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वायु प्रदूषण रोकने से ही टलेगा कोरोना का खतरा

Sun, 26 Jul 2020 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2020 11:45 PM IST
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The risk of corona will be stopped only by stopping air pollution
जौनपुर। कोराना वायरस गर्मी और मानसून में खत्म हो जाएगा, ऐसा नहीं है। कोरोना वायरस के फैलाव में तापमान एक मात्र कारण नहीं है। कोरोना को लेकर गर्म देशों को भी पूरे एहतियात लागू करने चाहिए। पूविवि में हुए एक शोध में पाया गया कि लॉक डाउन के दौरान एयरोसाल कम बनने के कारण संक्रमण में काफी कमी थी।
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पूविवि के रज्जू भैया भौतिकीय विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रवण कुमार का शोधपत्र अंर्तराष्ट्रीय प्रतिष्ठित एल्सेवियर जर्नल ‘साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट’ में प्रकाशित हुई है। शोध में यह निष्कर्ष निकला है कि कोरोना वायरस का प्रसारण गर्म और आर्द्र (उच्च निरपेक्ष आर्द्रता) वातावरण में कम हो सकता है, यह भारत की स्थिति में सही नहीं पाया गया है। उन्होंने लॉक डाउन के समय वायु-प्रदूषण में हुई कमी का भी अध्ययन किया। तब वायु-प्रदूषण एवं एरोसोल में लगभग 50 प्रतिशत कमी थी। यह गिरावट उत्तर भारत में 60 प्रतिशत से ज्यादा पाई गई। इस अध्ययन में मार्च, अप्रैल और मई महीने के लिए कोविड-19 से प्रभावित भारतीय क्षेत्र के स्थानीय मौसम के पैटर्न का विश्लेषण करते हुए दैनिक कोविड-19 के केस, तापमान, सापेक्ष आर्द्रता और निरपेक्ष आर्द्रता जैसे मौसम संबंधी मापदंडों के प्रभाव की जांच की गई। शोधकर्ता डॉ. श्रवण कुमार के मुताबिक भारत में कोविड-19 केस और तापमान के बीच एक सकारात्मक संबंध पाया गया, जबकि सापेक्ष एवं निरपेक्ष आर्द्रता के साथ नकारात्मक संबंध मिला। शोध में कहा गया कि लॉक डाउन में एयरोसोल और अन्य प्रदूषक क्रमश: 60 और 45 प्रतिशत हो गए थे। संभावना है कि एयरोसोल कणों की अनुपलब्धता के कारण एयर ट्रांसमिशन से कोविड-19 के खतरे को कम कर दिया था। ऐसे में बिजली संयंत्रों, कारखानों और अन्य प्रदूषण उत्सर्जन केंद्रों को नियमों में छूट देना गलत विकल्प है। इससे मौत के आंकड़ों में भी वृद्धि होगी। डॉ. श्रवण कुमार की उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम यादव, रज्जू भइया संस्थान के डायरेक्टर प्रो. देवराज सिंह एवं शिक्षकों ने भी बधाई दी।
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