंपनी को तलाश करके उसे फिर बुलाया गया। कृषि अधिकारियों के मुताबिक दिसंबर तक कंपनी ने पंप स्थापित कर देने का भरोसा दिलाया था लेकिन, दिसंबर खत्म हो जाने पर भी कंपनी का कोई अता-पता नहीं जबकि कंपनी को 1.78 करोड़ के ड्राफ्ट दिए जा चुके। वहीं, प्रभारी उपनिदेशक केके सिंह का कहना है कि कंपनी को जल्द ही इसे स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।


किसानों को हो चुका दो सीजन का नुकसान

सोलर पंप के लिए किसानों ने बड़ी उम्मीद के साथ बाजार से ऊंचे ब्याज दर में पैसा लेकर बैंक ड्राफ्ट जमा किया था लेकिन, कंपनी की लेटलतीफी की वजह से उसे खरीफ के साथ रबी की सिंचाई का भी लाभ नहीं मिल सका। पांच एचपी पंप से करीब 20 एकड़ क्षेत्रफल जबकि तीन एचपी से 12 एकड़ क्षेत्रफल में सिंचाई हो सकती है। इन सोलर पंपों से करीब 3500 एकड़ क्षेत्रफल असिंचित इलाके में सिंचाई हो सकती थी लेकिन, कंपनी के गैरजिम्मेदाराना रवैये के चलते किसानों को लाभ नहीं मिल रहा। एक तरह किसानों का पैसा फंसा हुआ है वहीं, ऋण लेकर बैंक ड्राफ्ट देने वाले किसानों को मोटा ब्याज तक चुकाना पड़ रहा है।
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