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'चाचा' को याद कर रो पड़े बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Wed, 29 Jul 2015 12:52 AM IST
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काका कलाम जब मेरे स्कूल में आए थे तो मैने उनसे हाथ मिलाया था, हम लोगों ने उनसे सवाल किए थे, उन्होंने जवाब दिया था, वह फिर आने का वादा कर के गए थे लेकिन अब कभी नहीं आएंगे। नगर के नेहरू बालोद्यान इंटर कालेज में पिछले साल आयोजित राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के मौके पर आए पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने वाले छात्रों को जब डा. कलाम के निधन की खबर मिली तो वे स्तब्ध रह गए। डा. कलाम के साथ बिताए उस क्षण को याद कर बच्चे भावुक हो उठे और रो पड़े।
कार्यक्रम में डा. कलाम का एक एक वाक्य बच्चों को याद है। दुनियां भर में मिसाइल मैन के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम के निधन के बाद मंगलवार को अमर उजाला ने नेहरू बालद्यान इंटर कालेज जौनपुर और प्रणवम स्कूल आफ चिल्ड्रेन आट्र्स सुजानगंज के छात्रों और शिक्षकों से बात की। डा. कलाम के निधन की घटना ने सभी के दिलों को झकझोर कर रख दिया है।
नेहरू बालोद्यान इंटर कालेज की 11वीं की छात्रा निवेदिता यादव कहती हैं कि काका कलाम पिछले साल जब मेरे स्कूल में आए थे तो मैने उनसे हाथ मिलाया था। विश्वास ही नहीं होता कि अब वह इस दुनियां में नहीं रहे। 12वीं की छात्रा स्मृति सिंह कहती हैं कि काका कलाम की यह बात जीवन में कभी नहीं भूलेगी उन्होंने कहा था कि स्वप्न देखना मत छोडना। जितने भी बड़े आविस्कार हुए हैं वो किसी के स्वप्न के ही परिणाम हैं। 11वीं के छात्र सुमित उपाध्याय ने कहा कि काका कलाम ने मेरे कुछ प्रश्नों का उत्तर दिया था। मैने अगला सवाल पूछा तो उन्होंने रोक दिया और कहा था कि अगली बार आऊंगा तब पूछना। दुख इस बात का है कि वह अब कभी नहीं आएंगे।
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आठवीं की छात्रा साक्षी सिंह ने उस कार्यक्रम में सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया था। साक्षी ने कहा कि मेरे स्कूल के कार्यक्रम में किसी ने काका कलाम से सवाल पूछा था कि आप भगवान पर भरोसा करते हैं तो वह कुछ देर के लिए मुस्कुराए और बोले कि ब्रह्मांड में कोई तो है जो इतनी बड़ी सृष्टि चला रहा है। डा. कलाम को बुके भेंट करने वाली 12वीं की छात्रा सालिनी सिंह ने कहा कि उनके निधन की खबर टीवी पर देख रही थी फिर भी भरोसा नहीं हो रहा था। टीडी कालेज के वीएड की विभागाध्यक्ष डा. श्रद्धा सिंह कहती हैं कि उन्होंने भी डा. कलाम से सवाल किया था लेकिन समय कम होने के कारण उन्हों ने कहा था कि अगली बार आएंगे तो ढेर सारे सवालों का जवाब दूंगा। दुख है कि वह अब कभी नहीं आएंगे। नेहरू बालोद्यान इंटर कालेज की प्रिंसिपल डा. चंद्रकला सिंह ने कहा कि डा. कलाम ने यहां बातचीत में कहा था कि अगर कभी हमारी मृत्यु हो जाए तो शोक में विद्यालय बंद न कीजिएगा।
बल्कि उस दिन और अधिक काम किया जाना चाहिए। लेकिन आज शोकसभा में बच्चों की से लेकर शिक्षकों तक की आंखे भर आई विद्यालय बंद करना पड़ा। विशाखा सिंह कहती हैं कि डा. कलाम ने यहां कहा था कि सपने जरूर देखना चाहिए और उसे जीवन में साकार करने के लिए प्रयत्नशील भी रहना चाहिए। उनका यह वाक्य कभी नहीं भूलेगा।
कार्यक्रम में डा. कलाम का एक एक वाक्य बच्चों को याद है। दुनियां भर में मिसाइल मैन के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम के निधन के बाद मंगलवार को अमर उजाला ने नेहरू बालद्यान इंटर कालेज जौनपुर और प्रणवम स्कूल आफ चिल्ड्रेन आट्र्स सुजानगंज के छात्रों और शिक्षकों से बात की। डा. कलाम के निधन की घटना ने सभी के दिलों को झकझोर कर रख दिया है।
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नेहरू बालोद्यान इंटर कालेज की 11वीं की छात्रा निवेदिता यादव कहती हैं कि काका कलाम पिछले साल जब मेरे स्कूल में आए थे तो मैने उनसे हाथ मिलाया था। विश्वास ही नहीं होता कि अब वह इस दुनियां में नहीं रहे। 12वीं की छात्रा स्मृति सिंह कहती हैं कि काका कलाम की यह बात जीवन में कभी नहीं भूलेगी उन्होंने कहा था कि स्वप्न देखना मत छोडना। जितने भी बड़े आविस्कार हुए हैं वो किसी के स्वप्न के ही परिणाम हैं। 11वीं के छात्र सुमित उपाध्याय ने कहा कि काका कलाम ने मेरे कुछ प्रश्नों का उत्तर दिया था। मैने अगला सवाल पूछा तो उन्होंने रोक दिया और कहा था कि अगली बार आऊंगा तब पूछना। दुख इस बात का है कि वह अब कभी नहीं आएंगे।
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आठवीं की छात्रा साक्षी सिंह ने उस कार्यक्रम में सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया था। साक्षी ने कहा कि मेरे स्कूल के कार्यक्रम में किसी ने काका कलाम से सवाल पूछा था कि आप भगवान पर भरोसा करते हैं तो वह कुछ देर के लिए मुस्कुराए और बोले कि ब्रह्मांड में कोई तो है जो इतनी बड़ी सृष्टि चला रहा है। डा. कलाम को बुके भेंट करने वाली 12वीं की छात्रा सालिनी सिंह ने कहा कि उनके निधन की खबर टीवी पर देख रही थी फिर भी भरोसा नहीं हो रहा था। टीडी कालेज के वीएड की विभागाध्यक्ष डा. श्रद्धा सिंह कहती हैं कि उन्होंने भी डा. कलाम से सवाल किया था लेकिन समय कम होने के कारण उन्हों ने कहा था कि अगली बार आएंगे तो ढेर सारे सवालों का जवाब दूंगा। दुख है कि वह अब कभी नहीं आएंगे। नेहरू बालोद्यान इंटर कालेज की प्रिंसिपल डा. चंद्रकला सिंह ने कहा कि डा. कलाम ने यहां बातचीत में कहा था कि अगर कभी हमारी मृत्यु हो जाए तो शोक में विद्यालय बंद न कीजिएगा।
बल्कि उस दिन और अधिक काम किया जाना चाहिए। लेकिन आज शोकसभा में बच्चों की से लेकर शिक्षकों तक की आंखे भर आई विद्यालय बंद करना पड़ा। विशाखा सिंह कहती हैं कि डा. कलाम ने यहां कहा था कि सपने जरूर देखना चाहिए और उसे जीवन में साकार करने के लिए प्रयत्नशील भी रहना चाहिए। उनका यह वाक्य कभी नहीं भूलेगा।