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Jaunpur News: पानी भाग रहा पाताल, नहीं चेते तो जलसंकट होगा विकराल
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जौनपुर। दिन पर दिन हो रहे भूमिगत जलदोहन के चलते जल स्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है। भूगर्भ विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक जौनपुर का जलस्तर हर साल औसतन 5 मीटर घटता जा रहा है। इसके बावजूद जिले में मौजूद कुएं और तालाबों को संरक्षण नहीं हो रहा है। जिससे आने वाले समय में पानी की समस्या विकराल हो सकती है
जल संचय को लेकर यदि समय रहते नहीं चेते तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। तालाब व कुओं के सूखने तथा लगातार जलस्तर गिरने से पशु-पक्षियों को भी पानी मिलना मुश्किल हो गया है। जिले में 13 हजार 676 छोटे-बड़े तालाब है, जबकि करीब पांच हजार कुएं हैं। इसमें अधिकांश कुएं सूख गए हैं। वहीं शासन की कवायद यह है कि तालाबों का अमृत सरोवर योजना के तहत सुंदरीकरण कराया जाए। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की सुस्ती से उन तालाबों में भी धूल उड़ रही है। गांव स्थित इन तालाबों और कुओं का जीर्णोद्धार कर जल संचय पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ये भी भूमिगत जलस्तर गिरने का एक बड़ा कारण है।
केस-1 केराकत विकास खंड केराकत के ग्राम पंचायत खरगसीपुर स्थित पुराने तालाब को अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत साल 2023-24 में सुदृढ़ीकरण कराया गया। तालाब 70 मीटर लंबा और 65 मीटर चौड़ा है। इसके बावजूद अब तक इस तालाब को पानी नसीब नहीं हुआ है।
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केस-2-सेमी क्रिटिकल जोन में पहुंच चुके सिरकोनी ब्लाॅक के अधिकतर कुएं सूख चुके हैं। यहां जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल योजना के सहारे घरों तक पानी पहुंचाने की कवायद चल रही है। इसके बावजूद प्रशासन कुओं के जीर्णोंद्धार की सुध नहीं ले रहा है।
केस-3-राजाबाजार में कई तालाब सूख चुके हैं। मल्लूपुर में बने तालाब में पानी सिर्फ बारिश के मौसम में दिखाई देता है। चरियाही गांव मेंं शिव मंदिर के बगल पुराना तालाब भी हमेशा सूखा रहता है। गर्मियों में पानी के लिए पशु-पक्षी बेहाल हो जाते हैं।
केस- 4 -सिंगरामऊ स्थित रघुनाथपुर में एक तालाब व सिंहावल के दो तालाब में, थाना परिसर स्थित तालाब, गुदर नाथ मंदिर परिसर का तालाब, सूख चुका है। यहां अब धूल उड़ रही है। इससे पशु पक्षियों को भी प्यास बुझाने इधर-उधर भटकना पड़ता है।
जिले में जलस्तर के सुधार के लिए तालाब, चेकडैम, पौधरोपण, रूफटाॅप हार्वेस्टिग, कच्ची बंधी बनाने का काम किया जा रहा है। तालाबों की निगरानी का काम जिला पंचायती राज विभाग व मनरेगा है। कुओं को पुन: जीवित करने के लिए योजना बनाई जा रही है। जल्द ही इस पर काम शुरू होगा।अरविंद राय, सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग
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जल संचय को लेकर यदि समय रहते नहीं चेते तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। तालाब व कुओं के सूखने तथा लगातार जलस्तर गिरने से पशु-पक्षियों को भी पानी मिलना मुश्किल हो गया है। जिले में 13 हजार 676 छोटे-बड़े तालाब है, जबकि करीब पांच हजार कुएं हैं। इसमें अधिकांश कुएं सूख गए हैं। वहीं शासन की कवायद यह है कि तालाबों का अमृत सरोवर योजना के तहत सुंदरीकरण कराया जाए। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की सुस्ती से उन तालाबों में भी धूल उड़ रही है। गांव स्थित इन तालाबों और कुओं का जीर्णोद्धार कर जल संचय पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ये भी भूमिगत जलस्तर गिरने का एक बड़ा कारण है।
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केस-1 केराकत विकास खंड केराकत के ग्राम पंचायत खरगसीपुर स्थित पुराने तालाब को अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत साल 2023-24 में सुदृढ़ीकरण कराया गया। तालाब 70 मीटर लंबा और 65 मीटर चौड़ा है। इसके बावजूद अब तक इस तालाब को पानी नसीब नहीं हुआ है।
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केस-2-सेमी क्रिटिकल जोन में पहुंच चुके सिरकोनी ब्लाॅक के अधिकतर कुएं सूख चुके हैं। यहां जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल योजना के सहारे घरों तक पानी पहुंचाने की कवायद चल रही है। इसके बावजूद प्रशासन कुओं के जीर्णोंद्धार की सुध नहीं ले रहा है।
केस-3-राजाबाजार में कई तालाब सूख चुके हैं। मल्लूपुर में बने तालाब में पानी सिर्फ बारिश के मौसम में दिखाई देता है। चरियाही गांव मेंं शिव मंदिर के बगल पुराना तालाब भी हमेशा सूखा रहता है। गर्मियों में पानी के लिए पशु-पक्षी बेहाल हो जाते हैं।
केस- 4 -सिंगरामऊ स्थित रघुनाथपुर में एक तालाब व सिंहावल के दो तालाब में, थाना परिसर स्थित तालाब, गुदर नाथ मंदिर परिसर का तालाब, सूख चुका है। यहां अब धूल उड़ रही है। इससे पशु पक्षियों को भी प्यास बुझाने इधर-उधर भटकना पड़ता है।
जिले में जलस्तर के सुधार के लिए तालाब, चेकडैम, पौधरोपण, रूफटाॅप हार्वेस्टिग, कच्ची बंधी बनाने का काम किया जा रहा है। तालाबों की निगरानी का काम जिला पंचायती राज विभाग व मनरेगा है। कुओं को पुन: जीवित करने के लिए योजना बनाई जा रही है। जल्द ही इस पर काम शुरू होगा।अरविंद राय, सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग