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कर्बला में दफन किए गए ताजिए, अजादारों ने किया नौहा मातम

Fri, 20 Aug 2021 07:17 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 20 Aug 2021 07:17 PM IST
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Tajiyas buried in Karbala, Azadars mourned
कर्बला में दफन किए गए ताजिए, अजादारों ने किया नौहा मातम
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नौहा मातम कर कर्बला के शहीदों को पेश किया नजराने अकीदत
सदर इमामबाड़ा बेगमगंज में रहा पुलिस का पहरा
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। जिले में शुक्रवार को यौमे आशूरा गमगीन माहौल में मनाया गया। कोविड-19 के चलते इस साल भी ताजिया का जुलूस नहीं निकाला गया। अजादारों ने अपने अपने अजाखानों में रखे ताजियों को कोविड-19 के प्रोटोकाल का पालन करते हुए स्थानीय कर्बला में सुपुर्द- ए -खाक कर दिया। इस दौरान शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किए गए था। खास तौर पर बेगमगंज स्थित सदर इमामबाड़ा के पास भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनाती की गई थी। पिछले वर्ष पाबंदी के बाद भी ताजिए का जुलूस एक साथ निकला तो पुलिस प्रशासन और ताजियादारों में तीखी नोंकझोंक हुई थी। पिछले वर्ष की घटना से सबक लेते हुए प्रशासन ने सुरक्षा की तैयारी की थी।

नवीं मोहर्रम को नगर के बलुआघाट , कल्लू इमामबाड़ा, पान दरीबा, पुरानी बाजार, कटघरा, मुफ्ती मोहल्ला,उछोटी लाइन इमामबाड़ा सहित शहर के अन्य इलाकों में अजादारों ने पूरी रात नौहा मातम कर कर्बला के शहीदों को नजराने अकीदत पेश किया । सुबह फज्र की नमाज के बाद अलविदा नौहा पढ़ कर इमाम हुसैन को रुखसत किया। 1400 साल पहले दस मोहर्रम को हजरत इमाम हुसैन व उनके 71 साथियों को कर्बला के मैदान में यजीदी हुकूमत की फौजों ने तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया था। यहां तक की मासूम बच्चों पर भी जुल्म करने से फौजी पीछे नहीं रहे । छह महीने के बच्चे जनाबे अली असगर को भी प्यासा शहीद कर दिया गया था । जिन्हें इमाम हुसैन पानी पिलाने कर्बला के मैदान में ले कर गये थे।यही वजह है कि दसवीं मोहर्रम को यौमें आशूरा मनाया जाता है।रात भर मजलिस मातम के बाद सुबह आमाल लोगो ने अदा किया। शाम को कोविड-19 की गाइडलाइन के तहत शामे गरीबा की मजलिस इमामबाड़ा में संपन्न हुई। मौलाना ने कर्बला का मंजर बयां किया तो लोग रोने लगे। हर तरफ बस ऽया हुसैन या हुसैन ऽकी सदा सुनाई दे रही थी। बक्शा के मोहम्मदपुर, दक्षिणपट्टी, सदरुद्दीनपुर, उत्तरपट्टी, बर्रैपट्टी, पूरां शेरखां आदि गांवों में भी अजादारों ने नौहा मातम किया। दोपहर बाद सदर इमामबाड़ा में कोविड प्रोटोकाल के तहत ताजिए दफ्न किए गए। शाहगंज, केराकत, मड़ियाहूं, मछलीशहर और बदलापुर तहसील क्षेत्र में भी शिया मुसलमानों ने कर्बला में ताजिए दफ्न किए।
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