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कोरोना काल में बढ़ रहा तनाव, जौनपुर में दो दिन में चार युवकों ने दे दी जान 

Thu, 04 Jun 2020 08:39 AM IST
विचित्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर Published by: विचित्र सिंह Updated Thu, 04 Jun 2020 08:39 AM IST
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Tension rising in the Corona period four youths died in Jaunpur in two days
Depression - फोटो : Pixabay
लॉकडाउन के दौरान आत्महत्या की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। पिछले 48 घंटों में चार युवकों ने आत्महत्या कर ली। कोई पारिवारिक विवाद से क्षुब्ध था तो कोई नशे की लत में अपनी जिंदगी हार गया।नेवढ़िया थाना क्षेत्र के होरैया गांव में बुधवार की देर शाम 24 वर्षीय राहुल यादव ने संदिग्ध हाल में जहर खा लिया। वह छह मई को मुंबई से आया था।
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छोटे भाई के मुताबिक परिवार में काफी समय से विवाद चल रहा था। इसी से क्षुब्ध होकर बुधवार को दोपहर में भाभी मायके चली गई। आए दिन होने वाले विवाद से आजिज राहुल ने देर शाम जहर खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे लेकर निजी अस्पताल पहुंचे। वहां से रेफर किए जाने के बाद वह राहुल को लेकर भदोही के एक अस्पताल जा रहे थे, मगर रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
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पुलिस घटना की छानबीन में जुट गई है। उधर, जफराबाद थाना क्षेत्र के बीबीपुर गांव में नीरज चौहान उर्फ चतरु (18) पुत्र मोहित ने बुधवार की रात फंदे से झूलकर जान दे दी। वह भी पारिवारिक कलह से आजिज था। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतरवाकर कब्जे में ले लिया। बता दें कि इसके पहले मंगलवार की रात मड़ियाहूं कोतवाली क्षेत्र के सुंबुलपुर गांव का निवासी अनिल कुमार पटेल (38) ने घर से थोड़ी दूर नीम के पेड़ में फांसी लगाई थी।
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पिता रामजीत पटेल के मुताबिक वह नशे का आदी था। वहीं रामपुर थाना क्षेत्र के धरमपुर गांव निवासी त्रिभुवन गौतम के छोटे पुत्र आशीष गौतम (22) ने अपनी बीमारी से तंग होकर मंगलवार की रात फांसी लगाकर जान दे दी थी। समाजशास्त्री प्रो. आरएन त्रिपाठी ने बताया कि लंबे समय बाद बहुत से लोग घर वापस आ रहे हैं। अब तक उनके मकान और जमीन की सुविधाओं का जो लोग लाभ ले रहे थे, उनसे विवाद होना स्वाभाविक था।

जो लोग वापस आए उनका परिवार के साथ सामंजस्य बनना मुश्किल है। इससे कचलते भी विवाद बढ़े हैं। अभाव ग्रस्तता के चलते भी व्यक्ति उन्मादी और हिंसक हो जाता है। मनोवैज्ञानिक प्रो.आरएन सिंह ने बताया कि दुनिया भर में अपराध बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में यहां भी मारपीट की घटनाएं बढ़ सकती हैं।


लोगों की मानसिक ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में नहीं लगेगी तो उनमें नकारात्मक प्रवृत्तियां बढ़ेंगी। लॉकडाउन के बाद दूसरे शहरों से गांव आने वालों से तालमेल में भी दिक्कत हो रही है। जब लोगों का अपना सुख सर्वोपरि हो जाता है तो द्वंद लाजमी है। सहनशीलता कम हो गई है। ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर लड़ाइयां बढ़ेंगी। 
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