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आठवीं मोहर्रम पर किया जंजीर का मातम
जौनपुर ब्यूराे
Updated Fri, 23 Oct 2015 11:56 PM IST
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इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास की याद में गुरुवार को आठ मोहर्रम को मंडी नसीब खां मोहल्ला स्थित इमामबाड़ा नाजिम अली से जुलूस निकला। जुलूस में शबीहे अलम, दुलदुल और झूला बरामद हुआ।
वहां मौजूद अंजुमनों ने जंजीर, चाकू से मातम किया। जुलूस में बड़ी संख्या में संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए।
मजलिस को खेताब करते हुए ग्वालियर से आए मौलाना कल्बे रजा ने कहा कि हजरत अब्बास को इमाम हुसैन ने जंग की इजाजत नहीं दी थी। वह दरिया के किनारे बच्चों के लिए पानी लेने के लिए गए थे।
जहां उन्हें शहीद कर दिया गया। अगर उन्हें जंग की इजाजत मिलती तो यजीदी फौज का खात्मा हो जाता। कहा कि हजरत अब्बास के दोनों हाथ कट दिए गए थे। उनकी आंखों में तीर लग गई।
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उनका हाथ कट चुका था जिसके कारण आंख से तीर बाहर नहीं निकाल पाए। मसाएब सुनकर मजलिस में बैठा हर कोई सीने और सिर पर हाथ मारकर रोने लगा।
इसी दौरान इमामबाड़े में शबीहे अलम, झूला और दुलदुल बरामद हुआ। लोगों ने रोते हुए जियारत की। जुलूस में सभी अंजुमने अपने-अपने अलम के साथ पहुंची।
सभी अंजुमनों ने जंजीर और चाकू से मातम किया। अंजुमनों के सदस्यों ने जंजीर से पीठ पर और चाकू से सिर पर मातम कर पुरसा दिया। जुलूस कदीमी रास्तों से होता हुआ इमामबाड़ा शेख इल्तेफात हुसैन तक पहुंचा।
इमामबाड़े के अंदर से ताबूत निकला और दुलदुल से मिलन हुआ। मिलन होते ही वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। प्रबंध कमेटी के सदस्य सै. सलमान अब्बास बब्बू ने आभार जताया।
जुलूस में मरकजी मोर्रम कमेटी के अध्यक्ष शहंशाह हुसैन रिजवी, चांद बाबू, इरफान, सुहैल, सुहेब, इंतेखाब, मो. अजहर, आजमी, इमरान जैदी आदि मौजूद थे।
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वहां मौजूद अंजुमनों ने जंजीर, चाकू से मातम किया। जुलूस में बड़ी संख्या में संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए।
मजलिस को खेताब करते हुए ग्वालियर से आए मौलाना कल्बे रजा ने कहा कि हजरत अब्बास को इमाम हुसैन ने जंग की इजाजत नहीं दी थी। वह दरिया के किनारे बच्चों के लिए पानी लेने के लिए गए थे।
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जहां उन्हें शहीद कर दिया गया। अगर उन्हें जंग की इजाजत मिलती तो यजीदी फौज का खात्मा हो जाता। कहा कि हजरत अब्बास के दोनों हाथ कट दिए गए थे। उनकी आंखों में तीर लग गई।
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उनका हाथ कट चुका था जिसके कारण आंख से तीर बाहर नहीं निकाल पाए। मसाएब सुनकर मजलिस में बैठा हर कोई सीने और सिर पर हाथ मारकर रोने लगा।
इसी दौरान इमामबाड़े में शबीहे अलम, झूला और दुलदुल बरामद हुआ। लोगों ने रोते हुए जियारत की। जुलूस में सभी अंजुमने अपने-अपने अलम के साथ पहुंची।
सभी अंजुमनों ने जंजीर और चाकू से मातम किया। अंजुमनों के सदस्यों ने जंजीर से पीठ पर और चाकू से सिर पर मातम कर पुरसा दिया। जुलूस कदीमी रास्तों से होता हुआ इमामबाड़ा शेख इल्तेफात हुसैन तक पहुंचा।
इमामबाड़े के अंदर से ताबूत निकला और दुलदुल से मिलन हुआ। मिलन होते ही वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। प्रबंध कमेटी के सदस्य सै. सलमान अब्बास बब्बू ने आभार जताया।
जुलूस में मरकजी मोर्रम कमेटी के अध्यक्ष शहंशाह हुसैन रिजवी, चांद बाबू, इरफान, सुहैल, सुहेब, इंतेखाब, मो. अजहर, आजमी, इमरान जैदी आदि मौजूद थे।